पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर वायुसेना मुस्तैद…अग्रिम मोर्चे पर चिनूक उतारा…ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से साफ चीन की जंग की धमकी महज़ ज़ुबानी…खर्च नहीं

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क | श्रीनगर: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना की घुसपैठ को रोकने और निगरानी के लिए भारत की थल और वायुसेना मुस्तैद हो गई हैं। थल सेना ने गलवन घाटी और पैगांग त्सो इलाके में यूएवी (अनमैंड एरियल व्हीकल) तैनात कर दिए हैं। वहीं, वायुसेना ने भी पूर्वी लद्दाख में अपनी गतिविधियों को बढ़ाते हुए चिनूक हेलीकॉप्टर को अग्रिम इलाकों में उतारा है। लेह स्थित सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के अधीन सेना की 81 और 114 ब्रिगेड ने चीनी सेना से निपटने के लिए अपने जवानों और अधिकारियों को चौबीस घंटे ऑपरेशनल मोड में रहने के आदेश दिए हैं। सेना के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अक्साई चिन में सेना का मूवमेंट

यूरोपियन स्पेस एजेंसी की ताज़ा तस्वीरों से इस महीने के तीसरे हफ्ते में अक्साई चिन क्षेत्र में मूवमेंट के संकेत मिलते हैं. इन तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि मूव करते ढांचे 30-50 मीटर ऊंचे हो सकते हैं. तस्वीरें ज़मीन पर हुए और देखे जा सकने वाले बदलावों को दर्शाती हैं जो कि संभवत: बड़े पैमाने पर मूवमेंट की वजह से हुए. ऐतिहासिक तस्वीरें बताती हैं कि LAC के नजदीकी स्थान से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित सड़क का निर्माण 2018-19 में हुआ था.

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बारीकी से पड़ताल से पता चलता है कि 24 मई को जो जमीन पर निशान दिख रहे थे वो 14 मई को नहीं देखे गए थे. तस्वीर में दिखे ये नए ढांचे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बड़ी संख्या में सैनिकों के मूवमेंट या लॉजिस्टिक मूवमेंट से जुड़े हो सकते हैं.

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उस क्षेत्र पर बारीक नजर जहां चीन का संदिग्ध मूवमेंट देखा गया. सोर्स: यूरोपियन स्पेस एजेंसी

ये घटनाक्रम 5 मई के आसपास भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए कथित टकराव से मेल खाता है. आजतक/इंडिया टुडे की ओर से पहले तस्वीरों के विश्लेषण पैंगोग झील और गैलवान घाटी क्षेत्र के आसपास दोनों तरफ बिल्ड अप को दिखाया गया था.

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