Birthday Special : भारतीय गेंदबाज देबाशीष मोहंती जिससे सईद अनवर घबराते थे…

जनता से रिश्ता वेबडेस्क: भारत में ऐसे कई क्रिकेटर हैं, जो बेहद प्रतिभाशाली होते हुए भी वो मुकाम हासिल नहीं कर सके, जिसके वे हकदार थे. देबाशीष मोहंती भी इनमें शामिल हैं. 20 जुलाई 1976 को जन्मा यह गेंदबाज अपने जमाने का स्विंग का सुल्तान था. देबो की स्विंग गेंदबाजी कितनी खतरनाक थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के दिग्गज सईद अनवर उनसे घबराते थे. अनवर, मोहंती की गेंदें खेलने से बचना चाहते थे. हालांकि, ओपनर होने के कारण वे ऐसा चाहकर भी नहीं कर पाते थे. वहीं देबो आज (20 जुलाई) 44वां जन्मदिन मना रहे हैं.

देबाशीष मोहंती भारतीय क्रिकेट में तब एंट्री करते हैं, जब जवागल श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद की जोड़ी टीम में जगह बना चुकी थी. वे भारत के लिए 1997 में टोरंटो में पहला वनडे मैच खेलते हैं. यह छह मैचों की वनडे सीरीज थी, जो भारत और पाकिस्तान के बीच कनाडा में खेली गई थी. श्रीनाथ और वेंकटेश चोट के कारण टीम से बाहर थे और भारतीय गेंदबाजी की कमान दुबले-पतले और लंबे कद के गेंदबाज देबाशीष मोहंती पर आ गई. मोहंती इस उम्मीद पर खरे उतरे और भारत ने यह सीरीज 4-1 से जीती. एक मैच रद्द हो गया था.

देबाशीष ने टोरंटो में खेली गई इस सीरीज में पाकिस्तानी ओपनर सईद अनवर को तीन बार आउट किया था. अनवर, जो उन दिनों विश्व क्रिकेट में अपना नाम बना चुके थे, उन्हें मोहंती की गेंदें समझ नहीं आती थीं. उस सीरीज में भारत के कप्तान रहे सचिन तेंदुलकर ने एक बार मोहंती और अनवर का किस्सा साझा किया था. उन्होंने बताया, ‘शुरुआती चार मैच में देबो (देबाशीष) ने अनवर को बहुत परेशान किया था और आउट भी किया था. चार मैच के बाद एक कार्यक्रम था. वहां पर दोनों टीमों के खिलाड़ी थे. तभी सईद अनवर मेरे पास आया. उसने पूछा- वो सब तो ठीक है. ये बताओ कि देबाशीष करता है क्या है. मैंने पूछा कि क्या हो गया. इस पर अनवर बोला कि उसकी स्विंग समझ ही नहीं आती. जब मैं गेंद छोड़ता हूं तो वह अंदर आ जाती है. जब मैं गेंद खेलता हूं तो बाहर चली जाती है.’

इत्तफाक से देबाशीष मोहंती का करियर उतना शानदार नहीं रहा, जितना हो सकता था. फिर भी उन्होंने चार साल के अपने छोटे से करियर में 45 वनडे और दो टेस्ट मैच खेले. देबाशीष के लिए इंग्लैंड की परिस्थितियां सबसे ज्यादा मुफीद थीं. उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (4/56) भी इंग्लैंड में ही किया. उन्होंने विश्व कप के मैच में केन्या के खिलाफ यह प्रदर्शन किया था.

देबाशीष ने 45 वनडे में 57 विकेट लिए. इनमें से 14 विकेट पाकिस्तानी बल्लेबाजों के थे. पूरे करियर में उन्होंने सबसे अधिक 13 विकेट कनाडा में और फिर 10 विकेट इंग्लैंड में लिए. उनके 57 विकेट में से 51 विदेश में आए. भारत की पिचों पर वे सात मैचों में छह विकेट ही ले पाए. यानी, वो सही मायने में ऐसे भारतीय गेंदबाज थे, जिन्हें अपने देश की पिचें सूट नहीं करती थीं. 43 साल के देबाशीष अब कोच हैं.

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