साल का अंतिम शनि प्रदोष, नए साल को शुभ बनाने के लिए कर लें ये उपाय । जनता से रिश्ता

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। 9 नवंबर यानी शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने से शनि प्रदोष व्रत का संयोग बना है और यह साल का अंतिम शनि प्रदोष व्रत है। 2020 के पहले महीने में ही शनि मकर राशि में प्रवेश करने वाले हैं। इससे वृश्चिक राशि के व्यक्ति साढ़ेसाती से मुक्त हो जाएंगे लेकिन कुंभ वालों की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। शनि प्रदोष व्रत से संयोग में शनि महाराज को मना लें तो आने वाले नए साल में शनि जनित कष्ट में कमी ला सकते हैं। वैसे तो प्रदोष का व्रत शंकर जी को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है लेकिन शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष पर महादेव के साथ-साथ शनिदेव की पूजा भी होती है। इसलिए इस व्रत को शनि प्रदोष कहा जाता है। आइए जानते हैं नए साल तो शुभ बनाने वाले उपायों के बारे में…

नौकरी में आ रही है रुकावट करें ये उपाय

अगर आर्थिक हानि हो रही हो, चोरी का डर हो या नौकरी में परेशानी आ रही है तो इसके लिए आप शनि प्रदोष के दिन नाव की कील की अंगूठी पहनें या फिर आप अपने घर से मंदिर तक नंगे पैर जाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे आपकी परेशानी में कमी आएगी।

इस मंत्र का करें जप

शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए मांस मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए और शनि मंत्र ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।’ का नियमित यथासंभव पाठ करें। इससे आपके आसपास सकारात्मक माहौल रहेगा, जिससे आपकी सभी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी।

दाम्पत्य जीवन की परेशानियां होंगी दूर

अगर आपका दाम्पत्य जीवन, प्रेम संबंध या फिर स्वास्थ्य में परेशानी आ रही हैं तो आप नए साल पर यानी एक जनवरी को या फिर मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर लगाएं और शनिवदेव के मंदिर जाएं। आप काले कुत्ते को खाना भी खिला सकते हैं। इससे प्रेम संबंध और दाम्पत्य जीवन की परेशानियां दूर होंगी।

शनि महाराज को चढ़ाएं तेल

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, शनि प्रदोष वाले दिन शनि महाराज को तेल चढ़ाने से शनि के अशुभ प्रभाव से राहत मिलती है और जो लोग साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित हैं उन्हें भी लाभ हासिल होता है। शनि महाराज को तेल चढ़ाने से पहले इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि इस तेल में अपना चेहरा जरूर देख लें। इससे आपके ग्रह दोष कम होते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शनिदेव की होगी कृपा

शनिवार के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के वृक्ष के पास सरसों तेल का दीपक, तिल और जल का पात्र लेकर जाएं। फिर जल में तिल डालकर पीपल की जड़ में डाल दें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। इसके अलावा शनिदेव के सामने सरसों का दीपक भी जलाना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव की परम कृपा प्राप्त होती है।