मेघालय की एक गैरकानूनी खदान में करीब एक माह से 15 लोग फंसे हुए है अब चमत्कार के भरोसे रहेना होगा

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मेघालय की एक गैरकानूनी खदान में करीब एक माह से फंसे 15 श्रमिक यदि जीवित बाहर निकल आते हैं तो उसे चमत्कार में भरोसा करना होगा। सरकार इन श्रमिकों की जिंदगी बचाने का भरसक प्रयास कर रही है। इस काम में नौसेना के अलावा वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है।

न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, हमें चमत्कार में विश्वास करना होगा। पीठ ने टिप्पणी की, यह स्पष्ट नहीं है कि ये श्रमिक अभी भी जीवित हैं। इसमें कोई विवाद नहीं है कि आप प्रयास कर रहे हैं। हो सकता है कि कोई जीवित हो। आपको उन्हें बाहर निकालना है। आपको अपने प्रयास जारी रखने होंगे।

शीर्ष अदालत ने इस खदान में पिछले साल 13 दिसंबर से फंसे 15 श्रमिकों को बचाने के लिए दायर आदित्य एन. प्रसाद की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। केंद्र और मेघालय सरकार ने इन श्रमिकों को बचाने के लिए अब तक किए गए प्रयासों से न्यायालय को अवगत कराया। पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस मामले को 18 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

अवैध खनन को लेकर एक गिरफ्तार : 

कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से पूछा कि क्या इस तरह की गैरकानूनी खनन गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। इस पर वकील ने कोर्ट को बताया कि गैरकानूनी खदान चलाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि प्राधिकारियों के प्रयासों से वह संतुष्ट हैं। परंतु बचाव कार्य के बारे जुटी एजेंसियों के बीत तारतम्य का अभाव है।

एक करोड़ लीटर पानी निकाला :

मेघालय सरकार ने कोर्ट को बताया कि खदान से अभी तक एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला जा चुका है। लेकिन पास की नदी से इसमें हो रहा रिसाव बाधाएं पैदा कर रहा है। यह खदान कम से कम 20 दूसरी खदानों से भी जुड़ी हुई है। राज्य सरकार ने यह भी बताया कि खदान में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए नौसेना ने पांच रिमोट चालित वाहनों को काम में लगाया है।

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