छग हाउसिंग बोर्ड: आरटीआई आवेदन कमियां बताकर लौटा रहे, नहीं दे रहे जवाब |जनता से रिश्ता

हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को जानकारी देने से गुरेज..

जसेरि रिपोर्टर। रायपुर। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड में अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही का नित नए प्रकरण सामने आ रहे हैं बावजूद बोर्ड प्रशासन और सरकार इन्हें लगातार प्रश्रय और बढ़ावा दे रहे हैं। इससे न सिर्फ यह पता चलता है कि बोर्ड के अधिकारियों के भ्रष्टाचार को सरकार और प्रशासन का परोक्ष समर्थन है जिनसे इनके हौसले बुलंद हैं। बोर्ड के अधिकारियों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां जनसूचना अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे एक डिप्टी कमिश्नर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से संबंधित आवेदन भी लेने से इंकार कर देता है और कहासुनी के बाद कमिश्नर को हस्तक्षेप करना पड़ता है तब जाकर कहीं वह आवेदन लेता है। जनता से रिश्ता पिछले कई अंकों से लगातार बोर्ड में हुए घपलों-घोटालों और जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होने के मामलों को लगातार सामने ला रहा है इससे बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों में हलचल मची हुई है।

आरटीआई में तालपुरी प्रोजेक्ट की मांगी गई जानकारी…

हाउसिंग बोर्ड से सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत भिलाई-दुर्ग के तालपुरी इंटरनेशनल प्रोजेक्ट में हुए लगभग 100 करोड़ के घोटाले जिस पर सीएजी ने भी आपत्ति जताया है और इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताया है, के संबंध में प्रोजेक्ट की प्रांक्लन व तमाम वाउचर सहित प्लानिंग अधिकारी और माप-पुस्तिका की मांग की गई थी। जिसे पहले तो जनसूचना अधिकारी एसके भगत ने आवेदन शुल्क कम होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया था लेकिन जब आवेदक द्वारा इस कमी को पूरा करते हुए पुन: पूरे शुल्क के साथ आवेदन जमा किया गया तो उक्त अधिकारी ने आवेदन संबंधित संभाग कार्यालय में लगाने की बात कहते हुए लेने से ही इंकार कर दिया। काफी बहस के बाद आखिर कार कमिश्नर भीमसिंह को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और अधिकारी को आवेदन लेने निर्देशित करना पड़ा तब कहीं जाकर उक्त अधिकारी ने आवेदन लिया। लगातार बोर्ड की अनियमितताएं उजागर होने से बोर्ड के सूचना अधिकारी भी अब किसी तरह की जानकारी देने में न सिर्फ कोताही बरत रहे हैं बल्कि आवेदन लेने से भी मना करने लगे हैं।

जानकारी देने में कर रहे आना-कानी

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों से संबंधित आवेदनों को बोर्ड के अधिकारी कोई-न-कोई कमी बताकर या आपत्ति लगाकर जानकारी देने से बच रहे हैं। ऐसी ही जानकारी डूमरतराई प्रोजेक्ट में हुई अनिमितताओं को लेकर योजना के स्वीकृत प्रोजेक्ट का ग्राम तथा नगर निवेश से अनुमोदित ले-आउट प्लान सहित व माप पुस्तिका मांगी गई थी जिस पर जनसूचना अधिकारी ने इसे फेस-1 और फेस-2 में उलझाते हुए अलग-अलग बिन्दुओं पर जानकारी के लिए अलग-अलग आवेदन देने की बात कहते हुए जवाबी पत्र दिया है।

सूचना अधिकारी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप

बोर्ड मुख्यालय में पदस्थ जनसूचना अधिकारी एसके भगत पर भी गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। लेकिन भाजपा सरकार के दौरान जांच में लीपापोती के चलते उन्हें रिस्टेट कर दिया गया। एसके भगत जब राजनांदगांव में ईई के पद पर कार्यरत थे तब अटल आवास योजना में भारी अनियमितता सामने आई थी और उन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड भी कर दिया गया था। इस अनियमितता की विभागीय जांच कराई गई थी जिसमें दोषी पाए गए थे और बर्खास्त भी किया गया था लेकिन भगत ने मामले में आगे की जांच में जांच कर रहे अधिकारियों पर भी अनियमितता में शामिल बताया जिससे जांच कर रहे अधिकारियों ने लीपा-पोती कर मामले को दबा दिया। यानि एक चोर ने दूसरे चोर को बचाने का काम किया। इतना ही नहीं तत्कालिन सरकार और भाजपा नेताओं के दबाव में लीपापोती कर उन्हें रिस्टेट कर दिया गया। वर्तमान में वे पदोन्नत होकर डिप्टी कमिश्नर के पद पर पदस्थ है और मुख्य जनसूचना अधिकारी की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। चर्चा है कि उन्होंने दुर्ग में एक आलीशान बंगला बनाने के साथ कई शहरों में संपत्तियां बना रखी हैं, जो जांच का विषय हो सकता है।

कमिश्नर घपलों की जांच के पक्ष में…

कमिश्नर भीमसिंह बोर्ड में व्याप्त अव्यवस्था को दुरुस्त करने प्रयासरत हैं, वे पूर्व में अधिकारियों द्वारा किए गए घपलों-घोटालों की जांच के भी पक्ष में हैं ताकि बोर्ड को हुए नुकसान और घाटों की भरपाई हो सके। इसके लिए वे लगातार अधिकारियों, कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों से लगातार चर्चा कर बोर्ड की आय बढ़ाने और माली हालत को दुरुस्त करने के लिए कदम उठा रहे हैं। हालहि में उन्होंने बरसों से एक ही स्थान पर जमें कुछ अधिकारियों के कार्यप्रभार में फेरबदल किए हैं। कर्मचारियों की मांगों पर भी वे नियमों के अनुसार कार्यवाही करने के लिए लगातार निर्णय ले रहे हैं। कमिश्नर के प्रयासों से बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारियों पर भी अंकुश लगने की संभावना जताई जा रही है।

हाउसिंग बोर्ड कर्मचारी संघ की मांग, प्लेसमेंट समाप्त करें, आयुक्त से भेंटकर सौंपा ज्ञापन

छत्तीगढ़ गृह निर्माण मंडल अनियमित कर्मचारी संघ ने आयुक्त भीमसिंग से मुलाकात कर प्लेसमेंट एजेंसी की मध्यस्थता समाप्त कर कर्मचारियों के खाते में वेतन सीधे भुगतान करने की मांग की। आयुक्त ने सौंपे ज्ञापन के संबंध में कर्मचारी संघ से चर्चा की। संंघ ने बताया कि मंडल प्रशासन कर्मचारियों को सीधे वेतन भुगतान करता है तो औसतन 10 प्रतिशत सेवा शुल्क एवं 18 प्रतिशत की दर से भुगतान होने वाली जीएसटी की राशि का मंडल को लाभ होगा। जो मंडल की आर्थिक स्थिति के अनुकूल है। संघ ने आयुक्त का ध्यान आकर्षित करते हुए वर्तमान छत्तीसगढ़ शासन एवं कांग्रेस सरकार के घोषणा पत्र की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। अध्यक्ष गृह निर्माण मंडल व्दारा मंडल प्रशासन की पूर्व बैठक में मंडल में कार्यरत समस्त अनियमित कर्मचारियों को उनका वेतन सीधा मंडल के माध्यम से किए जाने संबंधी निर्देश से भी अवगत कराया गया। आयुक्त को संघ व्दारा की जा रही मांग के संबंध में शासन व्दारा संचालित संस्था जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन में लागू नियम आदेश क्रमांक 3304 /29 सितंबर से भी अवगत कराया गया जिस पर आयुक्त ने प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड मीटिंग में प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि ”जनता से रिश्ता” ने बोर्ड के अधिकारियों द्वारा प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से अनियमितता कर्मचारियों को प्रताडि़त करने और अनियमितता के आरोप मढऩे को लेकर खबर प्रकाशित की थी।