पुलिसकर्मी हो चुके हैं उग्र, बोले- मांगें पूरी नहीं होने पर चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :  रायपुर. सोशल मीडिया में पुलिसकर्मी उग्र हो चुके हैं. हालाँकि जमीनी स्तर पर किसी प्रकार की विरोध की बात अब तक सामने नहीं आई है. पुलिसकर्मियों ने अपनी मांगों का मैदान मानो सोशल मीडिया को ही समझ लिया है. पुलिसकर्मियों का कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने पर चुनाव का बहिष्कार करने ऐलान कर दिया है.साथ ही इस बार चुनाव में एक वोट भी नहीं देने की अपील की जा रही है. पुलिसकर्मी सोशल मीडिया में इस तरह की कई पोस्ट जमकर वायरल कर रहे हैं. शिक्षाकर्मियों की संविलियन करने की घोषणा के बाद ही पुलिसकर्मियों की पेट में भी मरोड़ें शुरू हो चुकी है. सैकड़ों पुलिसकर्मियों का हाजमा बिगड़ चुकी है तो हजारों पुलिसकर्मियों की रातों की नींद उड़ चुकी है.पुलिसकर्मियों ने भी अब सोशल मीडिया में संविलियन की मांग का बिगुल फूंक दिया है. वहीँ कई पुलिसकर्मियों ने मांगों की लम्बी फेहरिस्त जारी कर दी है. शिक्षाकर्मियों की संविलियन सुनने के बाद पुलिसकर्मी भी मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखने लग गए हैं. कई वायरल पोस्ट तो ऐसे हैं जिसमें 25 जून को सीएम हॉउस की घेराव करने की बात कही जा रही है. कुछ वायरल पोस्ट हम यहाँ हुबहू प्रकाशित कर रहे हैं…रायपुर चलो,रायपुर चलो……..
आजादी के बाद भी रखा गया है,पुलिसकर्मियों को गुलाम……
पुलिस परिवार के सभी भाइयों एवं वर्तमान में पुलिस विभाग में भर्ती होने वाले भाइयों व उनके परिवार से अनुरोध है कि पुलिस विभाग के वेतन अवकाश,आवास और अन्य सुविधाओं से वंचित रखा गया है जिसे पुलिस विभाग सालों से भुगत रहा है और नये भर्ती होने वालो के साथ ऐसा न हो,इसलिए आप और आपके परिवार से अनुरोध है कि सी.एम.हाऊस के घेराव में सहयोग प्रदान करें समर्थन करें दिनांक 25/06/2018/ को रायपुर में एम.हाऊस का घेराव कर सहयोग प्रदान करें माँग पुरा न होने पर वोट न देकर चुनाव का बहिष्कार करें।
निवेदन..
पुलिस परिवार.

बिना पुलिस के चल कर देखो

हरिवंशराय बच्चन की यह कविता सभी पुलिस भाइयो को समर्पित-

माना कि है पुलिस बुरी,
पर बिना पुलिस के रहकर देखो।
रोकेंगे हर राह दरिंदे,
बिना पुलिस के चलकर देखो।।

कोई नहीं समय सीमा है,
कोई नहीं ठिकाना है।
जहाँ जहाँ भी पड़े जरूरत, वहां वहां भी जाना है।।

दिन को ड्यूटी रात को पहरा,
एक रात तो करकर देखो।
बिना पुलिस के चलकर देखो।।

इनका वेतन चपरासी सा, काम हमेशा करना है।
गर्मी जाड़ा बारिश में भी,
भाग भाग कर मरना है।।
बिना पुलिस के चलकर देखो।।

छुट्टी तक को तरस रहे हैं, अफसर के दरवाजे पर।
पोस्टमार्टम इन्हें कराना,
रहते रोज जनाज़े पर।।

राजनीति के हथकण्डे से, कभी कभी तो बचकर देखो।
बिना पुलिस के चलकर देखो।।

ये भी लाल लाडले माँ के, इनके भी परिवार रहे।
होली ईद दशहरा पर भी, इनके आंसू रोज बहे।।

बात अगर हो लाख टके की, इनकी पीड़ा मिलकर देखो।
बिना पुलिस के चलकर देखो।।