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COVID-19

भारत में दोबारा कोरोना संक्रमित होने का खतरनाक मामला आया सामने....डॉक्टरों ने बताया घातक...कहीं ये बड़ी बात

Janta se Rishta
23 Sep 2020 2:43 PM GMT
भारत में दोबारा कोरोना संक्रमित होने का खतरनाक मामला आया सामने....डॉक्टरों ने बताया घातक...कहीं ये बड़ी बात
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। कोरोना वायरस से रिकवर होने वाले मुंबई के चार हेल्थ वर्कर्स को दोबारा कोविड-19 का री-इंफेक्शन (Covid-19 reinfection) हुआ है. 'दि लैंसेट' की मेडिकल जर्नल वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, चारों लोग पिछली बार की तुलना में कोविड-19 के संक्रण से ज्यादा गंभीर स्थिति में हैं.रिपोर्ट के मुताबिक, चारों री-इंफेक्टेड मरीजों में से तीन डॉक्टर्स बीएमसी के नायर हॉस्पिटल से हैं और एक हेल्थकेयर वर्कर हिंदुजा अस्पताल से है. यह स्टडी दो अस्पतालों के साथ इंस्टिट्यूट ऑफ जिनोमिक्स ऐंड इंट्रिग्रेटिव बयॉलजी (IGIB) और इंटरनैशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजिनियरिंग ऐंड बायोटेक्नॉलजी (ICGEB) दिल्ली ने मिलकर की. यहां आठों जीनोम में 39 म्यूटेशन पाए गए.

नायर हॉस्पिटल की डॉ. जयंती शास्त्री और आईसीजीईबी की डॉ. सुजाता सुनील ने बताया कि चारों हेल्थकेयर वर्कर्स दूसरी बार संक्रमित हुए थे. उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में चारों में ज्यादा गंभीर लक्षण थे और उनकी हालत भी नाजुक थी. फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स लगातार SARS-CoV-2 के संपर्क में रहते हैं और उन्हें दूसरी बार इंफेक्शन होने का खतरा भी ज्यादा रहता है.

डॉ. सुनील ने बताया कि एक RT-PCR पॉजिटिव टेस्ट से री-इंफेक्शन को कन्फर्म नहीं किया जा सकता है. वायरल आइसोलेट्स के पूरे जीनोम सिक्वेंसिंग (WGS) से ही री-इंफेक्शन का पता लगाया जा सकता है. कोविड-19 का इंफेक्शन पहली बार बिना लक्षण या कम लक्षण वाला होता है. जबकि दूसरी बार स्थिति गंभीर होती है. इन हेल्थकेयर वर्कर्स को भी गंभीर हालत के चलते दूसरी बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

हालांकि दूसरी बार संक्रमित हुए चारों हेल्थ वर्कर्स को 'लोवर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट' में सांस से जुड़ी तकलीफ नहीं हुई. शायद उनकी कम उम्र होने की वजह से ऐसा ना हुआ है. शोधकर्ताओं ने बताया कि इस स्टडी को सामने लाने का उद्देश्य ये था कि इस खतरे से जुड़ी जानकारी को लोगों तक पहुंचाया जा सके.बता दें कि री-इंफेक्शन के मामले इस वक्त दुनियाभर में देखने को मिल रहे हैं. इस महीने की शुरुआत में हॉन्गकॉन्ग में री-इंफेक्शन के पहले मामले की पुष्टि की गई थी. भारत में अप्रैल से जुलाई के बीच 52 अन्य सैंपल्स के साथ पूरे 8 सीक्वेंसिस का फाइलोजेनेटिक विश्लेषण बताता है कि ये उसी नस्ल का हिस्सा थे जो वुहान स्ट्रेन से काफी मिलती-जुलती थी.

टीम ने री-इंफेक्टेड स्टाफ में D614G म्यूटेशन पाया था, जो कि लोगों को आसानी से संक्रमित करने वाले स्पाइक प्रोटीन के लिए जाना जाता है. D614G म्यूटेशन लोगों में घातक इंफेक्शन से जुड़ा होता है. डॉ. सुनील ने बताया कि चारों लोगों में इंफेक्शन सिर्फ पिछली बार की तुलना में ही ज्यादा गंभीर था.

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