भसीन ने तोड़ा मिथक तो सांवला राम भी आए जद में

जनता से रिश्ता वेबडेस्क
भिलाई। जिले के कद्दावर नेता केबिनेट मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी से भिलाई नगर के प्रत्याशी प्रेमप्रकाश पांडेय मिथक नहीं तोड़ पाए। उनके साथ यह मिथक जुड़ा है कि वे दोबारा चुनाव नहीं जीतते हैं। बीते ढाई दशक का इतिहास देखें तो एकबार वे और दूसरे बार उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस के बीडी निजामी जीतते रहे हैं। हालाकि इस बार पुराने प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि भिलाई नगर के युवा महापौर देवेंद्र यादव मैदान में थे। नए और युवा चेहरे से वे पराजय हो गए।
इतिहास ने अपने आपको
को दोहराया
मंत्री पांडेय के पराजय के बाद राजनीतिक पंडित हार के कारणों की चर्चा कर रहे हैं। वहीं राजनीति के कुछ जानकार एक बार जीतने और दूसरे बार हारने वाली मिथक को अंधविश्वास करार देते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जो मिथक की बात तो नहीं करते लेकिन यह भी कहने से नहीं चूकते कि इतिहास अपने आपको दोहराता हैं। तब के युवा प्रेमप्रकाश पांडेय ने उस समय के राष्ट्रीय स्तर के यूनियन लीडर (इंटक) रवि आर्या को पराजित कर रिकार्ड बनाए थे। इतिहास कैसे अपने आपको को दोहराता है, इसे ऐसे समझ सकते हैं। यूनियन लीडर और कांग्रेस के कदाद्वर रवि आर्या को प्रेमप्रकाश पांडेय ने मात्र 32 साल में हराकर अविभाजित मध्यप्रदेश में पहली बार मंत्री बने थे। इसी तरह के इतिहास को 30 साल के देवेंद्र यादव ने साल 2018 के चुनाव में दोहरा दिया। कुछ इसी तरह का मिथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने और परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए वैशाली नगर और अहिवारा विधान सभा से भी जुड़ा हुआ है। अहिवारा विस के बारे में भी यही कहा जाता है कि वहां के विधायक दोबारा चुनाव नहीं जीत पाते हैं। यहां सबसे पहले डोमनलाल कोर्सेवाड़ा उसके बाद सांवला राम डाहरे विधायक चुने गए थे।
यह मिथक सांवल राम डाहरे के लिए सही साबित हो गया। वहीं भसीन ने मिथक तोड़कर जिले में सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकार्ड भी बना लिए हैं। यहां सबसे पहले सरोज पांडेय, फिर भजन सिंह निरंकारी विधायक चुने गए थे। भसीन दोबारा जीतने वाले पहले विधायक हैं।

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