सफलता के लिए नजरिया बदलें, हालात खुद-ब-खुद बदलेंगे

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- कई बार जो चीजें दूसरों के लिए गलत होती हैं, उन्हीं में महारत हासिल कर लोग सफलता की सीढि़यां चढ़ते चले जाते है। जब हम नजरिया बदलने की बात करते हैं, तो उसका मतलब यह है कि किसी भी मुद्दे को देखने का हमारा तरीका कैसा है। मान लीजिए अफीम या गांजा है, इसके सेवन से नशा होता है। मगर इसका इस्तेमाल पेन किलर के तौर पर भी किया जाता है। इसी तरह डिजिटल वर्ल्ड में हैकिंग भी है। यह अपराध की श्रेणी में आता है, मगर इसे एथिकली किया जाए तो सरकार और समाज के लिए काफी काम का भी हो सकता है। हमारी आज की कहानी में भी कुछ ऐसा ही कहा गया है।

मोबाइल जैसे डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता बढ़ने से साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ा है। हाल ही में एक साइबर हमले में पुणे के ‘कोसमोस बैंक’ से 94 करोड़ रुपये चुरा लिए गए। इन अपराधों से लड़ने का कारोबार इतना आसान नहीं है, क्योंकि साइबर दुनिया में तकनीक तेजी से बदलती है। लेकिन साकेत मोदी ने इसमें सफलता प्राप्त की।साकेत साइबर सिक्योरिटी फर्म ‘लूसिडस’ के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। वे अपनी ग्राहक-कंपनियों का डाटा (सूचना) सुरक्षित करने का ही काम नहीं करते, बल्कि इसमें प्रशिक्षण, सेवाएं और प्रोडक्ट भी मुहैया करा रहे हैं। वह वॉट्स एप, गूगल पे जैसे एप्स को अपनी सेवाएं देते हैं। उन्हें साइबर सिक्योरिटी में अपने योगदान के लिए भारत सरकार सहित कई संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

कैसे हुए प्रेरित  कोलकाता में पले-बढ़े साकेत मोदी ने बचपन में शौकिया ही हैकिंग के कई गुर सीख लिए थे। बाद में उन्होंने सोचा कि वह अपनी इस क्षमता को अच्छे मकसद के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। तेजी से सोच सकने की क्षमता भी उनका एक और कौशल था। साकेत बताते हैं, ‘मैं हैकिंग को अपनी जीवनशैली की तरह लेता हूं। हैकिंग का मतलब उन चीजों को देखने से है, जो दूसरों की नजर में नहीं आतीं। आप कुछ ऐसा करते हैं, जिसके करने की दूसरों को उम्मीद नहीं होती।’

उन्होंने जयपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। एथिकल हैकिंग और साइबर फोरेंसिक में सेमिनार और वर्कशॉप के जरिये अपने करियर को रूप देना शुरू किया। वे कॉलेज में पढ़ते हुए कई आईआईएम, आईआईटी संस्थानों में एथिकल हैकिंग का प्रशिक्षण देने लगे। जब वह अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के आखिरी साल में थे, तब उन्होंने अपने दो और साथियों विदित बख्शी और राहुल त्यागी के साथ मिल कर स्टार्टअप ‘लूसिडस’ की शुरुआत की। तीनों ने मिल कर अपनी जमा-पूंजी स्टार्टअप में लगाई। 2012 में शुरू हुए उनके इस स्टार्टअप को आईआईटी बॉम्बे के ‘स्टार्टअप इन्क्यूबेटर’ का सहयोग मिला। साल 2013 में उन्होंने नई दिल्ली में अपने स्टार्टअप का दफ्तर खोला। अब तक उनका स्टार्टअप साइबर सिक्योरिटी की दुनिया का जाना-माना नाम बन चुका था। भारत सरकार ने उन्हें अपनी कई योजनाओं में साथ काम करने का मौका दिया। भारत सरकार ने उन्हें श्रेष्ठ आईटी स्टार्टअप का अवॉर्ड दिया। आज साकेत अपनी सेवाओं के जरिये 16 देशों में सक्रिय हैं।

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