छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: कांग्रेस-भाजपा में लगी है होड़...कौन बनेगा मुकद्दर का सिकंदर

Janta se Rishta
4 Sep 2020 5:51 AM GMT
छत्तीसगढ़: कांग्रेस-भाजपा में लगी है होड़...कौन बनेगा मुकद्दर का सिकंदर
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सियासी सर्कस में जानदार करतब दिखाने वाले की तलाश…

जा़किर घुरसेना/कैलाश यादव

रायपुर। पिछले सप्ताह कई राज्यों में भादो की झड़ी लगी हुई थी, आमतौर में झड़ी सावन के महीने में लगती है,पर वैसे आजकल हर चीज बेमौसम होने लगा है। बहरहाल मौसम बेमौसम मुद्दा नहीं है अभी मुद्दा है झड़ी का और वह भी भादो की झड़ी का जिससे पूरे देश के लोग परेशान हुए। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस में भी आरोपों और विवादों की झड़ी लगी हुई है, कांग्रेसी परेशान है, चिठ्ठीकांड के बाद आरोप प्रत्यारोप की झड़ी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। कांग्रेस में सौ सोनार की एक लोहार की वाली स्थिति निर्मित हो गई हैं। वैसे भी बड़े नेता आलाकमान को ऐसा लेटर लिखते रहते हैं। यह रूटीन प्रक्रिया है, लेटर ईद के समय लिखा गया था, जब सारे नेता गुलाम नबी आजाद के घर मिले थे। सोनिया गांधी की तबीयत खराब होने की वजह से लेटर का जवाब नहीं दिया। रिमाइंडर के तौर पर लेटर को पुन: भेजा गया, किसी मुंह लगे नेता ने लेटर को मीडिया में लीक कर दिया। और यहीं रायता फैल गया। जी-23 का लेटर बम फुस हो गया। लेटर बम फोडऩे वालों के खिलाफ पार्टी ने कार्रवाही शुरू कर दी, पिछले दिनों संसद की नई नियुक्तियों में उनको तवज्जो नहीं दिया गया उनके पर कतर दिए गए। इसके पहले भी कांग्रेस पार्टी में ऐसी स्थिति निर्मित हुई थी, लेकिन उस वक्त सोनिया गांधी ने भूलो और माफ करो के सिद्धांत का पालन कर आगे बढ़ गई। लेकिन इस बार ऐसा लगता है कि आघात गहरा हुआ है। बहरहाल भादो की झड़ी तो रूक गई है, परन्तु कांग्रेस में आरोप प्रत्यारोप और विवाद की झड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही है।

भाजपा व अन्य सियासी पार्टियों में भी कमोबेश यही स्थिति

भाजपा एवं अन्य सियासी पार्टियों में भी कामोबेश स्थिति है, जब राजनाथ सिंह का कार्यकाल समाप्त हुआ, तो मोदी के करीबी अमित शाह को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया और वर्तमान अध्यक्ष जे पी नड्डा भी थोप दिए गए। भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी, बलराज मधोक, गोविंदाचार्य, शत्रुधन सिंहा, यशवंत सिंहा, मुरली मनोहर जोशी और अनेक कद्दावर नेताओं को कैसे किनारे किया गया और कई को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया और वे बिना दांत-नाखून के शेर बन गए । गुजरात में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ आवाज उठाने वालों की भी सफाई कर दी गई। भाजपा में भी कांग्रेस वाली स्थिति देखने को मिल रही है, नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने की हिम्मत किसी में नहीं, अगर किसी ने हिमाकत की तो सीधे सात समुन्दर पार। यही स्थिति क्षेत्रीय पार्टियों में भी है, आप में अरविन्द केजरीवाल, एसपी में मुलायम, अखिलेश, तलुगूदेशम,द्रमुक, अन्नाद्रमुक, झामुमो या अन्य क्षेत्रीय पार्टी जहां देखो वन मेन आर्मी है, इन्ही की तूती बोलती है। पार्टी में इनके खिलाफ मुंह खोलना यानी मुसीबत को दावत देना है।

सच्चिदानंद बम डिफयूज, सुंदरानी बना गया कैरम क्वीन

कांग्रेस में लेटर बम फुसकी निकल गया। ठीक उसी तरफ बीजेपी में सच्चिदानंद बम डिफयूज हो गया और पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के करीबी पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी को आखिरकार शहर जिला भाजपा अध्यक्ष बनाने ही अंतरकहल खुलकर सामने आ गया है। कार्यकर्ताओं के इस्तीफा का रेला शुरू हो गया है। भाजपा कार्यकर्ता सुंदरानी के साथ कैरम की क्वीन की तरह व्यवहार कर रहे है। हर मंडल वार्ड में विरोध के स्वर मुखर हो रहे है। अब क्या करे सुंदरानी, मोर छइया भूइया का कैसेट बजाए या कार्यकर्ताओं को टूरा भाजपा वाला बनाए। हालांकि इस पद की रेस में कई नेता शामिल थे, लेकिन बाजी भाई श्रीचंद सुंदरानी ने मार ली, वैसे भी श्रीचंद सुंदरानी की गिनती जलेबी की तरह सीधे-साधे नेताओं में होती है लोग खुसुर-फुसुर कर रहे है कि आखिर ये बम फुस्स कैसे हो गया, चाय की टपरी में लोग इसी बात पर ही चर्चा में मशगूल है। वैसे इस मसले पर बोलना ठीक नहीं है, नतीजा सबके सामने है। कुछ दूसरे खेमे के बड़े नेता विरोध की हवा को ताकत दे रहे जिसके कारण बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा हैं।

बम तो छत्तीसगढ़ में भी नहीं फूट रहा हैं

जब बम की बात हो ही रही हो तो, छत्तीसगढ़ को कैसे भुलाया जा सकता हैं। निगम मंडल में नियुक्ति वाला बम भी फिलहाल फुस हो गया हैं। 15 अगस्त तक सूची जारी हो जाना चाहिए था, लेकिन आज तक कुछ हुआ ही नहीं। दावेदार नेताओं की धड़कन बढ़ी हुई हैं और सूची बम फूटने का इंतजार कर रहे हैं।

सब टीआरपी का सवाल है बाबू

हमारे देश में भावनाओं की काफी कद्र होती है और आमतौर पर लोगों की भावना जो किसी मामले में पीडि़त पक्ष है, उसके साथ होती है। लोगों का मानना है कि रिया और उसका परिवार ही सुशांत मामले में दोषी है। पत्रकारों की मंडी भी टीआरपी के ताने-बाने में फंसी हुई नजर आती है। एक मीडिया सुशांत के साथ है, तो दूसरा रिया के साथ खड़ा नजर आता है। पत्रकार साथी इस मामले में नैतिकता की दुहाई देते नहीं थकते, लेकिन जब टीआरपी की बात होती है तो नैतिकता का गला घोंट देते हैं। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि ये सब टीआरपी का सवाल है बाबू।

सुशांत के बहाने बिहार पर नजर

सुशांत केस में ईडी, सीबीआई और एनसीबी के बाद जांच के लिए एनआईए भी शामिल हो सकती है, ऐसा भाजपा का कहना था, इस बात को लेकर खुसुर फुसुर हो रही है कि बाबू आईएसआई और एफबीआई और मोसाद को भी बुला लो, बिहार चुनाव में इनके पास मुद्दा ही नहीं है, सुशांत के बहाने बिहार पर नजर है

बाबू…

कांग्रेसी हमलो की बारिश

देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है और इस बीच के इलाकों से चौकाने वाली खबरे आ रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना कल में 60 करोड़ का हवाई जहाज खरीद कर सबको चौका दिया है, कांग्रेसी भी चौंक गए हैं। हमले तेज कर दिए हैं और कह रहे हैं कि जनता के पैसे की बेकदरी की इससे अच्छी मिसाल क्या हो सकती है। सरकार के पास किसानों की कर्ज माफी, कर्मचारियों के भत्ते और वेतन के लिए पैसे नहीं है और सरकार जहाज खरीद रही है। कांग्रेसी हमलों की बारिश कर दिए हैं।

हमला तो इधर भी हो रहा है

कोरोना काल में सब का बुरा हाल है, जिधर देखो बुरी खबर आ रही है विगत दिनों जांजगीर जिले के एक गांव में कोरोना पॉजिटिव को पकडऩे गई पुलिस पार्टी और स्वास्थ्य अमले को गांव वाले मिलकर दौड़ा दिए, जान बचाकर उलटे पांव भागना ही सबने मुनासिब समझा। ऐसा ही वाकया तेलंगाना के खम्माम जिले में देखने मिला, फर्क सिर्फ इतना था कि यहां सरकारी अमले पर हमला हुआ और वहां कोरोना पीडि़त परिवार पर। गांव वाले कोरोना पॉजिटिव परिवार के लोगों पर हमला कर दिए, इसमें 9 लोग घायल हुए। गांव वालों का कहना था कि इनके कारण पूरे गांव वाले कोरोना की चपेट में आ जायेंगे।

हम करे तो खता, तुम करो तो अदा

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा संसदीय सचिवों की नियुक्ति की गई थी, जिसे लेकर कांग्रेसी कोर्ट तक पहुंच गए थे। लेकिन अब सत्ता कांग्रेस के पास है और उन्होंने भी संसदीय सचिवों की नियुक्ति कर दी, ऐसे में भाजपा सदस्यों ने बहुत बवाल मचाया और कहने लगे कि हम करे तो खता, तुम करो तो अदा। यहीं तो कांग्रेस की अदाकारी है प्यारे…।

अब रोका-छेका का टाइम यहां भी आ गया

अजित जोगी के देहांत के बाद मरवाही सीट के लिए उपचुनाव होना है, सभी दलों ने रोका-छेका की तैयारी कर ली है। उपचुनाव में जीत के लिए रोका-छेका भी जरुरी है, कांग्रेस से राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, भाजपा से पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, भूपेंद्र सिंह सवन्नी और जोगी कांग्रेस से धर्मजीत सिंह रोका-छेका करने में लग गए है। अब वक्त बताएगा किसका रोका-छेका तगड़ा है। जिस हिसाब से कांग्रेस में प्रवेश हो रहा है उससे लगता है राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का रोका-छेका तगड़ा दिख रहा है।

जिसका डर था वही हुआ

विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होकर समाप्त भी हो गया। माननीयों ने बिना कोरोना टेस्ट के विधानसभा की कार्यवाही में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, बहुत सारे काम भी हुए। इन सभी माननीयों का कोरोना टेस्ट होना था लेकिन नहीं हुआ। अब पता ये चला कि कई माननीय कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जो भी इनके संपर्क में आये है, उन सभी लोगों को क्वारेन्टाइन होना पड़ा। जिसका डर था वही हो गया।

हश्र दाभोलकर जैसा न हो

सुशांत केस सीबीआई को सौंपे जाने पर राकांपा नेता शरद पवार का बयान आया था कि सुशांत केस का हश्र दाभोलकर जैसा न हो जाये। ठीक उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी पूर्व डीएमई डॉ आदिले को पुलिस भ्रष्टाचार और रेप के मामले में ढूंढ रही है, डॉ आदिले जमानत अर्जी लगाकर रफूचक्कर हो गए है। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि डॉ आदिले केस कहीं आबकारी विभाग के पूर्व ओएसडी समुद्र सिंह जैसा न हो जाये, आज तक समुद्र सिंह पकड़ में नहीं आये है। जमीन खा गई या आसमान निगल गया, पुलिस हवा में हाथ पैर मार रही है।

हाथ पैर मारने में क्या जाता है

एमएमआई हॉस्पिटल प्रबंधन की कमान संस्थापक सदस्यों के हाथों आने के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसा लगता है जैसे एम एम आई और विवादों का पुराना याराना रहा हो। संस्थापक सदस्यों ने आरोप लगाया है कि पूर्व चैयरमेन सुरेश गोयल बाउंसरों के माध्यम से धमका रहे है। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि हाथ पैर मारने में क्या जाता है, अगर फिर से पावर मिल जाये तो…।

नाकामी किसकी जनता करे फैसला…

भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक बृजमोहन अग्रवाल का बयान आया है कि भूपेश सरकार की नाकामी के चलते प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है। जनता में खुसुर-फुसुर हो रही है कि अगर प्रदेश में कोरोना बढऩे का जिम्मेदार भूपेश बघेल है तो देश में कोरोना बढऩे का जिम्मेदार नरेन्द्र मोदी है क्या? किसे सच माने और किसे झूठ माने। इस समय तो हम ही पेरा रहे है।

डिबेट पर भी ड्रग का असर

सुशांत मामले को लोग किस एंगल से देख रहे है, कोई बिहार चुनाव से जोड़कर देख रहा है, कोई टीआरपी के एंगल से देख रहा, तो कुछ ऐसे भी टीवी चैनल वाले है, जो इसको ड्रग एंगल से भी देख रहे है और कह रहे है कि इस केस में ड्रग माफिया भी घुसा है। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि टीवी डिबेट में एंकरो की हरकत ऐसी रहती है जैसे ये लोग ही गांजा भांग पीकर डिबेट कर रहे है।

करे कोई भरे कोई

आज कल गाडिय़ां दो पहिया हो या चार पहिया बीएस 05 और बीएस 06 इंजन आ रही है, जो सही में देखा जाये तो प्रदूषण फ्री गाड़ी है तो फिर प्रदूषण सर्टिफिकेट किस बात पर लिया जा रहा है । इसका मतलब है कि पेट्रोल या डीजल में मिलावट है। ऐसी स्थिति में आम जनता को दण्डित करने के बजाये गाड़ी बनाने वाली कंपनी को और उस पेट्रोल पम्प मालिक को दोषी ठहराया जाये, जहां से पेट्रोल डलवाया गया है। ये तो ऐसा हो गया, करे कोई और भरे कोई।

अंत में…

  • सरकार का कहना है कि दो से ज्यादा बच्चे वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जनता में खुसुर-फुसुर हो रही है कि ऐसे में बिना औलाद वालों को भी चुनाव लडऩे से रोकना चाहिए क्योंकि वे जनता का दर्द नहीं समझते।
  • कांग्रेसियों का दर्द अब छलकने लगा है। प्रदेश प्रभारी पुनिया के चक्कर में पेराने का आरोप लगा रहे है। उनका कहना है कि जब सीएम को सब कुछ करना है तो पुनिया क्यों अडंगा लगा रहा है।
  • सरकार के आइसोलेट होने का सुख अब प्रोटोकाल वाले अफसर उठा रहे है। रोज-रोज के दौरे और उद्घाटन, शिलान्यास से चार दिनों तक टंटा छूट गया है।

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