स्टडी का दावा, अकेले रहने के भी हैं कई फायदे

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- सभी लोगों को कभी न कभी एकांत और शांति की आवश्यकता होती है. सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब व्यक्ति खुद के साथ कुछ समय बिताना चाहता है. हालांकि, अक्सर अकेले रहने वाले व्यक्ति को देखर लोग उसे डिप्रेशन का नाम देते हैं. लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस बात को गलत साबित कर दिया है. नई स्टडी के मुताबिक, जो बच्चे एकांत में रहना चाहते हैं, वो अपने आप को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और खुद को स्वीकार करने के अधिक सक्षम होते हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सांता क्रूज़ और विलमिंगटन कॉलेज ने मिलकर यह स्टडी की है. स्टडी के मुताबिक, जो बच्चे अपनी मर्जी से अकेला रहना चाहता है, वह जीवन को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पाते हैं. जबकि, अगर बच्चों को अकेले रहने के लिए मजबूर किया जाए, तो ये उनकी लाइफ पर नकारात्मक असर डालता है. इससे बच्चे डिप्रेशन का भी शिकार हो सकते हैं.बता दें, पिछली कुछ स्टडी में ऐसा दावा किया गया था कि अकेले रहने से इंसान डिप्रेशन का शिकार हो सकता है. लेकिन इस नई स्टडी के अनुसार, एकांत में रहना भी एक कला है जो सीखनी पड़ती है. शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछली कई स्टडी में एकांत में समय बिताने को अकेलेपन और शर्मीले स्वभाव का नाम दिया गया था. माना जाता है कि जो बच्चे अधिकतर समय अकेले बिताते हैं, वो जल्दी किसी से घुल-मिल नहीं पाते हैं.

शोधकर्ताओं ने आगे बताया कि हर व्यक्ति को ये पता होना चाहिए कि उन्हें कब अकेले रहना है और कब दूसरे लोगों के साथ टाइम स्पेंड करना है. इस स्टडी में अपनी मर्जी और खुशी अकेले रहने के फायदों पर जोर दिया गया है.स्टडी के दौरान सामने आया कि जो लोग सोशल बायकॉट के चलते अकेला रहना चाहते हैं, उनमें तनाव की समस्या आम होती है. उन लोगों में डिप्रेशन का खतरा भी ज्यादा होता है. लेकिन वहीं अगर कोई अकेला अपनी इच्छा से रहना चाहता है, तो उनको कोई भी समस्या नहीं होती है, बल्कि ऐसे लोग अपनी जिदंगी में खुश और स्वस्थ रहते हैं.शोधकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया है कि आजकल की बिजी लाइफ में हम ज्यादातर समय या तो सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं या अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं. इसके चलते हम खुद के लिए समय निकाल ही नहीं पाते हैं और अकेले रहने की कला भी नहीं सीख पाते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here