प्राइस वॉटरहाउस ऐंड कंपनी (PwC) ने रिलायंस कैपिटल और रिलायंस होम के बहीखातों पर उठाए सवाल

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- प्राइस वॉटरहाउस ऐंड कंपनी (PwC) ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को रिलायंस कैपिटल और रिलायंस होम फाइनैंस के बहीखातों में कुछ कथित गड़बड़ियों की जानकारी दी है। इन दोनों कंपनियों और ग्रुप की दूसरी कंपनियों के बीच लेनदेन में कथित तौर पर फंड डायवर्जन का पता चला है। PwC ने मंत्रालय से कहा है कि जून 2019 में खत्म पहली तिमाही में जब वह इन कंपनियों का ऑडिट कर रही थी, तब उसे इन गड़बड़ियों का पता चला। सूत्रों ने बताया कि इसी वजह से PwC ने दोनों कंपनियों के ऑडिट का काम छोड़ दिया और उसने इसकी वजह कंपनी मामलों के मंत्रालय को बता दी है।इस मामले से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि ऑडिटर ने कुछ महीने पहले कंपनी के सामने ये मामले उठाए थे और तब दोनों पक्षों के बीच इस पर चर्चा हुई थी। PwC को कुछ रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस को लेकर कथित तौर पर आपत्ति है, जिस पर रिलायंस कैपिटल उसे मैनेजमेंट लेटर जारी करने को तैयार था। एक सूत्र ने बताया, ‘ऑडिटर ग्रुप कंपनियों के बीच कुछ लेनदेन पर तस्वीर साफ किए जाने की मांग कर रहा था।’

अनिल अंबानी की कंपनी ने बुधवार की सुबह स्टॉक एक्सचेंजों को PwC के इस्तीफे की जानकारी दी। रिलायंस कैपिटल ने कहा कि कुछ ‘ऑब्जर्वेशंस और ट्रांजैक्शंस’ पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने को ऑडिटर ने इस्तीफे की वजह बताया है। रिलायंस कैपिटल का कहना है कि इस्तीफे के लिए PwC ने जो वजहें बताई हैं, वह उससे असहमत है। उसने कहा कि ऑडिटर ने जो भी डिटेल मांगी थी, कंपनी ने उसे मुहैया कराई। खासतौर पर सर्टिफिकेशन और ट्रांजैक्शन के कंफर्मेशन को लेकर।
कंपनी ने बुधवार की शाम एक अन्य स्टेटमेंट में इकनॉमिक टाइम्स से कहा, ‘बदलाव की वजह PwC का इस्तीफा है, जो एक ऑडिटर थी। उसने कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 का ऑडिट करते वक्त उसने कुछ ऑब्जर्वेशंस और ट्रांजैक्शंस नोटिस किए। PwC का कहना है कि ये उसे संतोषजनक नहीं लगे। उसका मानना है कि ये फाइनैंशल स्टेटमेंट्स के लिए शायद महत्वपूर्ण हो सकते हैं और उसे इनसे जुड़े सवालों को संतोषजनक जवाब नहीं मिला।’

इकनॉमिक टाइम्स को दिए स्टेटमेंट में PwC ने इस मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया। कंपनी ने बताया कि वह क्लाइंट्स से जुड़े मामलों पर प्रतिक्रिया नहीं देती। रिलायंस ने यह भी कहा है कि वह PwC के खिलाफ लीगल ऐक्शन लेने पर विचार कर रही है। रिलायंस का कहना है कि वह PwC से सहमत नहीं है। उसने कहा, ‘कंपनी ने ऑडिटर के कई सवालों और लेटर का जवाब दिया और 12 जून 2019 को ऑडिट कमेटी की मीटिंग भी बुलाई। यह मीटिंग PWC के 14 मई के लेटर का जवाब देने के लिए बुलाई गई थी। कंपनी उम्मीद कर रही थी कि PwC ऑडिट कमेटी की मीटिंग में शामिल होगी। इसलिए उसके इस्तीफा देने की वजह समझ में नहीं आती।’ उसने कहा कि जहां तक लीगल ऐक्शन की बात है, कानूनी सलाह मिलने के बाद हम इस बारे में फैसला करेंगे। कंपनी अपने सभी स्टेकहोल्डर्स के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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