देवशयनी एकादशी, बन रहे हैं तीन बड़े संयोग

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- हिंदू धर्म में सबसे उत्तम माने जाने वाला व्रत देवशयनी एकादशी का होता है जो हर साल आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की तिथि को किया जाता है. इस बार ये तिथि 12 जुलाई को पढ़ रही है. इसे पद्मानाभा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयानी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.

क्या है इसका महत्व

देशवयनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत रखने से उत्तम फल मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है. पुराणों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु 4 महीने के लिए विश्राम करने क्षीर सागर में चले जाते है. 4 महीने तक भगवान विष्णु के निद्रा की मुद्रा में रहने के कारण विवाह,उपनयन संस्कार, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किया जाते है. सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है. इसलिए कहा जाता है कि देवशयन हो गया है. यहां तक साधु भी भ्रमण बंद कर एक जगह बैठ प्रभु की साधना करते हैं. फिर चार महीने बद सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के बाद भगवान विष्णु एक बार फिर सृष्टि के संचालन को संभाल लेते है.

देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

इस साल देवशयनी एकादशी 11 जुलाई को रात 3.08 से 12 जुलाई को राज 1.55 बजे तक रहेगी. वहीं प्रदोष काल शाम साढ़े पांच से साढ़ें रात बजे तक रहेगा.

देवशयनी एकादशी की पूजा विधि

  • एकादशी की पूजा की एक रात पहले दशमी से ही नमक का सेवन नहीं करते है.
  • पूजा वाले दिन नहा-धोकर भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराते है.
  • धूप-दीप फूल आदि के साथ भगवान के मंत्र का उच्चारण करते हैं

देवशयनी एकादशी पर तीन बड़े संयोग

देवशयनी एकादशी पर इस बार तीन संयोग बन रहे हैं जिसकी वजह से ये बेहद खास हो गई है. पहला सबसे बड़ा संयोग ये हैं कि देवशयनी एकदाशी और देव उठान एकादशी दोनों ही शुक्रवार के दिन पड़ रही हैं. शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित होता है. ऐसे में देवशयनी एकादशी से देवउठान एकादशी तक लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से श्रद्धालुओं को विशेष फल मिलेगा.

इस बार देवशयनी एकादशी पर दूसरा सबसे पड़ा योग सर्वार्थ सिद्धि का बन रहा है जो दोपहर 3 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा. ऐसे में अगर आप कोई शुभ कार्य करने चाहते हैं तो इस मुहूर्त में कर सकते हैं. इस एकादशी पर तीसरा संयोग रवि योग का बन रहा है. मान्यता है कि रवि योग के प्रभाव से कई अशुभ योगों का प्रभाव खत्म हो जाता है और सूर्य का आर्शीवाद मिलता है.