सदाबहार की पत्तियों में है कैंसर से लड़ने की क्षमता, वैज्ञानिकों ने की पुष्टि

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- गुलाबी या सफेद फूलों वाला सदाबहार यानी रोजी मैडागास्कर पेरीविंकल के छोटे से पौधे से कैंसर का इलाज हो पाएगा। वैसे तो मधुमेह के पारंपरिक घरेलू इलाज के तौर पर इसकी पत्तियों का उपयोग मैडागास्कर, भारत, चीन, फिलिपीन्स के आम लोग बरसों से कर रहे हैं, लेकिन अब इनमें कैंसर से लड़ने की क्षमता की पुष्टि हो गई है। इसके गुणों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इसे प्राथमिकता वाली बीमारियों के इलाज की आवश्यक दवाओं की सूची में रखा और सबसे कारगर, सुरक्षित और सस्ता बताया है। 60 साल तक की रिसर्च में यह पाया गया कि इस पौधे के अंदर एक रहस्यमय कैमिकल प्रक्रिया होती है, जिसके जरिए इसकी पत्तियों में जिंदगी को बचाने वाला मॉलीक्यूल विनब्लास्टाइन बनता है। कई दशकों तक वैज्ञानिक इसकी पत्तियों से विनब्लास्टाइन कैमिकल निकालकर प्रयोग करते रहे।

बच्चों में क्रॉनिक अस्थमा और जेनेटिक डिसऑर्डर होने पर नहीं बढ़ती लंबाई

हैल्थ रिपोर्टर

बच्चे की अच्छी लंबाई के लिए जन्म से ही उसका ग्रोथ चार्ट बनाना चाहिए। उसकी हाइट को नापते हुए ग्रोथ चार्ट पर फ्लो करें। ताकि बच्चे की लंबाई बढ़ रही है या नहीं। यह समय-समय पर मालूम चल पाएं। ग्रोथ चार्ट के मुताबिक, पिछले तीन-चार महीने में बच्चे की लंबाई नहीं बढ़ रही है। लंबाई नहीं बढ़ने की वजह इंवेस्टिगेट करवाएं। हर बच्चे की लंबाई उम्र के हिसाब से अलग-अलग बढ़ती है। किसी बच्चे की लंबाई दस से बारह साल तक और किसी बच्चे की लंबाई अट्ठारह साल की उम्र तक बढ़ती है। हर उम्र की ग्रोथ चार्ट को फ्लो करें। ताकि बच्चे की बढ़ती हुई लंबाई के बारे में हर महीने मालूम चले।

लंबाई डायग्नोस करने का तरीका: बच्चे की बोन एज से उसकी लंबाई का पता किया जा सकता है। हाथ का एक्स-रे करके बोन एज मालूम की जाती है। हडि्डयां फ्यूज होने पर बच्चे की लंबाई नहीं बढ़ती है। बोन एज जितनी हैल्दी होगी लंबाई उतनी ही बढ़ेगी। इसके लिए बच्चे को अच्छी डाइट देना जरुरी है।

सदाबहार की पत्तियों में है कैंसर से लड़ने का गुण

रिसर्च का निष्कर्ष

विनब्लास्टाइन शरीर की कोशिकाओं में माइटोसिस नहीं होने देता यानी कोशिकाओं के विभाजन में बाधा बन जाता है। कोशिकाओं का विभाजन होना ही कैंसर है। इस बीमारी से ग्रसित कोशिकाओं में तेजी से विभाजन होता है। यूरिनरी ब्लैडर (पेशाब की थैली), टेस्टिकुलर (अंडकोष), फेफड़ों, अंडाशय (ओवरी) और स्तन (ब्रेस्ट) के कैंसर में इस्तेमाल किया जाता रहा है। वैज्ञानिकों ने जीनोम के क्रम (सीक्वेंस) को जानने की अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए विनब्लास्टाइन के निर्माण प्रक्रिया के दौरान लुप्त हो जाने वाले जीन्स की स्पष्ट व्याख्या करने में सफलता हासिल की।

इन बीमारियों में भी सदाबहार की पत्तियों का उपयोग : डायबिटीज, कैंसर के अलावा इसकी पत्तियों को चबाने या उनकी चाय बनाकर पीने से याददाश्त सुधरती है, घाव से ब्लीडिंग रुकती है, मुंह के छाले, तनाव और बेचैनी कम होती है।

लंबाई नहीं बढ़ने के रिस्क फैक्टर

ग्रोथ हॉर्मोन की कमी, टर्नल सिंड्रोम, क्रॉनिक अस्थमा, लिवर सिरोसिस, थाइराॅइड, हार्ट और सीलियक डिजीज, जेनेटिक डिसऑर्डर, इडियोपैथी।

इलाज

बीमारी के मुताबिक इलाज दिया जाता है। ग्रोथ हॉर्मोन की कमी, टर्नल सिंड्रोम और इडियोपैथी में बच्चे को ग्रोथ हॉर्मोन देते हैं। तीन महीने में इन हॉर्मोन का असर आना शुरू हो जाता है।
-डॉ. संदीप माथुर,  एंड्रोक्राइनोलॉजिस्ट, जयपुर