जानिए व्रत में क्यों नहीं किया जाता हल्दी का सेवन | जनता से रिश्ता ।

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क | हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बहुत महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र नवरात्रि से ही नए साल की शुरुआत होती है। ज्यादातर लोग नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक व्रत रहते हैं और शरीर की शुद्धि करते हैं। नवरात्रि या किसी भी व्रत के दौरान लोग फल, डेयरी प्रोडक्ट, ड्राई फूट्स के साथ ही मसालों का भी सेवन करते हैं। लेकिन उपवास में जिस एक मसाले से लोग परहेज करते हैं वह है हल्दी। आइये जानते हैं व्रत के आहार में हल्दी क्यों नहीं शामिल की जाती है…

हल्दी का उपयोग

Navratri 2020: कई गुणों से भरपूर है हल्दी, लेकिन व्रत में इसलिए नहीं किया जाता इसका सेवन

हल्दी एक ऐसा मसाला है जो सूजन को दूर करता है और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है। हल्दी का इस्तेमाल सभी तरह के शाकाहारी और मांसाहारी भोजन में किया जाता है। लेकिन व्रत के दौरान लोग हल्दी का सेवन क्यों नहीं करते हैं? आइये जानते हैं।

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आयुर्वेद में हल्दी का महत्व

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नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास के पीछे वैज्ञानिक कारण है। इस दौरान व्रत रखने से शरीर डिटॉक्स होता है और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। नवरात्रि या कोई अन्य व्रत सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं किया जाता है बल्कि व्रत रखने से सेहत को भी कई फायदे होते हैं। व्रत के दौरान जिन खाद्य पदार्थों को खाया या परहेज किया जाता है वे आयुर्वेद के प्राचीन भारतीय विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं। आयुर्वेद में शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर खाद्य पदार्थों को तीन भागों में बांटा गया है- सात्विक, राजसिक और तामसिक।

नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास के पीछे वैज्ञानिक कारण है। इस दौरान व्रत रखने से शरीर डिटॉक्स होता है और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। नवरात्रि या कोई अन्य व्रत सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं किया जाता है बल्कि व्रत रखने से सेहत को भी कई फायदे होते हैं। व्रत के दौरान जिन खाद्य पदार्थों को खाया या परहेज किया जाता है वे आयुर्वेद के प्राचीन भारतीय विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं। आयुर्वेद में शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर खाद्य पदार्थों को तीन भागों में बांटा गया है- सात्विक, राजसिक और तामसिक।

सात्विक भोजन

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व्रत के दौरान सात्विक भोजन का बहुत महत्व है। इस तरह के भोजन शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करते हैं। सात्विक आहार को स्वच्छ और शुद्ध माना जाता है जो व्रत के दौरान सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

​राजसिक और तामसिक भोजन

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तामसिक और राजसिक भोजन को आयुर्वेद में सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। इस तरह का भोजन करने से शरीर में भारीपन, पेट में सूजन सहित अन्य समस्याएं पैदा होती हैं इस कारण व्रत में हल्दी से किया जाता है परहेज

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हल्दी एक ऐसा मसाला है जिसे सात्विक प्रकृति का माना जाता है। लेकिन यह स्वाद में कड़वी होती है और शरीर में गर्माहट पैदा करती है इसलिए व्रत के दौरान किसी भी आहार में हल्दी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। चूंकि चैत्र नवरात्रि के समय मौसम हल्का गर्म होता है और इस समय व्रत के दौरान हल्दी का सेवन करने से शरीर में बेचैनी महसूस हो सकती है। इसलिए इससे परहेज करना चाहिए अगर आप नवरात्रि में नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और आपको हल्दी के नकारात्मक प्रभाव से कोई परेशानी नहीं है तो व्रत के आहार में हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।