बीएसपी को वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट ने पानी देना किया बंद

जनता से रिश्ता वेबडेस्क
पांच साल से सफाई नहीं होने से
जसेरि रिपोर्टर
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र को अपने वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट से पानी मिलना मुश्किल हो गया। दरअसल, उसके रिसाइकिलिंग पॉण्ड में 60 क्यूबिक मीटर तक शील्ट जमा हो गई, जिसकी वजह से पॉण्ड में पानी का जमाव काफी कम हो गया। हालात बिगडऩे पर प्रबंधन अब पांच साल बाद इसकी सफाई कराने जा रहा है। बीएसपी का रिसाइकिलिंग प्लांट जेपी सीमेंट प्लांट के पास है। वहां पॉण्ड में बीएसपी से निकला पानी एकत्र किया जाता है, जिसे रिसाइकिल कर पुन: उपयोग करने बीएसपी में भेजा जाता है। बीएसपी से निकलने वाले पानी में लौह कण भी होते हैं। यही लौह कण धीरे-धीरे पॉण्ड में जमा होते गए। जो अब शील्ट की मोटी परत बन गए हैं। स्थिति यह बन गई है कि शील्ट अधिक मात्रा में एकत्र हो जाने के बाद से पानी पॉण्ड के बाद बने पुल को पार कर निकल रहा था। पॉण्ड में अधिक से अधिक पानी जमा कर रिसाइकिल करने का काम यहां होता है। पानी से अधिक मिट्टी हो जाने से यह काम प्रभावित होने लगा है।
इस तरह करते हैं रिसाइकिल: कारखाना से आने वाले गंदे पानी को तीन कच्चे डेम से गुजारा जाता है, इससे मोटे पत्थर, कण एक-एक कर तीसरे डेम में पहुंचने तक तले पर बैठ जाते हैं। जिससे पानी उद्योग में उपयोग होने के लायक फिर हो जाता है। यह तीनों डेम ही पत्थर, मिट्टी से भर चुका है।
65 लाख की लागत से होगी सफाई: बीएसपी पॉड में एकत्र हुए 60 क्यूबिक मीटर शील्ट को निकलवाने का काम शुरू कर दिया है। इसमें करीब 65 लाख रुपए तक खर्च आना है। इस काम को पूरा होने में तकरीबन दो माह लगेंगे। इस कार्य को पॉकलैंड, जेसीबी, डोजर व हाइवा की मदद से किया जा रहा है। कयास लगाया जा रहा है कि कम से कम यहां से 6 हजार ट्रक मिट्टी निकाली जाएगी, तब जाकर यह साफ हो पाएगा।
60 माह बाद की जा रही है साफ: बीएसपी प्रबंधन ने इसके पहले पॉण्ड की सफाई 2014 में करवाई थी। अब फिर एक बार सफाई का काम बारिश से पहले शुरू किया गया है। गर्मी खत्म होने से पहले सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। दो माह में काम पूरा कर लेने की कोशिश की जा रही है।
बीएसपी में उत्पादन के लिए 24 घंटे वाटर रिसाइकिलिंग: भिलाई इस्पात संयंत्र में मौजूद मरोदा-1 जलाशय के पानी का उपयोग औद्योगिक कार्य के लिए किया जाता है। इसे संयंत्र के फर्नेस, कूलिंग बेड वगैरह में भेजा जाता है। जहां पानी की 24 घंटे जरूरत पड़ती है। फर्नेस को चारों ओर से ठंडा यह पानी ही रखता है। संयंत्र के भीतर पानी कई पाइप में हर समय दौड़ता रहता है। इसका उपयोग पीने के लिए नहीं किया जाता है। संयंत्र में हर साल करीब 2.2 टीएमसी पानी उत्पादन में खपत होता है।
उत्पादन के साथ बढ़ रहा पानी का खर्च: बीएसपी प्रबंधन और तात्कालीन मध्य प्रदेश सरकार के बीच कारखाना संचालित करने व आवासों में रहने वाले कर्मियों की आपूर्ति के लिए 4 टीएमसी पानी देने को लेकर अनुबंध हुआ था। सरकार हर साल इतना पानी बांध से बीएसपी को देती है। अब विस्तार योजना पूरी होने के बाद उत्पादन बढ़ रहा है, इसके साथ-साथ पानी का उपयोग भी बढ़ रहा है। इसके लिए बीएसपी को विस्तर योजना पूरी हो जाने के बाद दो टीएमसी पानी की जरूरत पड़ेगी। बीएसपी को अब 6 टीएमसी पानी चाहिए।
नए पाइप का कर रहे उपयोग: प्रबंधन अब रिसाइकिल प्लांट से कारखाना तक करीब 1 किलोमीटर नए पाइप लाइन को बिछा दिया है। इस पाइप लाइन का डाया 1000 है। इसके बिछ जाने के बाद से बीएसपी से उपयोग होकर निकलने वाले पानी को फिर रिसाइकिल कर वापस संयंत्र भेजा जा रहा है। इससे हर दिन बड़ी मात्रा में पानी की बचत हो रही है। इसके पहले लगा पाइप पतला था।
सीवरेज वाटर का भी किया जा रहा उपयोग: बीएसपी ने 30 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है, जिसमें टाउनशिप के घरों से निकलने वाले सीवरेज के पानी को पंप से 30 एमएलडी भेजा जाता है। वहां इस सीवरेज के पानी को फिल्टर कर मरोदा-1 के जलाशय में डाला जाता है।
यह पानी औद्योगिक उपयोग में लिया जा रहा है।

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