जीवितपुत्रिका व्रत : पुत्र की लंबी आयु के लिए रखा जाता है,जाने क्या है इसका महत्व

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-पुत्र के दीर्घायु होने की मनोकामना के साथ जितिया या जीवितपुत्रिका व्रत आज पूरे उत्तर भारत में मनाया जा रहा है। जितिया व्रत पुत्रवती महिलाएं करती हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष के सप्तमी और नवमी के बीच यानी अष्टमी को जितिया पर्व मनाया जाता है। इस बार दो दिन अष्टमी होने से लोग कन्फ्यूजन में थे कि जितिया कब मनाया जाएगा। लेकिन उदया तिथि के कारण पंडितों ने सलाह दी कि 22 सितंबर को ही अष्टमी को जितिया व्रत किया जाएगा।तीन दिन तक चलने वाले इस व्रत की शुरुआत 21 सितंबर यानी सप्तमी की शाम से हुई जो कि नवमी तिथि 23 सितंबर को सुबह पारण तक चलेगा। सप्तमी को महाल्क्ष्मी पूजा के बाद महिलाएं भोजन करती हैं और अष्टमी तिथि को दिनभर भूखा रहकर बिना पानी पिए इस व्रत को रखती हैं। नवमी को व्रत के पारण के साथ ही महिलाएं अपना प्रत तोड़ती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। लेकिन अब इसे देश के अन्य इलाकों में भी मनाया जाने लगा है। इस बार

22 सितंबर या 23 सितंबर कब है व्रत-शनिवार को व्रत रखने वालों के लिए अपराह्न 3:43 से अष्टमी प्रारम्भ है। जबकि 22 सितंबर रविवार को  अपराह्न 2:49 तक रहने वाला है। ऐसे में अष्टमी को देखते हुए उससे पहले उपवास रखना चाहिए और जिसेक खत्म होने के बाद ही पारण करना चाहिए। वहीं दूसरे मत के अनुसार, अष्टमी  तिथि 22 सितंबर को अपराह्न  2: 39 बजे तक है। उदया तिथि अष्टमी रविवार 22 सितंबर को ही पड़ रही है। जिसके अनुसार जीवित्पुत्रिका का व्रत 22 सितंबर को रखना अच्छा रहेगा। जिसके बाद अगले दिन नवमी में पारण किया जाना चाहिए। ऐसे में तीन दिन के इस व्रत का समापन सोमवार को पारण के साथ होगा।

उपवास की शुरुआत मछली खाने से –हिंदू धर्म में पूजा पाठ के दौरान आमतौर पर मांसाहार करना वर्जित माना जाता है। लेकिन बिहार के कई क्षेत्रों में जितिया व्रत के उपवास की शुरूआत मछली खाने से होती है। इस मान्यता के पीछे चील और सियार से जुड़ी जितिया व्रत की एक पौराणिक कथा है।