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चीन के मंसूबे बेहद खतरनाक: गलवान में और गहरी हुई दुश्मनी की घाटी

Janta se Rishta
25 Jun 2020 8:41 AM GMT
चीन के मंसूबे बेहद खतरनाक: गलवान में और गहरी हुई दुश्मनी की घाटी
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चालबाजी की हद: कर्नल शहीद ने उखाड़ा था जो टैंट, चीन ने फिर लगाया

युद्ध पर आमादा है ड्रैगन ?

सैटेलाइट तस्वीरें चौकाने वाली, भारत ने तैनात किए भीष्म टैंक गरज रहे लड़ाकू जेट, डीबीओ में पेट्रोलिंग रोकने की कोशिश

नई दिल्ली। लद्दाख सीमा पर तनाव कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। चीन चलाकी और धोखेबाजी से बाज नहीं आ रहा है। 15 जून की रात कर्नल शहीद संतोष ने गलवान घाटी में जिन टेंटों को उखाड़ फेंका था, चीन ने फिर उसे तैनात कर दिया है। इतना ही नहीं सैटेलाइट तस्वीरों से अब साफ जाहिर हो रहा है कि गलवानघाटी में चीन ने कई सारे निर्माण कार्य कर लिए हैं। जबकि भारत उसे एलएसी का सम्मान करने के लिए कई बार खरीखोटी सुना चुका है। बावजूद इसके चीन के मंसूबे खतरनाक जान पड़ते हैं। लगता यही है कि ड्रैगन युद्ध पर आमादा है। गलवान में दुश्मनी की घाटी और गहरी होती जा रही है। अब तक की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है। चीन के रवैये को देखते हुए भारत ने भी कमर कस ली है। लद्दाख सीमा पर एक ओर लड़ाकू जेट उड़ान पहरेदारी कर रहे हैं वहीं दुनिया के सबसे शक्तिशाली भीष्म टैंक वो भी भारत ने लद्दाख में तैनात कर दिया है। ताजा जानकारी के मुताबिक चीन ने 'डीबीओÓ में भारत को पेट्रोलिंग से रोकने की कोशिश की है। इससे तनाव और बढ़ गया है। गौरतलब है कि आर्मी चीफ नरवणे लद्दाख के दौरे पर हैं।
भारत-चीन में तनाव कम करने के लिए भारत की ओर से बातचीत का क्रम जारी है, वहीं चीन बातचीत के साथ नई चाल चल रहा है। चीन सैन्य और कूटनीतिक वार्ता करने के साथ-साथ पूर्वी लद्दाख में पेंगोंग सो, गलवान घाटी और अन्य टकराव वाले इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा रहा है। एलएसी के पास की कुछ नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आ रही हैं। इसमें एलएसी के दोनों ओर चीनी सेना के बंकर दिख रहे हैं। साथ ही चीनी जवान और उनके कुछ ढांचे दिख रहे हैं यानी उनकी ओर से कुछ निर्माण कार्य भी किया गया है। बॉर्डर पर चीन के इरादे ठीक नहीं लग रहे। 15-16 जून की रात बिहार रेजिमेंट के जवानों ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जिस टेंट को उखाड़ा था, वैसा ही स्ट्रक्चर फिर खड़ा कर दिया गया है। गलवान घाटी में पैट्रोल पॉइंट 14 के पास टेंट जैसा स्ट्रक्चर होने की पुष्टि भारतीय सैनिकों ने की है। सैटेलाइट इमेज में भी वह स्ट्रक्चर खड़ा दिख रहा है। यह साफ तौर पर कॉप्र्स कमांडर-लेवल पर हुई बातचीत में बनी सहमति का उल्लंघन है। माना जा रहा था कि तनाव कम होगा मगर चीन के इस कदम से उसके और बढऩे की संभावना है। दोनों सेनाएं झड़प के बाद पैट्रोल पॉइंट 14 से पीछे हट गई थीं। शहीद कर्नल संतोष बाबू ने चीनी टेंट उखाड़ फेंका था। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत पर सहमति बनी। इसी दौरान, एक नए टेंट का कंस्ट्रक्शन शुरू हो गया। सूत्रों ने सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से कन्फर्म किया कि पैट्रोल पॉइंट 14 पर चीन की तरफ जबर्दस्त कंस्ट्रक्शन ऐक्टिविटी हो रही है। चीन अपने सैनिकों के लिए नए डिफेंसेज और शेल्टर तैयार कर रहा है। गलवान घाटी में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। ताजा सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि क्करु्र डिफेंस तैयार करती रही है। झड़प के बाद से चीन ने रोड बनाने का काम और तेज कर दिया है। ऐसा लगता है कि वह क्कक्क14 के पास सैनिकों को टिकाने के लिए स्ट्रक्चर बना रही है। पहले इस इलाके में केवल पैट्रोलिंग होती थी। गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो के अलावा टेंशन देने वाली दो और जगहें हैं- दौलत बेग ओल्डी के नजदीक डेपसांग प्लेन्स और गोगरा पोस्ट। डेपसांग में चीन ने रु्रष्ट के पास हथियारबंद फॉर्मेशन तैयार किया है। जुबान से चीन दोस्ती की बात करता है और दूसरी ओर जमीन पर जंग की तैयारी कर रहा है।
वहीं गोगरा के पास 2 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिक तैनात हैं। डेपसांग में चीनी अपनी क्लेम लाइन तक मूव कर सकते हैं जो रु्रष्ट के 15-20 किलोमीटर भारत की तरफ है। गलवान और पैंगोंग त्?सो में चीन ने अपनी क्?लेम लाइन तक मूवमेंट की है।

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