पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 28 वीं पुण्यतिथि, दिल्ली में वीरभूमि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम

 जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- नई दिल्‍ली: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज 28वीं पुण्‍यतिथि है. 21 मई, 1991 के दिन आत्‍मघाती बम धमाके में राजीव की हत्‍या कर दी गई थी. दिल्‍ली के राजघाट स्थित उनके समाधि-स्‍थल ‘वीर भूमि’ पर श्रद्धांजलि देने कांग्रेस के दिग्‍गज नेता पहुंच रहे हैं. पत्‍नी सोनिया गांधी, बेटे राहुल गांधी, बेटी प्रियंका गांधी ने परिवार समेत यहां आकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए.

वो 21 मई 1991 का दिन था, जब देश ने राजीव गांधी को वक्त से पहले खो दिया था. श्रीपेंरबदूर में एक धमाके में राजीव गांधी की मौत हो गई थी, ये तो आप सब जानते हैं मगर हम आपको बताएंगे कि आखिर राजीव गांधी की हत्या की इस सबसे बड़ी साज़िश को कब, कैसे, कहां और किसने अंजाम दिया था. कौन थे वो लोग, जो देश के लोकप्रिय नेता राजीव गांधी की जान के दुश्मन बन गए थे.

जाफना में रची गई थी कत्ल की साजिश

इस खौफनाक साजिश की शुरूआत जाफना, श्रीलंका से होती है. नवंबर 1990 का दौर था. घने जंगलों के बीच एक एक खुफिया ठिकाने में मौजूद था लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) का लीडर प्रभाकरण. उसके साथ वहां उसके 4 साथी भी मौजूद थे. बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरूगन और शिवरासन. एक बड़ी साजिश बन रही थी. घंटों तनाव के बीच चली बैठक. हर आदमी अपना पक्ष रख रहा था. बेहद गोपनीय इस बैठक में तनाव इतना था कि हवा भी बम की आवाज की तरह लग रही थी. उमस और गर्मी के बीच प्रभाकरण बहुत तेजी से सुन और बुन रहा था. आखिर साजिश पूरी हो गई. प्रभाकरण ने राजीव गांधी की मौत के प्लान पर मुहर लगा दी. प्लान को पूरा करने की जिम्मेदारी चार लोगों को सौंपी गई.

बेबी सुब्रह्मण्यम- लिट्टे आइडियोलॉग, हमलावरों के लिए ठिकाने का जुगाड़ इसने किया था.

मुथुराजा- प्रभाकरण का खास, हमलावरों के लिए संचार और पैसे की जिम्मेदारी इस पर थी.

मुरुगन- विस्फोटक विशेषज्ञ, आतंक गुरू, हमले के लिए जरूरी चीजों और पैसे का इंतजाम किया.

शिवरासन- लिट्टे का जासूस, विस्फोटक विशेषज्ञ, राजीव गांधी की हत्या की पूरी जिम्मेदारी इसी पर थी.