बाबरी मस्जिद ढांचे पर चढ़कर तोड़ा, अब राम मंदिर बनाएंगे – साध्वी प्रज्ञा ठाकुर

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-  भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने हाल ही में 26/11 मुंबई हमले के जिक्र के दौरान मुंबई के तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया था कि उन्होंने करकरे से कहा था कि तुम्हारा सर्वनाश होगा। इसके बाद प्रज्ञा की टिप्पणी पर खूब विवाद हुआ। यह विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि साध्वी प्रज्ञा ने अब एक और ‘बड़बोला’ बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है।साध्वी ने अब कहा है कि वह न सिर्फ बाबरी मस्जिद के ऊपर चढ़ी थीं बल्कि उसे गिराने में भी मदद की थी। चुनाव आयोग ने भी तुरंत ऐक्शन लेते हुए साध्वी प्रज्ञा को चुनाव संहिता का उल्लंघन करने के लिए नोटिस थमा दिया। इतना ही नहीं, मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी एल कांता राव ने चेतावनी देते हुए सभी राजनीतिक दलों को एक सलाह भी जारी की। उन्होंने कहा, ‘बार-बार चुनाव और आचार संहिता के उपयोग और उपयोग के मॉडल कोड का उल्लंघन
व अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने की वजह से कड़ी कार्रवाई हो सकती है।’

‘मैंने ढांचे पर चढ़कर उसे तोड़ा था’
साध्वी प्रज्ञा ने शनिवार को भोपाल में कैंपेन के दौरान एक टीवी चैनल पर बाबरी मस्जिद को लेकर यह टिप्पणी की और इसकी वजह से एक बार फिर बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना राजनीतिक गलियारों में ताजा हो गई। टीवी चैनल से साध्वी प्रज्ञा ने कहा था, ‘राम मंदिर निश्चित रूप से बनाया जाएगा। यह एक भव्य मंदिर होगा।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह राम मंदिर बनाने के लिए समयसीमा बता सकती हैं, तो प्रज्ञा ने कहा, ‘हम मंदिर का निर्माण करेंगे। आखिरकार, हम ढांचा (बाबरी मस्जिद) को ध्वस्त करने के लिए भी तो गए थे।’
साध्वी प्रज्ञा ने बाबरी मस्जिद में अपनी अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा, ‘मैंने ढांचे पर चढ़कर तोड़ा था। मुझे गर्व है कि ईश्वर ने मुझे अवसर दिया और शक्ति दी और मैंने यह काम कर दिया। अब वहीं राम मंदिर बनाएंगे।’

राजनीतिक पार्टियों के लिए अडवाइजरी जारी

साध्वी के इस बयान के चंद घंटों के अंदर ही चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस थमा दिया। नोटिस दिए जाने से पहले सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए एक अडवाइजरी भी जारी की गई थी, जिसमें कहा गया, ‘एक-दूसरे के प्रति जो ढेरों शिकायतें मिल रही हैं वे इस ओर साफ-साफ इशारा कर रही हैं कि नेता भड़काऊ और विवादित बयान दे रहे हैं, जिससे समाज में नफरत और असंगति फैल सकती है।

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