भारत का ‘चंद्रयान-2’ श्री हरिकोटा से होगा लॉन्च

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-  16 जुलाई भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के लिए इसलिए खास है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले भारत का चंद्रयान-2 श्री हरिकोटा से लॉन्च होगा। 16 जुलाई की एक और खासियत है कि यह दिन नासा के अपोलो-11 के लॉन्च होने की 50वीं सालगिरह का दिन है। इसी मिशन पर नील एम्सट्रॉन्ग और बज अलड्रिन ने चंद्रमा पर पैर रखा था। इस मिशन के लगभग आधी सदी बाद भारत चांद पर अपना मिशन भेज रहा है और क्या यह फिर से पिछले चक्र की शुरुआत है? 2008 में जब भारत ने अपना पहला मिशन चंद्रयान लॉन्च किया था तब भी इसकी आलोचना हो रही थी। हालांकि, अन्य देशों की तुलना में देरी से चंद्रमा तक पहुंचने का मिशन लॉन्च होने के बाद भी यह खासा सफल अभियान रहा। चंद्रयान-1 से जब चंद्रमा पर पानी, बर्फ और चंद्रमा के धरातल को लेकर उपयोगी जानकारी मिली तो आलोचकों के सभी सवालों का जवाब भी मिल गया। चंद्रयान-1 के लिए 386 करोड़ रुपये खर्च हुए जो अमेरिका और यूएसएसआर के कुल बजट का एक छोटा हिस्सा भर ही था।

 चंद्रयान-2 को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। चंद्रयान-2 में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर भा है। यह भारत का पहला चंद्रमा पर मिशन होगा जो उसके धरातल तक पहुंचेगा और वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस बार भी कुछ चौंकानेवाली जानकारी चंद्रयान-2 से मिल सकेगी।

 चांद तक पहुंचने के मिशन पर एक बार फिर से कई देश जुट गए हैं। कोल्ड वॉर के दौरान चांद पर पहुंचने के लिए जो प्रतिस्पर्धा शुरू हुई थी अब उसके 50 वर्ष हो चुके हैं। अमेरिका और रूस ने अपने मिशन मून कार्यक्रम में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। चीन और इजरायल जैसे मजबूत देश भी चांद तक पहुंचने के लिए अंतरिक्ष मिशन पर काम कर रहे हैं।

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