वैज्ञानिकों ने क्लाइमेट इमरजेंसी को लेकर की अपील, मीट खाना कम करें लोग | जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नई दिल्ली : अमेरिका ने हाल ही में क्लाइमेट चेंज को लेकर पैरिस समझौते से खुद को अलग कर लिया जिसकी चारों तरफ निंदा हो रही है। जलवायु में जितनी तेजी से बदलाव हो रहा है, उस पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। इंडिपेंडेंट में प्रकाशित खबर के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने दुनिया में लोगों से कम मीट खाने की अपील की है। उन्होंने वर्तमान परिस्थिति को क्लाइमेट इमर्जेंसी करार दिया।

बायोसाइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विश्व भर के वैज्ञानिकों ने मिलकर क्लाइमेट चेंज से निबटने के लिए छह सूत्रीय कार्यक्रम पेश किया है। इस रिपोर्ट को 153 देशों के 11 हजार वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार की है। रिसर्च के दौरान इतने वैज्ञानिकों ने करीब 40 साल के डेटा का विस्तृत अध्ययन किया और रिपोर्ट तैयार की।

इस रिपोर्ट में विश्वभर के लोगों से ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जी खाने को कहा है और कम से कम मीट खाने की अपील की गई है। कम मीट का इस्तेमाल होने से मिथेन और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी। वैज्ञानिकों ने खाना भी कम से कम बर्बाद करने की अपील की है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक तिहाई खाना पूरे विश्व में बर्बाद होता है।

2018 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से स्टडी के आधार पर कहा गया था कि अगर लोग मांसाहारी की जगह शाकाहारी हो जाएं तो इस गंभीर चुनौती को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर कोई मीट और डेयरी प्रॉडक्ट खाना छोड़ दे, तो वह 73 फीसदी कम कॉर्बन का उत्सर्जन करेगा।