लोहिड़ी पर्व आज, जानें इस पर्व का महत्व और इतिहास, क्यों मनाया जाता है यह पर्व

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- जनवरी की सर्द रातों में लकड़ी और तिल के कड़कड़ाने की आवाज आना मतलब लोहड़ी के त्योहार की आमद.. फसल की बुआई और कटाई से जुड़ा यह त्यौहार आज पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मूल रूप से यह पावन पर्व भले ही पंजाबी समुदाय से जुड़ा है, लेकिन विविधताओं से भरे हमारे देश के हर प्रांत में यह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस देश की यही खूबी है कि यहां हर धर्म के त्योहार दूसरे धर्मों द्वारा भी उतने ही उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हर साल देशभर में मकर संक्रांति के एक दिन पहले लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन आग में तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। आग के चारों तरफ चक्कर लगाकर सभी लोग अपने सुखी जीनव की कामना करते हैं। आइए उत्साह, उमंग और खुशहाली के प्रतीक इस त्योहार के महत्व के बारे में जानते हैं —

क्यों मनाई जाती है लोहड़ी ?

पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुवाई और कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। इस अवसर पर पंजाब में नई फसल की पूजा करने की परंपरा है। इसके अलावा कई हिस्सों में माना जाता है यह त्योहार पूस की आखिरी रात और माघ की पहली सुबह की कड़क ठंड को कम करने के लिए मनाया जाता है।

कैसे मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार ?

लोहड़ी के इस पावन अवसर के दिन अग्नि जलाने के बाद उसमें तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। वहीं इसके बाद सभी लोग अग्नि के गोल-गोल चक्कर लगाते हुए सुंदरिए-मुंदरिए हो, ओ आ गई लोहड़ी वे, जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते इस पावन पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं।

कौन था दुल्ला भट्टी ?
अमूमन लोहड़ी में लोग गीत गाते हुए दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए नाच गाना करते हैं। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। दरअसल, मुगल काल में अकबर के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में ही रहता है। कहते हैं कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की उस वक्त रक्षा की थी जब संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था। वहीं एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं अमीर सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई थी। और तभी से इसी तरह दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर ये कहानी सुनाई जाने लगी।

कहां से आया लोहड़ी शब्द?
मान्यता है कि लोहड़ी शब्द ‘लोई’ यानी (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था, लेकिन कई लोग इसे तिलोड़ी से उत्पन्न हुआ भी मानते हैं, जो बाद में लोहड़ी शब्द हो गया। वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना है कि यह शब्द ‘लोह’ यानी चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण से निकला है।

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