छत्तीसगढ़

इंद्रप्रस्थ फेस-2: तीन साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट का पजेशन

Janta se Rishta
23 Sep 2020 6:12 AM GMT
इंद्रप्रस्थ फेस-2: तीन साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट का पजेशन
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  • आर.डी.ए. की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हितग्राही
  • इएमआई के साथ हाउस रेंट का भी उठाना पड़ रहा है बोझ
  • क्या आर.डी.ए. के लिए नहीं होता है रेरा कानून लागू
  • बर्दाश्त की हद हो गई अब, इन सभी लोगों ने रेरा में जाने का मन बना लिया है

जसेरि रिपोर्टर
रायपुर । रायपुर विकास प्राधिकरण के इंद्रप्रस्थ योजना के तहत फ्लैट्स के लिए पूरी किश्त जमा करने और तीन साल की मियाद पूरी होने के बाद भी हितग्राहियों को पजेशन नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते हितग्राहियों को लोन की प्री-इएमआई के साथ मकान किराए की दोहरी खर्च की मार झेलनी पड़ रही है। ऊपर से जीएसटी का बोझ भी सिर पर है। पीएम आवास योजना की सब्सिडी का लाभ भी आज तक इस योजना में फ्लैट खरीदने वाले किसी हितग्राही को नहीे मिला है। आरडीए के कुप्रबंधन के चलते दो हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और आर्थिक परेशानी उठाने मजबूर हैं। एक ओर योजना में लगी निर्माण एजेंसी फंड जारी करने में आरडीए द्वारा की जा रही लेट-लतीफी को प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी की वजह बता रहे हैं वहीं केन्द्र की इस महती योजना को लेकर राज्य सरकार की उदासीनता भी देरी की मुख्य वजह है। हालाकि आरडीए कमिश्नर अय्याज तंबोली के अनुसार इंद्रप्रस्थ फेस-2 योजना में कुछ काम शेष है जिसे साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, इसके बाद हितग्राहियों को जल्द पजेशन दे दिया जाएगा। इस योजना में ज्यादातर हितग्राहहियों ने बैंक से फाइनेंस कराया है, जिसमें बैंक के जरिए आरडीए के खाते में फ्लैट्स की राशि भेजी जा चुकी है। वहीं अब आबंटितों की किश्तें बैंकों में चल रही हैं। फ्लैट्स में किश्तें देने के बादहितग्राहियों को वर्तमान में घर का किराया भी देना पड़ रहा है। पीएम आवास योजना के अनुसार इस योजना में ऐसे अभ्यर्थियों को पात्र किया गया है, जिनके पास स्वयं का पक्का मकान नहीं है। इस प्रोजेक्ट में अभी भी 20-30 फीसदी काम शेष है, बिल्डिंग खड़ी कर रंग-रागन कर दिया गया है जबकि दरवाजे, खिड़कियां, बाथरूम की फिटिंग्स जैसे कई काम बाकी हैं।

दिसंबर-19 में मिलना था पजेशन

वर्ष 2016 में बुकिंग, लाटरी व आबंटन सूची जारी करने के बाद तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा कर फ्लैट का पजेशन साल 2019 के अंत तक देने का लक्ष्य था लेकिन आरडीए की कुप्रबंध और देरी की वजह से 2020 के अंत में भी हितग्राहियों को पजेशन मिल पाएगा इसमें भी संदेह है। कोविड-19 की वजह प्रोजेक्ट को पूरा करने चार महीने का अतिक्ति समय मिला है, फिर भी कास की गति में कोई तेजी नहीं आई है।

निर्माण कार्य में भी उड़ाई जा रही मानकों की धज्जियां

निर्माण कार्य में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मकान आवंटन के दौरान हितग्राहियों को दिए गए कैटलॉग के मुताबिक कार्य नहीं हो रहा है। पजेशन से पूर्व लोग अपने आशियाने को देखने जा रहे हैं तो उनके होश उड़ जा रहे हैं। वह सस्ते मकान देने के नाम पर ठगी की बात कह रहे हैं। घटिया निर्माण और कैटलॉग के अनुसार काम नहीं होने से उनमें आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने बैंक से लोन लेकर फ्लैट्स की राशि अदा कर दी है, लेकिन काम की लेटलतीफी के चलते किस्त पटाने के साथ किराए के मकान में रहने का दंश झेलने को मजबूर हैं। करीब 250 करोड़ का यह आवासीय प्रोजेक्ट समय सीमा से छह महीने लेट है। इसके चलते इसकी लागत भी बढ़ रही है। आठ मंजिले इमारतों की छतों से पानी टपकता दिखा। घटिया निर्माण के साथ फ्लैट्स में लगने वाले उपकरण भी दोयम दर्जे के मिले। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी और आरडीए के इंजीनियरों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य का खेल जारी है। इसकी जानकारी होने के बावजूद आरडीए के उच्चाधिकारियों ने एजेंसी को हिदायत तक नहीं दी है। कैटलॉग के मुताबिक स्लाइडिंग खिड़की लगाने सहित अन्य कार्यों की अनदेखी की गई है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि एजेंसी ने जो काम पूरे नहीं किए, उनका भी भुगतान कर दिया गया है। यह भी आरोप है कि अफसरों ने जमकर कमीशनखोरी की है।

मिक्सर में रेत ज्यादा, सीमेंट घटिया

निजी आवास का निर्माण कराने वाली प्राइवेट एजेंसियों के इंजीनियरों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में बालू का ज्यादा का इस्तेमाल किया गया है और घटिया सीमेंट का उपयोग किया गया है। इसकी जांच आरडीए के इंजीनियरों को जांच करनी चाहिए थी। इन फ्लैट्स में सुधार के बावजूद हमेशा सीपेज की समस्या रहेगी। किचन के प्लेटफार्म के निर्माण में गड़बड़ी की गई है। प्लेटफार्म इतना संकरा है कि सिलेंडर तक नहीं रखा जा सकता। सिंक और एग्जास्ट के लिए भी जगह नहीं छोड़ी गई है। कैटलॉग के अनुसार व्हाइट सीमेंट या पुट्टी लगानी है, लेकिन इसके बिना ही पोताई की जा रही है। यहां गार्डन के लिए जगह तो छोड़ी गई है, लेकिन विकसित नहीं किया जा सका है। पेवर ब्लॉक इतने घटिया हैं कि अभी से टूटने लगे हैं। घटिया दरवाजे और बिजली उपकरण आदि लगाये जा रहे हैं। ऐसे में हितग्राहियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

कैटलॉग में इन सुविधाओं का उल्लेख

  • जलापूर्ति के लिए हाइड्रो न्यूमेटिक पंप
  • ठ्ठ भूमिगत सीवरेज नेटवर्क
  • ठ्ठ भूमिगत केबल नेटवर्क
  • ठ्ठ बारिश के पानी के लिए स्टार्म सीवर लाइन
  • ठ्ठ भीतरी दीवारों पर व्हाइटवाश
  • ठ्ठ बाहरी दीवारों पर वाटर प्रुफ सीमेंट पेंट
  • ठ्ठ किचन फ्लेटफार्म में राजिम पत्थर, स्टील सींक
  • ठ्ठ सड़कों के किनारे पेवर ब्लॉक

नए अध्यक्ष भी बेपरवाह

आरडीए में नए अध्यक्ष की नियुक्ति हुए भी लगभग डेढ़-दो महीने हो गए हैं लेकिन अधूरी योजनाओं को जल्द पूरा कराने को लेकर उन्होंने भी किसी तरह की तत्परता नहीं दिखाई है। प्राधिकरण के भीतर ही ऐसी चर्चा है कि नए अध्यक्ष आरडीए के काम-काज पर नजर रखने से ज्यादा विधानसभा अध्यक्ष निवास के चक्कर लगाने में ही व्यस्त रहते हैं।

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