नंगे पैर पैदल चलने से जानिए अद्भुत फायदे

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-  वाशिंगटन सैंडल-जूतों का ईजाद मनुष्यों के जीवन में किसी क्रांतिकारी बदलाव जैसा ही रहा है। 40 हजार साल पहले जब मनुष्यों ने पहली बार सैंडल का प्रयोग शुरू किया होगा, उस समय के मानवों के लिए यह किसी उपलब्धि से कम नहीं रहा होगा। आज स्थिति यह है कि हर व्यक्ति इनका प्रयोग कर रहा है। शायद ही कोई ऐसा हो, जिसका इनसे कोई परिचय नहीं हो। हालांकि अब इनके प्रयोग पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या हमेशा जूतों का इस्तेमाल सेहत के लिए सही है। कई प्रयोगों में सामने आ चुका है कि पैर में जूते पहनकर चलने से हमारी चाल प्रभावित होती है। इससे इस बात पर भी प्रभाव पड़ता है कि हमारे पैर धरती से किस तरह संपर्क में रहेंगे। हर बढ़ते कदम के साथ पड़ने वाला दबाव भी जूतों के कारण बदल जाता है।

मानव स्वभाव है चलते रहना -: चलना और दौड़ना मानवजाति के जीवन का आधार है। आदिकाल से ही जंगली जानवरों के शिकार के लिए उनके पीछे दौड़ना या फिर पीछे पड़े जानवर से बचने के लिए दौड़ लगा देना, मनुष्यों की जरूरत रही है। आज की तारीख में कैसे भी रास्ते पर हम आसानी से दौड़ लगा देते हैं। कहीं भी आने-जाने या चलने में हमें परेशानी नहीं होती। इसकी बड़ी वजह हैं जूते या चप्पल। सवाल यह है कि जब मनुष्य ने जूतों का आविष्कार नहीं किया था, तब उनके पैरों की सुरक्षा कैसे होती थी।

प्रकृति देती थी रक्षा कवच -: इसका जवाब प्रकृति की व्यवस्था में छिपा है। नंगे पैर चलने वाले मनुष्यों को प्रकृति सुरक्षा कवच देती थी। ऐसे लोगों के लिए प्रकृति की व्यवस्था यही थी कि उनकी एड़ी और तलवे के हिस्से की त्वचा बहुत सख्त हो जाती थी। यह मोटी त्वचा ही नंगे पैर चलने-दौड़ने पर भी उन्हें दर्द का एहसास नहीं होने देती थी।

अब भी कारगर है यह कवच -: पैरों को सख्त बना देने की प्रकृति की इस व्यवस्था को समझने के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डेनियल लिबरमैन ने व्यापक शोध को अंजाम दिया। उन्होंने केन्या में 81 स्थानीय महिलाओं व पुरुषों को इस शोध में शामिल किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग लगातार पैदल चलते रहते हैं, उनके पैरों के निचले हिस्से की त्वचा अन्य हिस्सों की त्वचा की तुलना में 25 से 30 फीसद ज्यादा मोटी हो जाती है। इस मोटी त्वचा का लाभ यह है कि व्यक्ति को पैदल चलते समय भी छोटे-मोटे कंकर पत्थर से दर्द का अनुभव नहीं होता है।

क्या संवेदनहीन हो जाती है त्वचा -: त्वचा के मोटे हो जाने की इस प्रक्रिया को देखकर मन में यह सवाल उठता है कि क्या यह त्वचा संवेदनहीन हो जाती है। वैज्ञानिकों को इस मामले में भी चौंकाने वाले नतीजे मिले। यह त्वचा विशेष तरीके से संवेदनशील होती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे लोग जब कहीं नंगे पैर चलते हैं, तो यह त्वचा उन्हें कंकर-पत्थर का एहसास नहीं होने देती है, लेकिन धरती के छूने का उन्हें आसानी से अनुभव होता है। इस कारण से त्वचा मोटी होने के बाद भी ऐसे लोगों को चलते समय संतुलन बनाने में कोई परेशानी नहीं होती है।

कभी-कभी नंगे पैर चलना जरूरी -: इन नतीजों को देखते हुए वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां भी संभव हो, लोगों को नंगे पैर चलने का प्रयास करना चाहिए। हमेशा जूते-चप्पल पहनने से पैर के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबी अवधि में यह कई तरह की परेशानियों का कारण बन जाता है। हरी घास पर सुबह की ओस में नंगे पैर चलने के कई फायदे पहले भी सामने आ चुके हैं।                                                                                                1-  सबसे पहला फायदा तो यह है, कि दिनभर आप अपने पैर जूते या चप्पलों से पैक रखते हैं, ऐसे में नंगे पैर खुली हवा में रहने से, पैरों को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है, रक्त संचार बेहतर होता है, जि‍ससे उनकी थकान या दर्द खत्म हो जाता है।
2-  नंगे पैर पैदल चलने से वे सारी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती है, जिनका उपयोग जूते-चप्पल पहनने के दौरान नहीं होता। मतलब आपके पैरों के अलावा, उससे जुड़े सभी शारीरिक भाग सक्रिय हो जाते हैं।                                    3-  नंगे पैर पैदल चलते वक्त, आपके पंजों का निचला भाग सीधे धरती के संपर्क में आता है, जिससे एक्युप्रेशर के जरिए सभी भागों की एक्सरसाईज होती है, और कई तरह की बीमारियों से निजात मिलती है।
4 -प्राकृतिक तौर पर धरती की उर्जा पैरों के जरिए आपके पूरे शरीर में संचारित होती है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे आपको भूमि तत्व से संबंधित रोग नहीं होते।
5 -दिनभर जूते-चप्पल पहनकर आप चलने में जरूर संतुलन बनाए रखते हैं, परंतु नंगे पैर चलना आपके शरीर की सभी इंद्रियों के संतुलन की प्राकृतिक चेतना को बरकरार रखने में मदद करता है।