ICC : श्रीलंकाई टीम के सामने विवादों से उबरकर संभलने की चुनौती

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- श्रीलंकाई क्रिकेट ने बीते तीन साल में सिर्फ पतन की राह देखी है। साल 2011 में कुमार संगकारा की कप्तानी में इस टीम ने फाइनल में जगह बनाई थी। इसके बाद संगकारा, महेला जयवर्धने, तिलकरत्ने दिलशान समेत कई दिग्गज खिलाड़ियों के संन्यास और क्रिकेट बोर्ड में अंदरूनी राजनीति के कारण 1996 की चैंपियन टीम ने बीते वर्षों में काफी बुरा दौर देखा। यह टीम आईसीसी की वनडे रैंकिंग में 9वें स्थान तक लुढ़क गई है। वर्ल्ड कप में खेलने वाली दस टीमों में सिर्फ अफगानिस्तान ही रैंकिंग में उससे नीचे है। श्रीलंकाई टीम ने अभी तक वर्ल्ड कप के सभी 12 संस्करण खेले हैं। उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 1996 के विश्व कप में रहा है, जब उसने अर्जुन रणतुंगा की कप्तानी में खिताब जीता है। उसके बाद साल 2007 और 2011 के विश्व कप में श्रीलंकाई टीम ने फाइनल तक पहुंची जहां उसे क्रमश: ऑस्ट्रेलिया और भारत के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

टीम के खिलाड़ियों में आपसी मतभेद, मलिंगा से छिनी कप्तानी
श्रीलंकाई क्रिकेट टीम में उठापटक का दौर पिछले माह टीम चयन से ठीक पहले तक जारी रहा। अनुभवी पेसर लसिथ मलिंगा को हटाकर दिमुथ करुणारत्ने को 15 सदस्यीय टीम की कप्तानी सौंपी गई, जिन्होंने 2015 में हुए वर्ल्ड कप के बाद से कभी वनडे क्रिकेट नहीं खेला था। हालांकि, इस दौरान वह टेस्ट टीम के कप्तान बने हुए थे। कप्तानी छिनने के बाद लसिथ मलिंगा नाराज थे और वनडे से संन्यास की योजना बना चुके थे। चयन समिति के प्रमुख असांथा डिमेल ने उन्हें किसी तरह मनाया। करुणारत्ने के अलावा जीवन मेंडिस, मिलिंदा सिरिवर्धने, जैफ्री वेंडरसे की टीम में वापसी हुई है। श्रीलंका को वर्ल्ड कप में अपने अभियान की शुरूआत 1 जून को  कार्डिफ के सोफिया गार्डंस ग्राउंड पर न्यूजीलैंड के खिलाफ करना है।

क्रिकेट विश्व कप में खराब आगाज के बाद किया दमदार प्रदर्शन 
क्रिकेट विश्व कप में श्रीलंका का आगाज बेहद खराब रहा और उसने शुरुआती पांच संस्करणों में खेले गए कुल 26 मैचों में से सिर्फ 4 में जीत दर्ज की। वर्ष 1981 में श्रीलंकाई टीम को आईसीसी से पूर्ण सदस्य का दर्जा मिला। वर्ष 1975 में आयोजित हुए क्रिकेट विश्व कप के पहले संस्करण में श्रीलंकाई टीम को ईस्ट अफ्रीका के साथ आमंत्रित सदस्य के तौर पर खेलने का मौका मिला। वर्ष 1979 में विश्व कप के दूसरे संस्करण में श्रीलंकाई टीम ने क्वालिफाइंग टूर्नामेंट खेलकर मुख्य दौर में जगह बनाई। वर्ष 1987 के विश्व कप में श्रीलंकाई टीम 6 में से एक भी मुकाबला नहीं जीत सकी। साल 1996 के विश्व कप में श्रीलंकाई टीम ने अर्जुन रणतुंगा की कप्तानी में अपने खेल इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। डिफेंडिंग चैंपियन की हैसियत से 1999 का विश्व कप खेल रही श्रीलंकाई टीम पहले दौर की बाधा भी पार नहीं कर सकी थी और शुरुआती दौर में हारकर बाहर होना पड़ा।

श्रीलंकाई टीम के कप्तान करुणारत्ने ODI के बहुत बड़े ​खिलाड़ी नहीं
विश्व कप में श्रीलंकाई टीम के कप्तान 30 वर्षीय दिमुथ करुणारत्ने बीते 4 वर्ष में एक बार भी वनडे टीम का हिस्सा नहीं रहे। वर्ल्ड कप के लिए उन्हें कप्तान बनाए जाने पर सभी को हैरानी हुई। करुणारत्ने को करीब 2 माह पहले एक दुर्घटना के बाद नशे में गाड़ी चलाने के आरोप में भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर जुर्माना भी लगाया गया। श्रीलंका के लिए अब तक 17 वनडे मैच खेलने वाले करुणारत्ने ने 15.83 की बेहद खराब औसत से महज 190 रन बनाए हैं।करुणारत्ने को टेस्ट कप्तान के तौर पर अच्छे प्रदर्शन का इनाम मिला। उनकी कप्तानी में श्रीलंका ने इस साल दक्षिण अफ्रीका में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती। श्रीलंकाई टीम ने अपनी पिछली चार क्रिकेट सीरीज अलग कप्तानों की कमान में खेली है।

आईसीसी वनडे विश्व कप 2019 के लिए श्रीलंका की टीम: दिमुथ करुणारत्ने (कप्तान), लसिथ मलिंगा, एंजेलो मैथ्यूज, तिसारा परेरा, कुसाल जनिथ परेरा, धनंजय डिसिल्वा, कुसाल मेंडिस, इसुरू उदाना, मिलिंदा सिरिवर्धने, अविष्का फर्नांडो, जीवन मेंडिस, लाहिरू थिरिमाने, जैफ्री वेंडरसे, नुवान प्रदीप व सुरंगा लकमल।

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