जानिए अलग-अलग मंदिरों में मिलने वाले इन प्रसादों के बारे में | जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हमारे देश में कई धर्मों और परंपराओं को मानने वाले लोग रहते हैं. यही वजह है कि देश में जितने सम्प्रदाय, धर्म और परम्पराएं हैं उतने ही मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल भी हैं. हर धार्मिक स्थल की अपनी अलग-अलग परम्पराएं और मान्यताएं हैं. इसी तरह अलग अलग धर्म स्थानों पर मिलने वाला प्रसाद भी अलग अलग होता है. कुछ प्रसाद बेहद लजीज होते हैं जिन्हें एक बार खाने के बारे दोबारा खाने के लिए मन ललचाता है तो वहीं कुछ ऐसे भी प्रसाद हैं जिसके बारे में सुनकर आपको थोड़ा अजीब भी महसूस हो सकता है. आइए जानते हैं अपने देश के मंदिरों में मिलने वाले अलग-अलग प्रसादों के बारे में

Sunday Special: अलग-अलग मंदिरों में मिलने वाले इन प्रसादों के बारे में क्या आप जानते हैं?

चॉकलेट प्रसाद:
चॉकलेट का प्रसाद ये सुनकर ही मुंह पर मुस्कान आ गई न. तो जान लीजिए कि केरल के अलेप्पी में बने इष्ट देव के मंदिर थेक्कन पलानी बालसुब्रमणिया में भगवान बालामुरुगन को चॉकलेट प्रसाद का भोग लगता है. यहां आने वाले भक्त भी भगवान को चॉकलेट ही अर्पित करते हैं और खास बात ये कि भक्तों को भी प्रसाद में चॉकलेट ही दी जाती है

भगवान  को अन्न ब्रह्म या महाप्रसादका भोग लगाया जाता है. इस प्रसाद की ख़ास बात यह है कि इसे मंदिर के परिसर में ही चूल्हे में साफ लकड़ियों के ईंधन में मिट्टी के बर्तन में भाप में पकाया जाता है. बाद में इस प्रसाद को ‘आनंद बाजार’ में बेचने की भी परंपरा है.

माथाडी प्रसाद या थोर:
श्रीनाथ देवता का मंदिर जोकि राजस्थान के नाथ द्वार में है, वहां भगवान को माथाडी प्रसाद या थोर नाम का प्रसाद अर्पित किया जाता है. यह दरअसल एक ऐसी मिठाई है जिसे घी में तलने के बाद चाशनी से तरबतर किया जाता है. इस प्रसाद की ख़ास बात यह है कि यह प्रसाद मुंह में जाते ही घुल जाता है और इस प्रसाद को बड़े आराम से वो लोग भी ग्रहण कर सकते हैं जिनके मुंह में दांत नहीं होते हैं

श्रीवारी लड्डू प्रसाद/अचकस लड्डू प्रसाद:
श्रीवारी लड्डू प्रसाद/अचकस लड्डू प्रसाद यह प्रसाद दुनिया भर में मशहूर है. इस प्रसाद को तिरुमाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किया जाता है. ‘पोटू’ नाम के ख़ास रसोईघर में इस प्रसाद को बेसन, इलायची, काजू, देसी घी, चीनी और किशमिश के इस्तेमाल से तैयार किया जाता है. इस प्रसाद की सबसे ख़ास बात ये है कि जीआई अधिनियम 1999 के तहत इस लड्डू प्रसाद को भौगोलिक संकेतक के रूप में फ़ूड आइटम्स में रजिस्टर किया था. मंदिर के ख़ास पुजारी मिलकर इस प्रसाद को तैयार करते हैं.

बाल भोग:
मथुरा वृन्दावन में बांके बिहारी में मंदिर में भक्तों को बाल भोग प्रसाद वितरित किया जाता है. लड्डू गोपाल बांके बिहारी को भी यही प्रसाद अर्पित किया जाता है. इस प्रसाद में सूखे आलू की सब्जी, बेसन के लड्डू और कचौरी शामिल होती है. बाल भोग बाल भोग मंदिर में लड्डू गोपाल को अर्पित किया जाने वाला पहला प्रसाद होता है.

नूडल्स का प्रसाद:
कोलकता (पश्चिम बंगाल) में चायनीज काली के मंदिर में चायनीज नूडल्स, चॉप सूय, सब्जी और चावल से निर्मित प्रसाद अर्पित किया जाता है. बता दें कि यह मंदिर कोलकता के टांगरा जोकि चाइनीज बस्ती का एक इलाका है, वहां बसा हुआ है

चूहे का जूठा प्रसाद:
चूहे का जूठा प्रसाद सुनकर आपको भले ही अजीब लगे लेकिन ये सच है. राजस्थान के बीकानेर के करणी माता मंदिर में लोग बहुत दूर दूर से इस अनोखे प्रसाद को लेने आते हैं. इस मंदिर की सबसे ख़ास बात है कि करणी माता को दूध का प्रसाद चढ़ाने के बाद इस प्रसाद को चूहों को दे दिया जाता है. चूहों के जूठा करने के बाद ही इस प्रसाद को भक्तों को दिया जाता है

चूहे का जूठा प्रसाद:
चूहे का जूठा प्रसाद सुनकर आपको भले ही अजीब लगे लेकिन ये सच है. राजस्थान के बीकानेर के करणी माता मंदिर में लोग बहुत दूर दूर से इस अनोखे प्रसाद को लेने आते हैं. इस मंदिर की सबसे ख़ास बात है कि करणी माता को दूध का प्रसाद चढ़ाने के बाद इस प्रसाद को चूहों को दे दिया जाता है. चूहों के जूठा करने के बाद ही इस प्रसाद को भक्तों को दिया जाता है

ऊदी प्रसाद:
शिरडी में बने साई बाबा के मंदिर का मुख्य प्रसाद ‘ऊदी’ को कहा जाता है. ऊदी प्रसाद मंदिर द्वारा ही एक पैकेट में दिया जाता है. यह दरअसल, पूजा पाठ और हवन की भस्म से बना प्रसाद होता है. साईं भक्त इस प्रसाद के प्रति काफी आस्था रखते हैं

कड़ाह प्रसाद:
सिख धर्म में कड़ाह प्रसाद देने का प्रचलन है. गुरुद्वारों से लेकर धार्मिक आयोजनों पर मुख्य प्रसाद ‘कड़ाह प्रसाद’ को ही माना जाता है. यह दरअसल शुद्ध देशी घी में आटे, चीनी को सामान अनुपात में मिलाकर बनाया गया हलवा होता है. कुछ लोग इसे हलवा प्रसाद भी कहते हैं