वैज्ञानिकों ने AI की मदद से जाना, दूसरी दुनिया से आती रेडियो तरंगें

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :  बेंगलुरु : ऐसी ही खोज के लिए 10 करोड़ डॉलर की लागत से चलाए जा रहे खगोलीय कार्यक्रम ‘ब्रेकथ्रू लिसन’ को एक बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों को बाहरी दुनिया से आती तरंगें मिली हैं। रिसर्चरों का कहना है कि तरंगें जिस सॉर्स से आ रही हैं, वहां जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।सोमवार देर शाम की गई घोषणा के मुताबिक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से वैज्ञानिकों ने 72 नए फास्ट रेडियो विस्फोट (FRBs) का पता लगाया है, जो FRB-121102 से आ रहे हैं। आपको बता दें कि हमारी आकाशगंगा ‘मिल्की वे’ से यह गैलक्सी करीब 3 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

खोज का भारत से कनेक्शन
आपको बता दें कि FRB-121102 की पहचान को लेकर पहली घोषणा पिछले साल हुई थी और इस खोज का श्रेय यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया, बर्कले के पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर डॉ. विशाल गज्जर को जाता है। डॉ. विशाल मूल रूप से गुजरात से ताल्लुक रखते हैं। फास्ट रेडियो बर्स्ट या FRBs दरअसल, बेहद संक्षिप्त अवधि की (महज मिलीसेकंड्स में) दूर आकाशगंगाओं से आती रेडियो तरंगे होती हैं। इसे पहली बार ऑस्ट्रेलिया में पार्क्स टेलिस्कोप से पकड़ा गया था। इसके बाद दुनियाभर में कई रेडियो टेलिस्कोप के जरिए FRBs को पहचाना गया।

सोमवार को ब्रेकथ्रू लिसन की ओर से बताया गया, ‘एक विस्फोट (तरंगों के रिलीज) के दौरान ज्यादातर FRBs की पहचान की गई। इसके विपरीत FRB-121102 ही अकेली ऐसी है जहां से लगातार तरंगें निकल रही हैं। 2017 में ब्रेकथ्रू लिसन की निगरानी के दौरान वेस्ट वर्जिनिया में ग्रीन बैंक टेलिस्कोप (GBT) की मदद से कुल 21 बर्स्ट की पहचान की जा सकी थी।’

ब्रेकथ्रू इनिशटिव के कार्यकारी निदेशक पीट वॉर्डन ने कहा कि ताजा निगरानी से ही सभी खोज नहीं हुई है। नए केस को शामिल कर मौजूदा डेटाबेस तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, ‘दूर आसमान की सबसे अबूझ पहेलियों में से एक के बारे में हमारे ज्ञान में बढ़ोतरी हुई है।’ पिछले साल डॉ. विशाल के नेतृत्व में 5 घंटे लंबी निगरानी और विश्लेषण के बाद FRB-121102 का पता लगाया गया था। लिसन साइंस की टीम ने अब एक नया, पावरफुल मशीन लर्निंग एल्गोरिदम विकसित कर लिया है जिसने दोबारा 2017 के डेटाबेस का विश्लेषण किया है, जिससे 72 नए FRBs का पता चला।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नए FRBs का पता चलने से यह समझने में मदद मिलेगी कि ये रहस्यमय स्रोत कितने पावरफुल हैं। एल्गोरिदम विकसित करनेवाले रिसर्च स्टूडेंट गेरी झांग ने कहा कि रेडियो ट्रांजिएंट का पता लगाने के लिए इन तरीकों का इस्तेमाल करने की यह तो शुरुआत है। उम्मीद जताई जा रही है कि आगे चलकर ऐसे सिग्नल भी पकड़े जा सकेंगे जो क्लासिकल एल्गोरिदम से छूट जाते थे। FRBs को समझने के साथ ही ब्रेकथ्रू लिसन हमारे चारों ओर फैले विशाल ब्रह्मांड तो समझने का दायरा बढ़ा रहा है।

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