राज्य सरकार ने गरीबों, किसानों, आदिवासियों के हित में तेजी से कार्य किए : मंत्री कवासी लखमा

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-  प्रदेश के वाणिज्यक कर (आबकारी) वाणिज्य और उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा है कि राज्य सरकार ने किसानों, गरीबों और आदिवासियों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पिछले छः माह में तेजी से काम किए हैं। लखमा ने आज यहां सुकमा जिले के तोंगपाल में उप-तहसील कार्यालय का शुभारम्भ किया। आज से तोंगपाल उप-तहसील कार्यालय में कार्य शुरू हो गया हैं।

लखमा ने तोंगपाल में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार जनता की भलाई के कई निर्णय लिए है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के अल्पकालीन कृषि ऋण माफ कर दिए हैं। धान का मूल्य 2500 रुपए प्रति क्विंटल किया गया हैं, वहीं पर आदिवासियों के हित में तेन्दूपत्ता का प्रति मानक बोरा मूल्य चार हजार रुपए किया गया हैं। इसी तरह से राज्य के सभी परिवारों को अब सावर्जनिक वितरण प्रणाली के तहत् खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। इन फैसलों से किसानों, आदिवासियों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर जिले के लोहण्डीगुड़ा में अधिग्रहण की गई किसानों की जमीन राज्य सरकार ने उन्हें फिर से वापस दिलाकर किसानों के हित में ऐतिहासिक काम किया हैं।

लखमा ने कहा कि मैं राज्य मंत्रीमण्डल का पहला सदस्य हूँ जिसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबसे पहले विदेश भेजा हैं। मैं कनाडा जाकर आया हूँ, वहां पर उद्योगपतियों से मिलकर छत्तीसगढ़ और बस्तर के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योगपतियों से समझौते किए गए हैं। आगामी दिनों में युवाओं को रोजगार मिलेगा। लखमा ने कहा कि तोंगपाल मे उप-तहसील कार्यालय प्रारम्भ हो जाने से अब यहां के लोगों के काम यही होगें, उन्हें बाहर नहीं जाना पडे़गा। उन्होंने कहा कि मैने तोंगपाल में बैंक की शाखा खुलवाने के लिए भी विशेष पहल कर यहां बैंक शाखा खुलवाई हैं, जिससे यहां के स्थानीय लोगों को फायदा हुआ हैं। मंत्री लखमा ने इस अवसर पर कक्षा छठवीं और नवमीं के नवप्रवेशी बच्चों को पाठ्य पुस्तकें, गणवेश तथा स्कूल बैग प्रदान किए। 10 बालिकाओं को सरस्वती सायकल योजना के तहत् सायकल प्रदान की गई। इसी तरह से अन्त्यावसायी की योजना के तहत एक हितग्राही को ट्रेक्टर ट्राली प्रदान की। इस अवसर पर मंत्री जी ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों को उनकी मजदूरी का नगद भुगतान किया। मंत्री ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों से कहा कि उन्हें अब तेन्दूपत्ता की मजदूरी नगद में भुगतान की जाएगी।

लखमा ने आज सहकारिता गोदाम भवन तोंगपाल, सहकारिता गोदाम भवन पुसपाल, सामुदायिक भवन, बैंक हेतु पुसपाल और 5 बिस्तर प्रसूति वार्ड कुकानार का लोकार्पण किया। इसी तरह से उन्होंने 100 सीटर पोटाकेबिन बालक छात्रावास भवन तोंगपाल और पोटाकेबिन हेतु प्री फेब स्ट्रक्चर से निर्माण हेतु तोंगपाल में हाईस्कूल का शिलान्यास किया। मंत्री ने छिन्दगढ़ विकासखण्ड के ग्राम चिपुरपाल में आदर्श गाय गोठान का उद्घाटन किया। उन्होंने बिरसठपाल में गाय गोठान का उद्घाटन कर गोठान का निरीक्षण किया और गोठान में वृक्षारोपण भी किए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील कि की वे अपने पशुओं को गाय गोठान में लाकर अवश्य छोडें़, यहां पर उनके पशुओं के लिए चारा, पानी और उपचार की भी समुचित व्यवस्था होगी। बिरसठपाल गाय गोठान में अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा भी वृक्षारोपण किए। लखमा ने गाय गोठानों का संचालन स्व-सहायता समूहों के माध्यम से कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस अवसर पर कलेक्टर चन्दन कुमार ने गाय गोठानों के संबंध में विस्तृत जानकारी मंत्री को दी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक और वन मण्डलाधिकारी भी मौजूद थे।

तोंगपाल में सभा को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हरीश कवासी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा किसान, गरीब और आदिवासियों के लिए अनेकों कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक माह पूर्व घोषणा की थी कि तोंगपाल में उप-तहसील कार्यालय शुरू किया जाएगा जो आज से मंत्री लखमा द्वारा शुभारम्भ किया गया हैं। हरीश कवासी ने कहा कि आगामी समय में सुकमा जिले में सभी गांवों में सड़के, पुल-पुलिया और गांवों में आवश्यकता के सभी काम किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिले के बच्चों के लिए आवश्यकतानुसार स्कूल और आश्रम, छात्रावास खोले जाएंगे। कवासी ने कहा कि जिले के हाईस्कूल और आश्रम को मॉडल स्कूल और आश्रम घोषित किया जाना चाहिए। जिससे यहां के छात्र भी अखिल भारतीय परीक्षाओं में भाग लेकर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसे पदों पर जाकर जिले का नाम रोशन करें। उन्होंने मंत्री लखमा से इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। कार्यक्रम को करण देव सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने संबोधित किया। इस अवसर पर पंच, सरपंच सहित पंचायत राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में ग्रामीण और अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

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