टूटी पाइप लाइन से बह रहा हजारों गैलन पानी!

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-
कई इलाकों में पानी की किल्लत
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। राजधानी में निगम जल विभाग अपने कारनामें से हमेशा सुर्खियों में बना रहता है। हीरापुर रिंग रोड़ नं-2 में सड़क बनाने पाइप लाइन टूटने की सुध नहीं है, उस टूटे हुए पाइप लाइन से रोज हजारों गैलन पानी बर्बाद हो रहा है। जब निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आसपास के रहवासियों ने इसका उपयोग निस्तारी के लिए करना शुरू कर दिया है। इस तरह के दृश्य वार्डों में आते हैं, निगम अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी अनदखी करते है जिसके कारण राजधानी में पानी के लिए हाहाकार मचा रहता है। प्रदेश में भीषण गर्मी को देखते हुए लगभग सभी जलस्त्रोत रसातल की ओर जा रहे वहीं पानी की इस तरह की बर्बादी से सभी 70 वार्डो में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। पीने एवं अन्य उपयोग तक के लिए लोगों को पानी नहीं मिल रहा है.वही पानी की समस्या को लेकर कई ऐसे इलाके हैं जहां आज भी लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जब तक वहां टैंकर नहीं पहुंचता लोगों को पीने का पानी नहीं मिलता। सबसे ज्यादा किल्लत वाले इलाकों में गुढिय़ारी, भनपुरी, उरला, सिलतरा और बोरिया है। इन इलाकों की बड़ी-बड़ी बस्तियां पूरी तरह से टैंकर के भरोसे है। पेयजल संकट न हो इसके लिए निगम अधिकारियों द्वारा किया गया अमृत मिशन का दावा विफल होते हुए नजऱ आ रहा हैं।
गन्दा पानी पीने मजबूर : यह तस्वीर हैं रिंग रोड -2 स्थित हीरापुर कॉलोनी की जहाँ रोड बनाने के लिए सड़कों को खोद कर खुला छोड़ दिया गया लेकिन पाइप टूटने की वजह से वेबजह पानी बह रहा है, लोग अपने निजी उपयोग के लिए इस्तेमाल कर रहे है। इसके साथ ही पानी की बर्बादी का खामियाज़ा लोगों को भुगतना पड़ रहा हैं।
टैंकर के भरोसे : जल संकट से जूझ रहे शहरवासियों को राहत देने के लिए निगम के पास पर्याप्त संख्या में टैंकर तक नहीं हैं। शहर के विभिन्न भागों से पानी टैंकर की मांग हो रही है। फिर भी लोगों के पास पर्याप्त पानी न होने की वजह से उन्हें कई समस्याओ से गुजरना पड़ रहा हैं। लेकिन फिर भी अधिकतर क्षेत्र टैंकर के भरोसे हैं।

आधा शहर प्यासा, अधिकारी मौन
सूखे कंठ प्यास बुझाने की तलाश में आधी आबादी पानी के तलाश में घूम रही है। पानी की भीषण किल्लत को न तो निगम ने संज्ञान में लिया और न ही जोन अधिकारियों ने, शहर की आधी आबादी को भगवान भरोसे छोड़ दिया। राजधानी के लगभग 70 वार्डो में भीषण गर्मी से लोगों के घरों में ठीक से पानी नहीं पहुँच पा रहा हैं, लेकिन वही निगम आला अधिकारी ने जो बड़े-बड़े दावे किये थे, वे सब धराशाही हो गए। गर्मी में पर्याप्त पेयजल की अव्यवस्था को लेकर आम जनता को परेशान होना इस बात प्रमाण है कि अधिकारियों ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। जिसके कारण कृत्रिम जल संकट निर्माण हो रहा है।