विधायक दल की बैठक में तीन घंटे हार पर मंथन

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:
आज संगठन में तलाशेंगे वजह जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। जब भाजपा के दिग्गजों को ही नहीं पता कैसे जीत गए, तो हम भी समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर क्या हुआ है। मुख्यमंत्री निवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक तीन घंटे तक चली। इसमें लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार पर मंथन किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में बीजेपी के कथित राष्ट्रवाद, आरएसएस और भाजपा के ध्रुवीकरण को हार की वजह माना गया। साथ ही बस्तर में नमक चना न बंटने को भी एक वजह बताई गई। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी जिम्मेदारी संभालते रहे। जो उन्होंने पेशकश की है कि अध्यक्ष पद के जिम्मेदारी को छोडऩे की वे उस पर बने रहे। फिलहाल हार का कारण पता नहीं चल पाया है। सिंहदेव ने कहा कि घर के सामने से बीजेपी की कितनी गाडिय़ां जाती थी। बैंडबाजा बजता लेकिन इस बार कोई माहौल नहीं था। कहीं मिठाईयां नहीं बंट रही, अब की बार 300 पार कहने के बाद कंधों पर दुनिया उठा लेनी चाहिए थी, लेकिन कही कुछ नहीं है।
1952 से नहीं हारे वहां कैसे हार मिली? : काम तो छत्तीसगढ़ सरकार ने बहुत किया था। अन्य जगहों पर भी हम गए, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना में प्रचार में गए, कही ऐसा माहौल महसूस नहीं हो रहा था कि इस प्रकार के परिणाम आएंगे और मंथन करने की आवश्यकता है, लोग कह रहे हैं कि जो पोलिंग 1952 से नहीं हारी, वहां कैसे हार गए, यहां तक विधानसभा में हारे, न लोकसभा में हारे लेकिन इस बार कैसे हार गए. क्या हो गया कि हम ऐसे पोलिंग में हम हार गए। ओवर कॉफिडेंस के सवाल पर कहा कि ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि सभी पूरे मन से काम कर रहे थे, अगर ओवर कॉफिडेंस होता तो लोग घर बैठ जाते कि हम जीत ही जाएंगे, लोग काम हीं नहीं करते।
ईवीएम को निर्माता देशों ने छोड़ दिया : ईवीएम मशीन के निर्माता देशों ने भी इसे छोड़ दिया है, ईवीएम के सवाल पर कहा कि चुनाव के परिणाम के बाद इस पर चर्चा करना व्यर्थ है। ये लगेगा की हार गए तो ऐसा बोल रहे हैं। मेरी राय है कि ईवीएम इतना विवादित हो गया, जापान ने छोड़ दिया, अमेरिका ने छोड़ दिया, जर्मनी ने छोड़ दिया तो हम क्यों नहीं छोड़ते, हम क्यों चिपके हुए है ये मेरी निजी राय है, बहरहाल इस चुनाव के बाद ईवीएम पर चर्चा करना गलत है।
अफवाह का नहीं हुआ असर : चना की बात होती है तो आदिवासी इलाके में चना दिया जाता है। मैदानी इलाके में तो चना नहीं दिया जाता तो इसका पूरे प्रदेश में इसका असर कैसे हो गया? चना तो दुर्ग और रायपुर में भी नहीं दिया जाता, उसका असर यहां नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने (भाजपा) आदिवासी इलाके में इसे मुद्दा बनाने का प्रयास किया था और हम लोगों को जवाब भी देना पड़ा, जहां चना दिया जाता वहां जैसे कांकेर में हम नजदीकी मुकाबले में हार गए। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया बोले कि पूरा देश चिंतन कर रहा है सरकार ने कोई काम नहीं किया फिर भी ऐसे नतीजे कैसे आ गए। इस पर सारा विपक्ष चिंतन कर रहा है।
हार की वजह समझ नहीं आई : दुर्ग संभाग में मिली हार पर कहा कि पुलवामा की बातें नहीं चली, गैस, घर देने, सेना के लोगों के नाम पर प्रयास किया गया। वो भी छूट गया। मेरे 35 साल के राजनीतिक सफर के बाद मुझे पहली बार हार की वजह समझ नहीं आया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया, अरुण उरांव और भूपेश बघेल ने विधायकों की बैठक ली। इसमें सभी मंत्री और कांग्रेस के 68 में से 57 विधायक मौजूद रहे।

हार की समीक्षा के साथ 13 वें मंत्री की चर्चा जोरों पर

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस की बैठक में लोकसभा चुनाव में हुए भीतरघात का मुद्दा भले ही नहीं उठा ह लेकिन उसके कारणों को जानने की कोशिश की गई। इस दौरान नए अध्यक्ष और 13 वें मंत्री की भी सुगबुगाहट होते रही। सीधेतौर पर तो इस मुद्दे पर कोई खुलकर नहीं आया, लेकिन इसे लेकर कानाफूसी होते रही। विधायक, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों, जिला पदाधिकारियों के साथ ही लोकसभा के प्रत्याशी की मौजूदगी में सवाल आते-जाते रहे। विधानसभा चुनाव के बाद भी भितरघातियों की शिकायत आलाकमान से की गई थी लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई थी। लेकिन अब लोकसभा चुनाव में भितरघातियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी है। भूपेश मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद रिक्त है। लोकसभा चुनाव के बाद एक और मंत्री बनाए जाने की चर्चा जोरशोर से चल रही है। अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए विधायकों ने लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ काम किया। अब इसी आधार पर वे दावेदारी पेश कर रहे है। तेरहवें मंत्री के रूप में आदिवासी नेता अमरजीत भगत का नाम प्रमुखता से चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी उन्हें अपना आशीर्वाद दे दिया है। ऐसे में अमरजीत भगत के मंत्री बनने की संभावना है। वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा ने भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। पहले अमरजीत भगत को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी। अगर अमरजीत को मंत्री बनाया जाता है तो फिर किसी अनुभवी को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि अमरजीत भगत और दूसरे नेता फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।