फिल्मों में शानदार गीत देने वाले आनंद बख्शी ने किया था सेना में काम, लिखे ह‍िंदी स‍िनेमा में 4000 गाने

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:  बॉलीवुड में 70 के दशक में अमर प्रेम, कटी पतंग और खिलौना जैसी फिल्मों में शानदार गीत देने वाले आनंद बख्शी ने शानदार गीत लिखे. उनका जन्म 21 जुलाई 1930 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. बचपन से ही आनंद जी का लक्ष्य था फिल्म इंडस्ट्री में आना और उन्होंने परिवार की इजाजत के बगैर आर्मी ज्वाइन कर ली जिससे की आनंद मुंबई आ सकें. लेकिन आर्मी में उनका करियर ज्यादा दिन नहीं चल पाया क्योंकि भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उन्हें परिवार के साथ लखनऊ जाकर रहना पड़ा. इस दौरान उनकी लेखनी भी ठीक तरह से नहीं हो सकी लखनऊ में आनंद एक टेलीफोन ऑपरेटर का काम भी किया करते थे. उसके बाद दिल्ली जाकर एक मोटर मैकेनिक का काम भी उन्होंने किया. दिल्ली के बाद आनंद का मुंबई आना जाना रहता था और उसी दौरान 1958 में उनकी मुलाकात एक्टर मास्टर भगवान से हुई. उन्होंने आनंद को ‘भला आदमी’ फिल्म के लिए गीत लिखने का काम दिया. फिल्म ‘भला आदमी’ के बाद भी आनंद को अगली फिल्म के लिए कई साल का इंतजार करना पड़ा और चार साल बाद 1962 में ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’ फिल्म मिली फिर 1965 में ‘जब जब फूल खिले’ फिल्म ऑफर हुई. दोनों फिल्मों को सूरज प्रकाश बना रहे थे.आनंद बख्शी का नाम 1967 की फिल्म ‘मिलान’ के बाद काफी फेमस हो गया और उसके बाद एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट आनंद को मिलने लगे. उसके बाद आनंद बख्शी ने एक से बढ़कर एक फिल्में ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘एक दूजे के लिए’ ‘अमर प्रेम’ और ‘शोले’ जैसी फिल्में के लिए भी लिखा.आनंद बख्शी ने राज कपूर की फिल्म ‘बॉबी’, सुभाष घई की ‘ताल’ और अपने दोस्त यश चोपड़ा की फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के लिए भी गीत लिखे. साहिर लुधियानवी के अलावा आनंद बख्शी ही एक ऐसे गीतकार थे जो अपने गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान मौजूद रहते थे और लगभग 4000 गाने उन्होंने लिखे हैं साथ ही आनंद बख्शी ने 1973 की फिल्म ‘मोम की गुड़िया’ में लता मंगेशकर के साथ गाना भी गाया है. आनंद बख्शी साहब की बीमारी के चलते 30 मार्च 2002 को 71 साल की उम्र में मृत्यु हो गई.

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