विनसम ग्रुप में फंड डायवर्जन मामले के तार मकाऊ से जुड़े

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस के बाद देश के सबसे बड़े विलफुल डिफॉल्टर माने जाने वाले विनसम ग्रुप की तरफ से हुए रुपयों के लेन-देन के तार एशिया के लास वेगस मकाऊ से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच कर रही सीबीआई अब विनसम की कंपनियों से जुड़े फंड्स के मूवमेंट की जानकारी के लिए मकाऊ की अथॉरिटीज को लेटर रोगेटरी (एलआर) भेजने की प्रक्रिया शुरू करेगी। विनसम की कंपनियों पर भारत के 15 बैंकों का 6,800 करोड़ रुपये का बकाया है। बड़े और भव्य कसीनो के साथ बैंक एटीएम से आसानी से कैश निकालने से जुड़े नियमों के लिए मशहूर मकाऊ मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों का पसंदीदा ठिकाना रहा है। सीबीआई ने यूएई, सिंगापुर, ब्रिटेन और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड की अथॉरिटीज से उन 13 ‘बायर्स’ के बारे में जानकारी मांगने के अनुरोध के साथ उन्हें एलआर जारी कराने के लिए हाल ही में मुंबई की विशेष अदालत से संपर्क किया था, जिन्हें विनसम की कंपनियों और प्रमोटर जतिन मेहता ने कथित रूप से प्रोसेस्ड गोल्ड बेचा था। जांच एजेंसी पक्का करना चाहती है कि मेहता और मामले में सह आरोपी जॉर्डन के नागरिक हेतम सलमान अबू अली ओबैदा ने बैंकों से उधार ली गई रकम डकारने के लिए बायर्स खड़े किए थे। एक जांच अधिकारी ने कहा, ‘लेयरिंग के जरिए फंड इधर-उधर करने के लिए खासतौर पर विनसम डायमंड्स के अलावा मेहता और उनके सहयोगियों की बनाई दूसरी शेल कंपनियों के साथ लेनदेन करने वाली कंपनियों, उनके डायरेक्टरों, बही-खातों और लेनदेन की जानकारी मांग गई है।’

अब तक सीबीआई और इससे पहले एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) को फॉरन अथॉरिटीज से बहुत कम जानकारी मिल पाई है। दो देशों के बीच सूचनाओं के शेयरिंग के लिए कोई करार नहीं होने की सूरत में लोकल कोर्ट की तरफ से विदेशी अदालत को न्यायिक सहायता के लिए एलआर (अनुरोध पत्र) जारी किए जाते हैं। सूत्र ने कहा, ‘मेहता के जॉर्डन वाले पार्टनर सहित मामले में आरोपी बनाए गए सभी लोगों के नाम लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए हैं, लेकिन इंटरपोल ने इनके खिलाफ अब तक रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं किया है। एक साल से वे लोग सिर्फ सवाल दर सवाल उठाते रहे हैं और उन्हें जवाबों से संतुष्ट करने की हरसंभव कोशिश के बावजूद उनके खिलाफ आरसीएन जारी नहीं हुआ है। एलआर का जवाब मिलने के बाद आरसीएन जारी कराने के लिए संबंधित सूचनाओं के साथ इंटरपोल से संपर्क किया जाएगा।’भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करके कैरिबियन देश सेंट किट्स की नागरिकता लेने वाले मेहता ने 2013 में विनसम के बैंकों का बकाया चुकाने में डिफॉल्ट करने से काफी पहले भारत छोड़ दिया था। पांच साल बाद हुए नीरव मोदी स्कैम की तरह विनसम डिफॉल्ट मामले ने एक दशक से ज्यादा समय से डायमंड हाउस और जूलर के साथ एक दशक से ज्यादा समय से कारोबार कर रहे बैंकों को हिला दिया था। कुछ बैंक तो विनसम को अपना टॉप कस्टमर मानते थे।

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