नान घोटाला: जांच की आंच ‘एमजीएम’ तक पहुंची…

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-

ईओडब्ल्यू अस्पताल के फंड की जांच कराएगी
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। नान घोटाले में नान के तकनीकी एक्सपर्ट चिंतामणी की भूमिका कई मायनों में सवालों के दायरे में है। अफसरों को उम्मीद है कि नान में होने वाले घपलों से जुड़ी कई अहम जानकारियां चिंतामणी से मिलेगी। इतना नहीं चिंतामणी कुछ ऐसी संस्थाओं में भी सक्रिय सदस्य रह चुका है, जो अचानक ही जांच के घेरे में हैं। उसमें भी चिंतामणी की भूमिका को खंगाला जा रहा है।
इसके साथ ही नान घोटाले की जांच आइपीएस मुकेश गुप्ता के अस्पताल एमजीएम तक पहुंच गई है। एसपी ने बताया कि चिंतामणि चंद्राकर को पूछताछ के लिए छह बार नोटिस दिया गया है। उनकी मां ने नोटिस लिया है, लेकिन अब तक वे जांच में शामिल नहीं हुए हैं। इधर, डीएसपी आरके दुबे ने भी 15 मार्च तक की छुट्टी के लिए अर्जी लगाई है। दुबे ने भी स्वास्थगत परेशानियों का हवाला देकर छुट्टी की अर्जी दी है।
ईओडब्ल्यू के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो चिंतामणि चंद्राकर ने तबीयत खराब होने का हवाला दिया है। उसने दुर्ग पुलिस में यह शिकायत दर्ज कराई है कि कांकेर में ड्यूटी के दौरान उसे ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने अपहरण कर रायपुर लाया। चंद्राकर ने अपने आरोप में यह कहा है कि इस घटना से मैं स्तब्ध हूं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ गया है और कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं। चिंतामणि चंद्राकर और आरके दुबे ने दुर्ग के डाक्टर गुरुनाथ का मेडिकल सर्टिफिकेट ईओडब्ल्यू को दिया है।
नान घोटाले में ईओडब्ल्यू ने 2015 में जब छापा मारा तो चिंतामणि चंद्राकर रायपुर में पदस्थ थे। नई सरकार बनने के बाद उनका तबादला कांकेर किया गया। यहां वे नान के जिला प्रबंधक है। नान डायरी में चिंतामणि का नाम सामने आया था। ईओडब्ल्यू के आला अधिकारियों ने बताया कि चिंतामणि नान के जिला प्रबंधक रहने के दौरान एमजीएम में भी ट्रस्टी बन गया था।
एमजीएम के ट्रस्टियों की होगी फोरेंसिक चार्टर्ड जांच : ईओडब्ल्यू ने दिल्ली की फोरेंसिक चार्टर्ड एकाउंटेंट की टीम से एमजीएम अस्पताल के फंड की जांच कराने का निर्णय लिया है। ईओडब्ल्यू ने लीगल एक्सपट्र्स की टीम के साथ बैठकर यह तय किया है कि सभी ट्रस्टियों की संपत्ति की फोरेसिंक चार्टर्ड एकाउंटेट से जांच कराई जाएगी। साथ ही जांच के लिए प्रवर्तन निदेशाल (ईडी) को भी
पत्र लिखेगी।
डीएसपी दुबे का मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के घेरे में : ईओडब्लू में नान घोटाले में अवैध फोन टेपिंग के मामले में अफसरों के खिलाफ बयान देकर मुकरने वाले डीएसपी आरके दुबे का मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के घेरे में आ गया है। उन्होंने भिलाई के एक डाक्टर का सर्टिफिकेट पेश कर छुट्टी मांगी है। नान घोटाले की जांच में पूछताछ़ के लिए वांटेड चिंतामणी ने भी उसी डाक्टर का सर्टिफिकेट दिया है। इस वजह से सर्टिफिकेट को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अफसरों ने उनका सर्टिफिकेट अभी मंजूर तो नहीं किया अलबत्ता हाजिर होने का नोटिस जरूर जारी कर दिया है।
अफसरों के अनुसार डीएसपी आरके दुबे को कोर्ट ने नान घोटाले में सामने आ रहे तथ्यों की जांच में मदद करने को कहा है, लेकिन वे ऑफिस ही नहीं आ रहे हैं। इससे नान घोटाले में अवैध टेपिंग की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। उसी मामले में सहयोग के लिए दुबे को ऑफिस बुलाया जा रहा है। वे नहीं आ रहे हैं। अफसरों के अनुसार अवैध टेपिंग की जांच आगे बढ़ाने के लिए ही उन्हें नोटिस जारी कर बुलाया गया है। इस बीच उनके मेडिकल सर्टिफिकेट पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। उनका और नान के आईटी स्टाफ चिंतामणी का मेडिकल सर्टिफिकेट भिलाई के डा. गुरुनाथन ने जारी किया है। अफसरों का कहना है कि इस बारे में जांच की जा रही है, क्योंकि चिंतामणी लंबे से समय से ईओडब्लू में बयान देने नहीं आ रहा है। उसे अब तक 8 से ज्यादा नोटिस जारी किया जा चुका है। चिंतामणी के बयान से अफसरों को नान घोटाले की जांच में नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है। इस वजह से इतने नोटिस जारी किए गए, यहां तक कि उसके घर पर भी चस्पा किया जा चुका है, फिर भी वह बयान देने नहीं पहुंचा।
आईएफएस कौशलेंद्र से ईओडब्लू ने मांगा 2011 से 2014 का हिसाब : पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की जिम्मेदारी संभाल रहे आईएफएस कौशलेंद्र सिंह शनिवार को तीन घंटे ईओडब्लू ऑफिस में सवालों में घिरे रहे। अफसरों ने उनसे 2011 से 2014 के बीच नागरिक आपूर्ति निगम के कामकाज की जानकारी मांगी। उस समय अनाज के परिवहन का ब्योरा मांगा। साथ ही सुविधा शुल्क के रूप में ली जाने वाली रकम के बारे में पूछताछ की। आईएफएस सिंह ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा अभी उनके पास किसी भी तरह का डेटा नहीं है। उन्होंने नान का डेटा देने के लिए अफसरों से समय मांगा है। सिंह नान में करीब तीन साल साल तक एमडी के पद पर पदस्थ थे। नान घोटाला फूटने के बाद से ही इस बात की चर्चा है कि वहां सुविधा शुल्क और परिवहन में गोलमाल 2011 से ही शुरु हुआ था। इस वजह से तत्कालीन एमडी रहे सिंह को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

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