छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: कांग्रेस से आत्मा से जुड़े कांग्रेसियों ने खून से लिखी चिट्ठी, बयां किए दर्द...पुनिया की दादागिरी रोको…

Janta se Rishta
26 Aug 2020 6:30 AM GMT
छत्तीसगढ़: कांग्रेस से आत्मा से जुड़े कांग्रेसियों ने खून से लिखी चिट्ठी, बयां किए दर्द...पुनिया की दादागिरी रोको…
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कांग्रेसजनों की गुहार, पुनिया की दादागिरी रोको…

नए नवेले झांकीबाज नेताओं के खिलाफ पुराने नेताओं ने चलाया अभियान

कैलाश यादव
रायपुर। राजस्थान जैसे उठापटक वाले राज्य में जब प्रदेश प्रभारी बदला जा सकता है तो छत्तीसगढ़ में हाईकमान ऐसा प्रयोग क्यों नहीं कर सकती है। पुराने कांग्रेसियों ने फिर से कांग्रेस से कचरा साफ करने का अभियान शुरू कर दिया है। निष्ठावान को ही कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले आयाराम -गया को कभी भी बड़े और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं देनी चाहिए नहीं तो वे इतराने लगते है। जैसे इस समय छत्तीसगढ़ में पुनिया ने पुराने आृौर वरिष्ठ कांग्रेसियों को छोड़कर नए नवेले नेताओंं को जोड़कर एक सर्कस बना लिया है। जिसके पुराने कांग्रेसियों की प्रतिष्ठा नए नवेलों के सामने फिकी हो गई है। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया की दादागिरी से त्रस्त पुराने वरिष्ठ कार्यकर्तागणों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को खून से लिखी चिी भेजकर अपना दर्द बयां किया है। वरिष्ठ पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का दुख इस चिी के एक-एक शब्द में उबर कर सामने आ रहा है, देखने को मिला है। पुराने कांग्रेसी नेताओं ने सभी नए आए हुए पार्टी के कार्यकर्ताओं नेताओं का कच्चा चिट्ठा कि ये कैसे और कब से कांग्रेस में किस मकसद से जुड़े है।

भूपेश बघेल ने सभी मिथक को तोड़ते हुए संघर्ष और जीवटता का ऐसी पटकथा लिखी जिसमें सिर्फ संघर्ष करने वालों को आगे लाकर उनके साथ भाजपा को खदेडऩे के लिए ऐसा मुहिम चलाया कि भाजपा वाले भूपेश बघेल के नाम से थरथर कांपने लगे। कांग्रेस पार्टी के संघर्ष के दिनों की जीवटता और कुछ कर गुजरने की जज्बा के बल पर छत्तीसगढ़ के हर कोने में दौरा कर कांग्रेस पार्टी को जिंदा किया और 15 साल के बाद कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाने में कामयाब रहे। लेकिन वर्तमान प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया की लगातार बढ़ती राजनीतिक दखलंदाजी के कारण और नए नवेले कांग्रसियों को तवज्जों देने के कारण दो साल से सुर्खियों में है, जिसकी शिकायतें लगातार हाईकमान तक पहुंचता रहा है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से सोनिया गांधी को लिखा है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया का कुछ भी योगदान नहीं है । जबरन वह राज्य की राजनीतिक मामले में दखल देकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नीचा दिखाकर अपना वर्चस्व बनाने का प्रयास करते रहते हैं । वर्तमान में जो बचे हुए निगम मंडल है, उसके लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बकायदा सोनिया गांधी को लंबी नामों की लिस्ट सौंपी है, पुराने और कर्मठ कांग्रेस विचारधारा के परिवार से जुड़े हुए नेताओं का कहना है कि सभी चीज कांग्रेस पार्टी में चुनाव की टिकट हो या पदाधिकारी बनाने की बात हो या निगम मंडल में पदाधिकारी बनाने की बात हो या कहीं पर सदस्य बनाने की बात हो तो चाटुकार और चापलूस और नए नवेले नेताओं को पीएल पुनिया ज्यादा तवज्जो देने का प्रयास करते हैं । पीएल पुनिया अक्सर राज्य की राजनीति में दखल देने के लिए अपना वर्चस्व बनाएं रखने के लिए बार-बार छत्तीसगढ़ का दौरा करते हैं। जिससे हाई कमान को लगे कि पुनिया के बिना छत्तीसगढ़ में काम नहीं हो सकता है। वर्तमान में जिन नामों से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और कांग्रेसी विचारधारा वाले नेताओं का कहना है कि एक ही परिवार को विधानसभा की टिकट भी जाएंगी। पंकज शर्मा जिसको जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का अध्यक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है । राजनीतिक जानकारों का ऐसा मानना है कि इन सभी नामों के लिए अलग से ईमेल कर हाईकमान को निष्ठावान और कांग्रेसी विचारधारा वाले नेताओं ने जमकर शिकायत की है।

छत्तीसगढ़ से विगत 10 से 12 दिनों में आम कांग्रेसजनों की उपेक्षा की शिकायतें और जयचंदों से जुड़े भारतीय जनता पार्टी से मिले हुए नेताओं की सूची और शिकायतों का पुलिंदा वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास पहुंचा दिया है । ऐसा सूत्र बताते हैं कि सोनिया गांधी ने सब को व्यक्तिगत मिलने हेतु अलग-अलग टाइम दिया भी है और आने वाले समय में बहुत सारे पदाधिकारियों का बदलाव होगा, तब पीएल पुनिया को भी छत्तीसगढ़ से चलता किया जाएगा। हाईकमान ने मिली शिकायतों की छानबीन शुरू कर भौतिक सत्यापन के लिए कांग्रेसियों का जत्था छत्तीसगढ़ गोपनीय रूप से आएगा और रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंपेगा।

हाई कमान को पीड़ा से कराया अवगत

सोनिया गांधी के अवगत कराया है। कांग्रेस में 2004 और 2009 तक और उसके बाद आए हुए सभी कांग्रेसी नेता या पहले किसी ना किसी संगठन से जुड़े हुए थे, या किसी और पार्टी के संपर्क में थे। कांग्रेस में ज्वाइनिंग के बाद इन नेताओं में कांग्रेसी सदभावना और विचारधारा एक रत्ती भर नहीं है। कांग्रेस की विचारधारा और कांग्रेस की फिलॉसफी बिल्कुल भी वाकिफ नहीं है और न वाकिफ होना चाहते है। जो कांग्रेस में दिल से नहीं स्वार्थवश जुड़कर शॉर्टकट और चापलूसी को हाजिर -नाजिर बनाकर वरिष्ठ और पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ता को इतना पीछे खदेड़ दिया है कि वे चाह कर भी अब फ्रंट लाइन में नहीं आ सकते। वे कांग्रेसी समुद्र के किनारे लहर गिनते नजर आ रहे है। नए और झांकी मंडप वाले नेताओं का इतिहास-भूगोल देखेंगे तो कहीं ना कहीं कम्युनिस्ट, भाजपा जैसे संगठन या आरएसएस की पृष्ठ भूमि वाले है जो स्वार्थ सिद्धि के लिए जुड़कर कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे है और हमेशा पार्टी की पीठ में छुरा भोंके है। इसी का परिणाम है कि 2003 से 2018 तक विगत 15 सालों में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई थी।

एक परिवार को ही सारे पद तो आम कार्यकर्ता क्या करेंगे

एक ही परिवार को लोकसभा की टिकट दी जाएगी और एक ही परिवार को निगम मंडल और हर जगह डायरेक्टर और सदस्य के रूप में समाहित किया जाएगा, तो आम कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी का कहा जाएगा । सबसे ज्यादा विरोध कांग्रेस पार्टी में रायपुर के नेताओं का कर रहे हैं । सर्वप्रथम प्रवीण साहू जिसको पीएल पुनिया पर्यावरण मंडल का अध्यक्ष बनाने में लगे हैं। भवानी शंकर शुक्ला जिसको युवा आयोग में बनाने का प्रयास किया जा रहा है ।

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