बेटे को शव देखकर अवाक रह गया पिता

जनता से रिश्ता वेबडेस्क
दुर्ग। गया नगर निवासी 57 वर्षीय मधुकर नंदेरकर पांच दिन से अपने जिस 23 साल के जवान बेटे सचिन की तलाश कर रहा था उसका शव जिला अस्पताल के मारच्यूरी में मिला। बेटे को शव देखकर वह अवाक रह गया। दो बेटों में एक बेटे को वह पहले ही खो चुका है। सचिन उसका छोटा बेटा था। जिसे वह अपने बुढ़ापे का सहारा समझ रहा था। पांच दिन पहले सचिन का शव पुलिस का रेलवे ट्रैक पर मिला था। पुलिगांव पुलिस ने शिनाख्त न होने पर शव को मॉरच्यूरी में रखवा दिया था। मधुकर अपने बेटे का शव मॉरच्यूरी में देखकर स्तबध था। उसने सोचा हीं नहीं था कि ऐसा भी दृश्य उसे देखना पड़ेगा। उसने सोचा ही नहीं था कि वह जिस बेटे की तलाश कर रहा है उसकी मौत हो चुकी है।
बेटे की मौत ने उसे भीतर तक हिला दिया-वार्ड पार्षद लिखन साहू के समझाने के बाद वह पार्षद साहू के साथ ही मॉरच्यूरी गया। फ्रिजर खोलते ही उसकी नजर सबसे पहले शव के कपड़े पर पड़ी। कपड़ा सचिन का ही निकला। उसके बोल नहीं फूटे। उसे यकीन हो गया कि शव सचिन का ही है। बेटे की मौत ने उसे भीतर तक हिला दिया। चाह कर भी वह बेटे का चेहरे देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अन्य रिश्तेदारों और मृतक की बहन ने चेहरे को देखकर पुलिस को बताया कि मृतक सचिन ही है। शव उरला के पास रेलवे ट्रैक पर 6 जनवरी को मिला था। मोहन नगर पुलिस को शव उरला के पास रेलवे ट्रैक पर 6 जनवरी के मिला था। पुलिस ने शव को बरामद कर आसपास के लोगों से पहचान कराने का प्रयास किया। सफलता नहीं मिलने पर शव को मॉरच्यूरी में रखवा दिया। इस मामले में पुलिस ने 7 जनवरी को मर्ग कायम कर विवेचना शुरु की थी। पुलिस यही मान रही है कि युवक ट्रेन की चपेट में आया है। ट्रेन की जद में आने से उसकी मौत हुई है। पैर कट चुका था-परिजन का पता नहीं चलने के कारण पुलिस ने शव का पंचनामा भी नहीं किया था। गुरुवार को पुलिस ने शव का पंचनामा किया और अंतिम संस्कार के लिए परिजन को सौंप दिया।अंतिम संस्कार शिवनाथ नदी तट मुक्तिधाम में किया गया। ट्रेन दुर्घटना में सचिन का पैर कट चुका था। दाहिने हाथ की तीन उंगलियां भी कट गई थी। माथे पर भी चोट के निशान थे।

मनरोगी था पर इलाज के बाद स्वस्थ हो गया था
परिजनों ने बताया कि सचिन कुछ वर्ष पूर्व मनोरोग का शिकार हो गया था। इलाज के बाद वह स्वस्थ हो गया था।जब मनोरोगी था तब वह इधर उधर घुमते रहता था। तब उसे कुछ नहीं हुआ। इलाज के बाद जब उसकी स्थिति में सुधार हो गया तब वह ट्रेन की चपेट में आ गया।

5 साल के अंतराल में दूसरे बेटे की मौत
मधुकर ने बताया कि उसती तीन संतान थी। पांच वर्ष पहले बड़े बेटे राहुल (25) ने जहर खाकर आत्महत्या कर लिया था। उसने आत्मघाती कदम क्यों उठाया इसका खुलासा आज तक नहीं हुआ। वह जैसे तैसे बड़े बेटे के गम को भुलाने का प्रयास कर रहा था कि छोटे बेटे ने भी साथ छोड़ दिया। तीसरे नंबर की संतान बेटी रजनी ही उसका सहारा है। रजनी कपड़े की दुकान में सेल्स गर्ल है। मधुकर मजदूरी करता है।

पहचान न होने पर शव मॉरच्यूरी में रखवाया था
मधुकर ने रुंधे गले से बताया कि सचिन उसके घर का एकलौता चिराग था। वह उसे बुढापा का सहारा समझता था, लेकिन उसकी बदनसीबी है कि उसे बेटे को कंधा देना पड़ रहा है। समाचार पत्र में दो दिन पहले छपी खबर की जानकारी उसे गुरुवार को हई। सचिन के नहीं मिलने पर उसे मोहल्ले वालों ने सलाह दी कि मॉरच्यूरी में शव रखा है उसे एक बार संतुष्टी के लिए जाकर देख लो। मधुकर ने पहले तो इनकार किया। उसे ऐसा कहने वालों पर गुस्सा भी आया।

शिनाख्त के लिए उनके पास किसी तरह विकल्प नहीं था

विवेचक प्रधानआरक्षक कुलेश्वर ताम्रकार ने बताया कि घटना 6 जनवरी को उरला रेलवे ट्रेक पर हुई थी। 7 जनवरी को शव बरामद कर मर्ग कायम किया गया। शव शिनाख्त के लिए उनके पास किसी तरह विकल्प नहीं था। पहने हुए कपड़े में ऐसी कोई जीच नहीं मिली जिसकी मदद से वे परिजनों तक पहुंच सके। समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के बाद परिजनों ने आकर पहचान की।

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