महाराष्ट्र: अलग रहता है पति, कोर्ट ने दिया महिला संग बच्चे पैदा करने का आदेश और मौलिक नागरिक अधिकार माना

  • अलग रहता है पति, कोर्ट ने दिया महिला संग बच्चे पैदा करने का आदेश
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    अलग रह रहे पति संग बच्चे पैदा करने के लिए एक महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी. याचिका की सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र के नांदेड़ के फेमिली कोर्ट ने 35 साल की महिला के बच्चा पैदा करने को उनका मौलिक नागरिक अधिकार माना. इसके बाद महिला और उनके अलग रह रहे पति को आईवीएफ एक्सपर्ट से मिलने का आदेश दिया.

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    टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात का उल्लेख किया है कि बच्चे पैदा करने के लिए पति की सहमति जरूरी है. ऑर्डर के मुताबिक, प्रतिवादी असिस्टेड रिप्रॉडक्टिव टेक्नोलॉजी के तहत बच्चे पैदा करने के लिए सहमति देने से मना कर सकता है. लेकिन अनुचित तरीके से इनकार करने पर आगे कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ सकता है.

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    असल में अलग रह रहे पति ने 2017 में कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की थी. वहीं, महिला ने साथ रहने के लिए आवेदन दिया था. दोनों ही मामलों में याचिका लंबित है. इसी बीच महिला ने अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए दूसरा बच्चा पैदा करने के लिए याचिका दायर कर दी.

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    हालांकि, पति ने महिला के बच्चे पैदा करने की मांग को गलत और गैरकानूनी बताते हुए विरोध किया. लेकिन कोर्ट ने महिला की मांग को स्वीकार करते हुए आईवीएफ से बच्चे पैदा करने पर डॉक्टर से रिपोर्ट देने को कहा.

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    फेमिली कोर्ट की जज स्वाति चौहान ने महिला के पक्ष में फैसला दिया. पहले से कपल का एक बच्चा है जो मां संग रहता है. मां ने कोर्ट में कहा था कि वह उसके लिए भाई या बहन चाहती है. उनकी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है और उनके फर्टाइल बने रहने का समय कम बचा है

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