किसानों की रिहाई नहीं हुई तो ग्रामीण करेंगे भूख हड़ताल

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-
जगदलपुर। जिले में बुधवार को ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर ग्रामीणों ने जेल में बंद दो किसानों को रिहा करने की मांग की. ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से इस मामले में सज्ञान लेने की मांग की है साथ ही किसानों के रिहा करने की भी गुहार लगाई है। बताया जा रहा है कि बस्तर से किसानों ने पैदल मार्च निकाला है।पैदल मार्च निकालकर ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी भी दी है।किसानों की रिहाई नहीं होने पर जगदलपुर में भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।इस पैदन मार्च में काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और किसानों को रिहा करने का नारा भी लगाया.
क्या है पूरा मामला: कर्ज के चलते किसानों को जेल की सजा होने की शिकायत बस्तर ब्लॉक के दो किसानों के परिवार ने जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी।जानकारी के मुताबिक पीडि़त किसानों को एजेंटों द्वारा खेत में ड्रिप कराने के नाम से बैंक से लोन दिलवा दिया गया था।पर अशिक्षित किसानों को ये नहीं मालूम था कि उन्हे फंसाया जा रहा है। 40 हजार हाथ में देकर उन्हे 4 लाख रुपए का कर्जदार बनाया गया।
वहीं एक किसान को तो मात्र 60 हजार देकर 10 लाख का कर्जदार बना दिया गया।बैंक से लगातार किसानों को लोन अदा करने के लिए नोटिस दिया गया लेकिन किसानों को जब पता चला की उनका कर्ज लाखों में है तो उनके होश उड़ गए।उसके बाद बैंक द्वारा चेक बाउंस को लेकर उन्हे पेशी में बुलाया गया और उन्हे जेल भेज दिया गया।इस बात की जानकारी लगने के बाद पीडि़त किसानों के परिवार ने बस्तर कलेक्टर से किसानों की रिहाई की गुहार लगाई थी।
मामले में एसडीएम जांच
कर्ज के मामले में जेल भेजे गए किसानों का मामला संज्ञान में आते ही जिला प्रशासन बस्तर द्वारा मामले की जांच अनुविभागीय दण्डाधिकारी के माध्यम से कराई जा रही है। जांच में प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला आ रहा है तथा जांच पूरी होते ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। किसानों को जमानत के माध्यम से राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिला प्रशासन द्वारा नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बस्तर जिले के कलेक्टर डॉ. अय्याज तम्बोली ने बताया कि माड़पाल निवासी श्री तुलाराम मौर्य और बस्तर निवासी श्री सुखदास को खेती-किसानी हेतु लिए गए कर्ज के कारण जेल भेजे जाने के मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी श्री जीआर मरकाम के माध्यम से कराई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक को किसानों के खिलाफ धोखाधड़ी करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टेट बैंक के कृषि विकास शाखा द्वारा चेक बाउंस होने के कारण दायर परिवाद के आधार पर प्रथम श्रेणी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी न्यायालय द्वारा तुलाराम मौर्य और श्री सुखदास को नेगोशियेबल, इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।
इस मामले में जांच अधिकारी श्री मरकाम के समक्ष दिए गए बयान के मुताबिक यह प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला लग रहा है। बताया गया कि तुलाराम मौर्य द्वारा 16 नवम्बर 2009 को भारतीय स्टेट बैंक की कृषि विकास शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड का तीन लाख रुपए, ड्रिप के लिए 2 लाख 3 हजार रुपए और फेंसिंग के लिए 60 हजार रुपए का कर्ज लिया गया था। इसी प्रकार का प्रकरण श्री सुखदास का भी है। इस मामले में किसानों के शीघ्र जमानत की कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन द्वारा विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और इस धोखाधड़ी के मामले में बैंक, दलालों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

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