चकाचौंध के पीछे | जनता से रिश्ता

    जनता से रिश्ता वेबडेस्क।  फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी के बाद जिस तरह के घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, उससे ये आशंकाएं गहराती जा रही हैं कि क्या वह महज मनोवैज्ञानिक दबाव का अंजाम था या फिर उसकी समूची पृष्ठभूमि तैयार हुई थी, जिसका दंश वे नहीं झेल सके। कुछ ही दिन पहले सुशांत के पिता ने पटना में जो प्राथमिकी दर्ज कराई है, उसमें सुशांत की महिला मित्र पर काम में बेजा दखल से लेकर पैसे हड़पने और दबाव के हालात पैदा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जाहिर है, अब पुलिस की जांच के दायरे में ये आरोप भी आएंगे। गौरतलब है कि मुंबई पुलिस अब तक इस मामले में कई बॉलीवुड निर्माता, निर्देशक, अभिनेता और सुशांत सिंह के मित्रों और परिजनों से पूछताछ कर रही है। अब तक सामने आए आरोपों के मुताबिक फिल्में नहीं मिलने और कुछ मिली हुई फिल्में छिन जाने की वजह से सुशांत अवसाद में चले गए थे और आखिर उन्होंने खुदकुशी कर ली। इसके बाद कई मशहूर कलाकारों ने बॉलीवुड में छाए भाई-भतीजावाद और परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाई, जिसका खमियाजा सुशांत सिंह राजपूत जैसे नए और अपनी काबिलियत के दम पर जगह बनाने वाले कलाकारों को भुगतना पड़ता है।

    दरअसल, बॉलीवुड की भीतरी दुनिया की जद्दोजहद से भरी कहानियों के बीच यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि किसी नए कलाकार के लिए फिल्म जगत में अपनी प्रतिभा के बूते कोई मुकाम बना पाना कितने संघर्षों से भरा होता है। लेकिन सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की घटना और उसके बाद सामने आ रहे ब्योरों से यह पता चलता है कि परदे पर दिखने वाले चकाचौंध के पीछे कितनी तरह की जटिलताएं एक साथ काम करती रहती हैं। उसमें एक ओर जहां अपनी काबिलियत के दम पर अपनी जगह बनाने के लिए स्थापित खेमों का साथ मिलने की खींचतान से लेकर भाई-भतीजावाद का सामना करने नौबत आती है तो दूसरी ओर चाहे-अनचाहे निजी जिंदगी में एक जाल जैसी स्थिति का पैदा हो जाना होता है। ऐसे में अगर व्यक्ति या कलाकार अपने स्तर पर काम के क्षेत्र के समीकरणों को साध सकने या उसका सामना करने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक झंझावातों से जूझने का माद्दा रखता है तो वह सबसे मुश्किल घड़ियों में खुद को टिकाए रख पाता है या उससे निकल जाता है और जो कमजोर पड़ जाता है, उसके लिए चुनौतियां गहरा जाती हैं।

    बिहार के पटना से मुंबई में जाकर सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी काबिलियत के दम पर कम समय में ही बॉलीवुड में अपनी अच्छी जगह बनाई थी। जाहिर है, फिल्म-जगत की आंतरिक सत्ता-संरचना और अवसर मुहैया कराने वाले तंत्र के बीच संघर्ष से गुजर कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया था और उसकी जटिलताओं से वे खूब परिचित होंगे। लेकिन आखिर किन हालात में कौन-सा दबाव उनके ऊपर हावी हो गया कि उन्होंने खुदकुशी को आखिरी रास्ता मान लिया! हालात का सामना करने के बजाय खुदकुशी की राह चुनने के पीछे मनोवैज्ञानिक स्तर पर उपजे दबाव को नहीं झेल पाने की जटिलता शामिल है। इसके बावजूद किसी भी स्थिति में इसे अंतिम उपाय नहीं माना जा सकता। लेकिन सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में फिल्म जगत में भाई-भतीजावाद का बोलबाला से लेकर बड़े स्थापित घरानों के बीच की प्रतिद्वंद्विता और दूसरे के खेमे में काम करने वाले कलाकारों को उठाने-गिराने के खेल से संबंधित जिस तरह की बातें सुर्खियों में आईं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे में किसी स्वतंत्र प्रतिभावान शख्स के सामने किस तरह की चुनौतियां होती हैं। हालांकि अब उनके पिता की ओर से दर्ज प्राथमिकी के बाद जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष से शायद कुछ और पेच खुलने की स्थितियां बनी हैं।