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COVID-19

कोरोना का कहर: गांवों की 94 फीसदी आबादी खतरे में...विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Janta se Rishta
5 Sep 2020 4:35 PM GMT
कोरोना का कहर: गांवों की 94 फीसदी आबादी खतरे में...विशेषज्ञों ने जताई चिंता
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नई दिल्ली। देश के ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस के बढ़ते कहर से चिंताएं बढ़ गई हैं। इन इलाकों में पहले से ही चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में कोरोना की तेज होती रफ्तार चिंता का सबब बनती जा रही है। महामारी के शुरुआत में कोरोना के मामले केवल शहरों तक की सीमित थे। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस महमारी कितनी फैली है, इस बारे में सटीक आंकड़े नहीं हैं। वहीं, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर संक्रमण को रोका नहीं गया तो इसके सामुदायिक स्तर पर फैलने की संभावना बढ़ जाएगी।

भारत की 1.3 अरब आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा गांवों में है। हाऊ इंडिया लिव्स वेबसाइट के मुताबिक देश में 714 जिलों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आये हैं। जिससे 94.76 प्रतिशत आबादी खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों के एक समूह ने इस सप्ताह के प्रारंभ में कहा था कि छोटे शहरों और कस्बों के साथ-साथ गांवों से कोविड-19 के मामले आने बढ़ रहे हैं। सीरो-सर्वे में यह खुलासा हुआ कि यह महामारी देश के ज्यादातर हिस्सों में फैल गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार सामुदायिक स्तर हो रहा है।

इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रीवेंटिव ऐंड सोशल मेडिसीन तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपीडेमियोलॉजिस्ट्स ने भी यह चिंता जताई है कि छह महीने बाद भी लोगों में सामाजिक बदनामी, डर और भेदभाव की भावना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया अर्ध-शहरी क्षेत्रों से अधिक संख्या में संक्रमण के मामले आ रहे हैं।

देश में मात्र 13 दिन के भीतर कोविड-19 के मामले 30 लाख से बढ़कर 40 लाख के आंकड़े को पार गये, जिनमें शनिवार को सामने आये 86,432 नये मामले भी शामिल हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक देश में कोविड-19 के अब तक कुल 40,23,179 मामले सामने आ चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 1,089 मरीजों की मौत हुई है, जिन्हें मिलाकर अबतक देश में कुल 69,561 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। भारत, महामारी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। कोविड-19 के मामलों और इसके मरीजों की मौत के संदर्भ में प्रथम स्थान पर अमेरिका और दूसरे स्थान पर ब्राजील है, जबकि इस सच्चाई से भी आंखें नहीं मूंदी जा सकती हैं कि भारत के गांवों और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े शहरों की तरह अस्पताल एवं प्रयोगशालाओं की सुविधाएं नहीं हैं। विशेषज्ञों ने और अधिक आंकड़ों की जरूरत पर भी जोर दिया है।

अशोका यूनिवर्सिटी के भौतिकी एवं जीवविज्ञान विभाग के प्राध्यापक गौतम मेनन ने ग्रामीण क्षेत्रों पर चर्चा करते हुए कहा कि विस्तृत रूप से तुलना करने के लिये अभी भी पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं लेकिन सुनी-सुनाई रिपोर्टों से यह पता चलता है कि जांच की संख्या सीमित है और पर्याप्त रूप से अच्छी भी नहीं है। चेन्नई के गणित विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक सीताभ्र सिन्हा ने कहा कि अभी, ज्यादातर इलाजरत मरीज महानगरीय इलाकों और उसके आसपास में केंद्रित हैं। उन्होंने आगाह किया कि ओडिशा जैसे राज्यों में अगले कुछ सप्ताह में मामलों के बढ़ने की दर यदि नहीं थमी तो वहां एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। भुवनेश्वर में एक अधिकारी ने कहा कि पूर्वी राज्यों में इस महामारी से अधिक खतरा है क्योंकि वहां 75 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

शहरों की तुलना में गांवों में संक्रमण की दर अधिक होना स्वाभाविक है। अप्रैल के अंत तक संक्रमण मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित था लेकिन प्रवासी श्रमिकों के सूरत, मुंबई और दिल्ली से अपने घर लौटने के बाद यह महामारी ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच गई। पश्चिम बंगाल में भी प्रवासियों के लौटने के साथ कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हुई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि इससे संक्रमण सामुदायिक चरण में पहुंच गया। दक्षिण भारत में तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव डॉ जे राधाकृष्णन ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को क्रिकेट का टेस्ट मैच जैसा बताया। उन्होंने कहा कि हम जितनी तत्परता से जांच करेंगे उतनी अधिक संख्या में मामले सामने आएंगे। राज्य में प्रतिदिन करीब 76,500 आरटी पीसीआर जांच की जा रही।

देश में महामारी से सवार्धिक प्रभावित राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में लॉकडाउन के पांचवें महीने की समाप्ति तक राज्य के ग्रामीण इलाकों में नये मामलों और इस महामारी से होने वाली मौत में वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में 26 अगस्त तक 7,03,823 मामले थे, जिनमें से 5,07,022 (72.03 प्रतिशत) नगर निगम क्षेत्रों (शहरी क्षेत्रों) से थे। इसी तरह, 22,794 मौतें में 76.43 प्रतिशत नगर निगम क्षेत्रों में हुई थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। काफी संख्या में लोगों के गांवों की यात्रा करने के चलते वहां भी संक्रमण फैल रहा है और अब कहीं अधिक संख्या में मौतें हो रही हैं।

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