चमगादड़ों के स्वभाव को लेकर बड़ा खुलासा, जले हुए जंगलों को अपना बनाते हैं ठिकाना | जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। घने जंगलों की अपेक्षा चमगादड़ खुले और आग से जले हुए जंगलों को अपना ठिकाना बनाना ज्यादा पसंद करते हैं। 17 स्तनपायी पक्षियों पर किए गए एक सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि चमगादड़ खुद को आसानी से जंगलों में लगी आग के अनुकूल बना लेते हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (यूसी) डेविस के शोधकर्ताओं ने बताया कि जंगलों में रहने वाले कई चमगादड़ हालांकि घने क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं और इनकी कई प्रजातियां ऐसी भी हैं जो खुले क्षेत्रों को अपना आवास बनाती हैं। 

जल चुके जंगलों को ज्‍यादा पसंद करते हैं चमगादड़ 

सर्वे के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों की प्रजातियों के चमगादड़ घने जंगलों की अपेक्षा आग से जल चुके जंगलों को ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि इन स्थानों पर उन्हें पराध्वनिक तरंगों के जिरये स्थिति निर्धारण करने में आसानी होती है और अपना भोजन भी वह बिना किसी समस्या के खोज लेते हैं, जबकि घने जंगलों में चमगादड़ों को अपनी राह में आने वाली कई चुनौतियों को पार करना होता है।

ऐसे किया अध्‍ययन 

दरअसल, जंगलों में लगी आग चमगादड़ों के आवासों को कैसे प्रभावित कर रही है। यह पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने माइक्रोफोन के साथ एक ध्वनिक सर्वेक्षण तकनीक का उपयोग किया, जो उच्च आवृत्ति की ध्वनि निकालने के साथ-साथ चमगादड़ों के संचार के तरीकों पर नजर रखती थी। इसके बाद शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर के जरिये रिकॉडिर्ंग का विजुअलाइजेशन किया और चमगादड़ों की प्रजातियों की पहचान कर उनके रहन-सहन की विशेषताओं का पता लगाया। 

हर प्रजाति के रहन सहन का तरीका अलग 

साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि हर प्रजाति के चमगादड़ के रहन-सहन का तरीका एक-दूसरे के काफी भिन्न था। 11 में से आठ प्रजातियां ऐसी थीं, जिन्होंने आग से जले हुए जगलों को अपना ठिकाना बनाया था। यूसी डेविस के पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता और इस अध्ययन के मुख्य लेखक जैक स्टील ने कहा, ‘यह बात चौंकाने वाली है कि है चमगादड़ आग से जल चुके जंगलों में अपना आवास बनाना अन्य स्थानों के मुकाबले ज्यादा पसंद करते हैं।

अन्य पक्षियों से तेज उड़ान 

चमगादड़ का वैज्ञानिक नाम ‘टैरोपस मीडिएस’ है। स्तनधारी होते हुए भी यह अन्य पक्षियों से तेज उड़ सकता है। ये फलाहारी और कीटभक्षी दोनों तरह के होते हैं। चमगादड़ के शरीर की त्वचा पैराशूट जैसी होती, जिसकी मदद से ये लंबी उड़ान आसानी से भर लेते हैं। चमगादड़ों की अपनी एक रडार प्रणाली होती है जिसकी मदद से ये अंधेरे में अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच जाते हैं। 

रडार प्रणाली के जरिये खोजते हैं भोजन

रात में उड़ते समय चमगादड़ अपने मुंह से उच्च आवृत्ति की पराध्वनिक तरंगें पैदा करता है, जो सामने किसी ठोस वस्तु से परावर्तित होकर तत्काल चमगादड़ के मस्तिष्क को संदेश प्रेषित करती हैं, फलस्वरूप चमगादड़ अपनी दिशा बदल देता है। इसी वजह से रात के अंधेरे में चमगादड़ किसी पेड़, पहाड़ या मकान से टकराए बगैर अपने शिकार की तलाश कर लेता है।