छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है देर रात तक जागना, जानें बच्चों को जल्दी सुलाने के 6 आसान उपाय

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क।  नवजात शिशु की नींद बहुत हल्की होती है। थोड़ी सी भी खिटपिट की आवाज हुई नहीं कि बच्चे उठ जाते हैं। ऐसे उठने के बाद उन्हें फिर से सुलाना मुश्किल हो जाता है। छोटे बच्चे नींद को लेकर हमेशा ही जिद्दी होते हैं। उन्हें हमेशा अपने मन से ही सोना और जागना पसंद होता है। खासकर कुछ शिशु तो रात में देर तक जागते रहते हैं, जबकि मां-बाप को सोना चाहते हैं। इस तरह के जिद्दी बच्चों को सुलाना एक मुश्किल काम होता है। कई बार तो मां-बाप को समझ ही नहीं आता कि उन्हें कैसे सुलाएं। हालांकि इस तरह की दिक्कत पहली बार मां-बाप बने लोगों को बहुत होती है। अगर आप भी अपने बच्चे की इस आदत से परेशान हैं, तो हम आपको उनको सुलाने के 6 टिप्स देते हैं।

सुलाकर कुछ देर बच्चे पास ही सोएं
बच्चे को सुलाते वक्त उसे सुलाकर कुछ देर उसके पास ही सोएं ताकि उसे लगे कि आप उसके आस-पास ही हैं। फिर उसके पास एक तकिया या कुोई कपड़ा रख दें। इसके अलावा अगर आप उसे पालने में सुला रहें हैं, तो ध्यान रखें कि पालने में किसी भी चीज की सुगघ न आ रही हो। यह सुगंध अच्छा हो बुरा, इससे आपके बच्चे की नींद बीच में ही टूट सकती है। आधी नींद में उठने की वजह से वह और चिड़चिड़ा हो सकता है और दोबारा उसे सुलाने में आपको परेशानी हो सकती है।

बच्चे के सेहत का ख्याल रखें
कई बार बच्चे की तबीयत खराब होती है और आपको पता नहीं चलता कि उसे क्या हुआ है। चो ऐसे में अगर वो ऐसे उठे चो उसे पूरी तरह चेक करें कि उसे क्या हुआ है। कई बार पेट में एसिडिटी की वजह से बच्चा सो नहीं पाता । इसलिए बच्चे को दूध पीलाने या खिलाने पीलाने के बाद कंधे पर रखकर उसे डकार जरुर दिलवाएं। जिससे कि सोते वक्त उसे एसिडिटी जैसी समस्या नहीं होगी।

अच्छे से खिला-पिला कर सुलाएं
डॉक्टर्स की मानें तो शिशु अगर भूखा होता है तो ढ़ग से सोता नहीं है। शिशु भूख की वजह से या तो सो नहीं पाते हैं या आधी नींद से ही उठ जाते हैं। ऐसे में मां को चाहिए कि वह बच्चे का पेट हमेशा भरा रखे। ताकि सोते वक्त बच्चा भूखे पेट न सोए। इसके बाद भी वह उठ जाए तो उसे फिर से दूध पिलाकर सुलाने की कोशिश करिए।

शिशु की मालिश जरुर करें
शिशु की मालिश करना बेहद जरूरी चीज है। इससे बच्चे की बॉडी रिलैक्स फील करती है। अगर नहाने के तुरंत बाद शिशु की मालिश की जाए तो उन्हें उसके बाद तुरंत अच्छी नींद आ जाती है। बच्चों को नहलाते वक्त या फिर बाद में कभी भी खिलौने न दें। इससे बच्चे का मन डाइवर्ट होगा, जिस वजह से बच्चा सोने में आनाकानी करता है और सोता नहीं।

लाइट्स को डिम रखें
बच्चों को सुलाने से पहले कुछ माहौल तैयार करें, इससे उन्हें भी लगता है कि अब सोना है। फिर बच्चे को लेकर लेट जाएं और उसे हल्की थपकी मार कर सुलाएं। डिम लाइट में बच्चों की आंखें चमकती नहीं है इसलिए वह शांत हो जाते हैं। ऐसे में आपने अक्सर देखा होगा कि बच्चा अगर सोया हो और अचानक से लाइट जलाएं तो वह जग जाता है। इसलिए बच्चों को सुलाते वक्त लाइटिंग का ख्याल रखें। साथ ही आप अगर उसे कुछ गाकर सुना सके तो उसे और अच्छी नींद आएगी।

बच्चों को सुलाने का वक्त तय करें
यह काम एक दिन में ते नहीं होगा पर अगर आप धीरे-धीरे एक ही वक्त पर बच्चे को सुलाएंगे, तो उन्हें उस वक्त पर ही सोने की आदत हो जाएगी। इस तरह वो रोज उसी वक्त पर आसानी से सोने लगेंगे। इसी तरह आप शुरू से ही बच्चों में सोने की आदत का विकास कर सकते हैं।