पखांजुर: कापसी के प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र का डॉक्टरों की कमी से हुआ बुरा हाल

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :-   पखांजुर।  कापसी अंचल के आसपास के ग्रामीणों को स्वस्थ्य उपचार के लिए बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी है। कमी के वजह से मरीजों को कड़ी परेशानी से जूझना पढ़ रहा है । एक महिला सहायक चिकित्सा अधिकारी प्रीति लाता दास के भरोसे से अस्पताल चलाई जा रही है। पुरुष मरीज डॉक्टर को अपनी परेशानी बताने में हिचकिचाते है। बता दे कि सरकारी अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आज तक एमबीबीएस डिग्री धारी चिकित्सक की स्थायी पदस्थापना नही हुई। ग्रामीणों की मांग है कि कापसी के प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र में फुलप्लेसमेन्ट एक एमबीबीएस डाक्टर की नियुक्ति की जाए। साथ ही वर्तमान में महिला सहायक चिकित्सा अधिकारी प्रीतिलता का स्थानातरण कापसी अस्पताल से हो जो काफी लंबे दिनों से अस्पताल में जमी हुई है उनके जगह एक पुरुष एमबीबीएस डाक्टर की नियुक्ति की मांग ग्रामीणों ने की है।

बता दें कि में एक ही महिला सहायक चिकित्सा अधिकारी प्रीतिलता दास की ड्यूटी सप्ताह में वेलनेस सेंटर पीवी 34 में 2 दिन लगाई गयी है । साथ ही सरकारी काम काज ट्रेनिंग के वजह से भी अक्सर बाहर रहती है। ऐसे समय मानो अस्पताल भगवान भरोसे ही संचालित होती है। मरीजो को सीधे पखांजुर सिविल अस्पताल जाने की नशीहत कर्मचारियो द्वारा दी जाती है । बता दे कि मरीज रामकृष्ण मण्डल ने बतलाया कि वह स्लाइन बॉटल चढ़ाने कापसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गया हुआ था उसे मैडम नही है बतलाकर महिला चिकित्सक के पति जो अस्पताल में कंपाउंडर के पद पर कार्यरत है उनके द्वारा कहा गया कि स्लाइन लगाने पखांजुर सिविल अस्पताल जाने की सलाह दी गयी।बता दे कि ऐसे में लोग सरकारी अस्पताल में न जाकर प्राईवेट अस्पताल में उपचार कराने में ज्यादा रुचि दिखा रहे है। जबकी सरकार लोगो को बेहतर स्वस्थ्य लाभ देने के लिए अस्पताल का संचालन करते हुए इसके स्टाफों को वेतन दे रही है और लोग डॉक्टरों किं कमी के वजह से लाभ लेने से वंचित हो रहे है। यह विषय सोचनीय है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल दवा पट्टी तक ही सीमित रह गया है।

विधायक अंतागढ़ अनूप नाग से कापसी के व्यापारी संग ने नियमित एमबीबीएस डाक्टर की मांग की थी लेकीन एमबीबीएस तो दूर की बात एक ढंग के छोटे मोटे डॉक्टर की नियुक्ति भी सरकार ने इस अस्पताल में नही की । दवा पट्टी मरहम के लिए ही मानो अस्पताल केवल खुली हुई है ।लोग स्थानीय बाजारों से मेडिकल शॉप पैथोलॉजी से मलेरिया होने पर की रक्तजांच कराना पसंद करते है लेकिन सरकारी अस्पताल में तो टाइफाइड के अलावा कुछ रिजल्ट आता ही नही । मरीजो के बिस्तर खाली प?े हुए है और निजी अस्पतालों में मरीजो का उपचार होते देखे जा रहे। ग्रामीण कनाई कुमार ,जोहान गावड़े , विप्लव मिस्त्री ,बलाई तालुकदार निताई मंडल ने बतलाया कि अस्पताल में जाने से स्टाफ नही , तो मैडम नही है ,तो कंपाउंडर नही है घर गया है अभी आएगा जैसे बहाने बाजी मारा जाता है जिससे त्रस्त होकर मैं परिवार के लोगो को लेकर निजी मेडिकल में ही उपचार करवाता हु भले ही थोड़ा पैसे खर्च हो लेकिन जल्द बेहतर स्वस्थ्य लाभ देखने को मिलता है।बता दें कि पूर्व में परलकोट के धुरी में कापसी अस्पताल का नाम काफी उज्ज्वल रहा , लेकिन वर्तमान कुछ सालो से इसका स्तर बत से बत्तर हालत में है। जो धीरे धीरे अपना वजूद खोता जा रहा है।एम्बुलेंस नहीं,सड़क दुर्घटना केस में भी लोग सीधे पखांजुर सीवील अस्पताल का रुख करते है । फस्ट ट्रीट करने में भी लोग अस्प्ताल से दूर है इसका कारण कुछ स्पष्ट बताया नही जा सकता, सरकार करोड़ों रुपए फूक रही है लेकिन लोगो को स्वस्थ्य सुविधा का आखिर लाभ क्यों नही मिल पा रहा ।इसका जिम्मेदार कौन है।
ग्रामीण सौपेंगे स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन-प्रीति लता दास का स्थान्तरण करने की मांग को लेकर ग्रामीण स्वस्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव् को ज्ञापन सौपेगे ।
रात को अस्पताल चौकीदार के भरोसे-अस्प्ताल का ताला अंदर से जड़ा हुआ होता है मरीज आकर चिल्लाने पर कोई सुध लेने वाला दरवाजा नही खोलता है।                                                                                             स्वास्थ्य मंत्री को समस्या से अवगत करवाया था- मंतूराम पवार ने बताया कि मैंने स्वम पहले जब भाजपा की प्रदेश में सरकार थी तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री को समस्या से अवगत करवाया था अब कांग्रेस सरकार है सरकार समस्या पर ध्यानकेन्द्रित कर एमबीबीएस डाक्टर की नियुक्ति करे।                                                                     विकास वैध-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी