वाराणसी : पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा, अब देगी दो लाख मुआवजा

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- वाराणसी : मानवाधिकार आयोग ने अवैध पुलिस हिरासत मामले में दो लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुआवजा राशि एक डीएसपी के वेतन से वसूलकर दो सगे भाइयों को दी जाएगी। मामला साल 2015 का है। वाराणसी के वरुणा पुल इलाके में रहने वाले सगे भाई शंकर यादव और बलराम यादव को तत्‍कालीन कैंट थाना प्रभारी और वर्तमान में डीएसपी रतन सिंह यादव ने 14 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा था। आरोप था कि फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर इंस्‍पेक्‍टर ने उनकी जमीन अपने नाम लिखाने का दबाव बनाया। वॉट्सऐप पर वायरल हुए मेसेज से मामला संज्ञान में आने पर तत्‍कालीन एसएसपी आकाश कुलहरि ने दोनों भाइयों को कैंट थाने से निकालकर घर भेजा था। मानवाधिकार जन निगरानी समिति के महासचिव डॉ. लेनिन रघुवंशी ने इस प्रकरण की शिकायत राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी। आयोग को पुलिस की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, तत्‍कालीन इंस्‍पेक्‍टर रतन सिंह यादव दोनों भाइयों को अवैध हिरासत में रखने के दोषी पाए गए जिसके चलते दंड स्‍वरूप उनकी चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है। लेनिन रघुवंशी ने दोनों भाइयों के मानवाधिकार उल्‍लंघन के लिए मुआवजे की मांग की है। राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर प्रदेश के गृह (मानवाधिकार) अनुभाग के अनु सचिव ने वाराणसी के एसएसपी को पत्र भेजा है। इसमें दोषी पुलिसकर्मी के वेतन से दो लाख रुपये काटकर दोनों भाइयों को देने को कहा गया है। भुगतान से संबंधित साक्ष्‍य दस दिन के भीतर मानवाधिकार आयोग और प्रदेश सरकार को भेजना है।