संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव के चुनाव के बीच भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर खींचा दुनिया का ध्यान

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-  भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाइजीरिया के राजदूत तिजानी मुहम्मद बंदे को महासभा के अगले अध्यक्ष के लिए अपना समर्थन व्यक्त करते हुए उनसे कहा कि वह वैश्विक स्तर पर आतंकवाद का सामना करने में इस निकाय को और अधिक ”कार्य-उन्मुख”बनाएं. महासभा की मौजूदा अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा ने सोमवार को नाइजीरिया द्वारा नामांकित मुहम्मद बंदे के साथ हुए एक औपचारिक संवाद समारोह की अध्यक्षता की. इस बैठक में सदस्य देशों को यह अवसर मिला कि वे उनके दृष्टिकोण पत्र पर चर्चा कर सकें और उनसे उनकी प्राथमिकताओं एवं योजनाओं पर प्रश्न कर सकें, यदि इस 193 सदस्य देशों वाली महासभा के 74वें सत्र की अध्यक्षता के लिए उन्हें चुना जाता है.इस पारस्परिक संवाद का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं समग्रता में योगदान करना था. भारत ने नाइजीरियाई राजदूत के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए उन्हें ” महान मित्र” और ”अफ्रीका के बहुपरिचित पुत्र”की संज्ञाओं से विभूषित किया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट कर कहा कि भारत मुहम्मद बंदे को चार जून को होने वाले मौखिक मतदान में निर्वाचित होते देखने का इच्छुक है. उन्होंने कहा, ”भारत इस प्रयास का समर्थन करता है.”

अकबरुद्दीन ने मुहम्मद बंदे का ध्यान लंबे समय से लंबित अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर वैश्विक सम्मेलन ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र सम्मेलन (सीसीआईटी) की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को इस पर आगे कार्य करना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद हर उस चीज का ”विरोधी” है जिसका कि संयुक्त राष्ट्र समर्थन करता है. भारत ने सीसीआईटी के लिए 1986 में एक प्रारूप दस्तावेज का प्रस्ताव दिया था, लेकिन आतंकवाद की परिभाषा पर सहमति नहीं बन सकने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका.नाइजीरियाई राजदूत ने उत्तर में कहा, ”और कोई चीज उतनी आवश्यक नहीं है जितना कि आतंकवाद से निपटना, क्योंकि आतंकवाद ने जो किया है, जैसा कि मेरे मित्र सैयद ने कहा, वह पूरी तरह उसके खिलाफ है जिसका यह संगठन समर्थन करता है.” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर काम करने का आह्वान किया.

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