जानिए कैसे पूजा और भक्ति का एक प्रमुख अंग तिलक है…….

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क :–पूजा और भक्ति का एक प्रमुख अंग तिलक है। भारतीय संस्कृति में पूजा-अर्चना,संस्कार विधि,मंगल कार्य,यात्रा गमन,शुभ कार्यों के प्रारंभ में माथे पर तिलक लगाकर उसे अक्षत से विभूषित किया जाता है।तिलक मस्तक पर दोनों भौंहों के बीच नासिका के ऊपर प्रारंभिक स्थल पर लगाए जाते हैं जो हमारे चिंतन-मनन का स्थान है-यह चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है,इसे आज्ञा-चक्र भी कहते हैं।तिलक लगाने की केवल धार्मिक मान्यता नहीं है बल्कि इसके कई वैज्ञानिक कारण भी हैं।

  • तंत्र शास्त्र में शरीर के तेरह भागों पर तिलक करने की बात कही गई है,लेकिन समस्त शरीर का संचालन मस्तिष्क करता है इसलिए इस पर तिलक करने की परंपरा अधिक प्रचलित है। तिलक लगाने में सहायक हाथ की अलग-अलग अंगुलियों का भी अपना महत्व है।
  • मस्तक पर तिलक लगाने को शुभ और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है।सफलता प्राप्ती के लिए रोली,हल्दी,चन्दन या फिर कुमकुम का तिलक लगाने की प्रथा है।
  • यदि आप किसी भी नए कार्य के लिए जा रहे हैं,तो काली हल्दी का टीका लगाकर जाएं।यह टीका आपकी सफलता में मददगार साबित होगा।जो जातक तिलक के ऊपर चावल लगाता है लक्ष्मी उस जातक के आकर्षण में बंध जाती है और सदा उसके अंग-संग रहती हैं।
  • प्रत्येक उंगली से तिलक लगाने का अपना-अपना महत्व है जैसे मोक्ष की इच्छा रखने वाले को अंगूठे से तिलक लगाना चाहिए,शत्रु नाश करना चाहते हैं तो तर्जनी से,धनवान बनने की इच्छा है तो मध्यमा से और सुख-शान्ति चाहते हैं तो अनामिका से तिलक लगाएं।देवताओं को मध्यमा उंगली से तिलक लगाया जाता है।
  • जो भीप्रतिदिन चंदन का तिलक लगाते हैं उनका घर-आंगन अन्न-धन से भरा रहता है।

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