छत्तीसगढ़: भरोसेमंद हुई बिजली…उपभोक्ताओं को मिल रही संतोषप्रद सेवाएं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। यह सुनकर किसी को भी हैरानी हो सकती है कि खुद को बिजली के मामले मे संरचना कहने वाला राज्य अपने गांवो के लिए पडोसी राज्य से बिजली ले रहा था। लेकिन हो यही रहा था। राज्य निर्माण के 19 साल बाद भी छत्तीसगढ के 174 गांव बिजली के लिए मध्यप्रदेश के मोहताज थे। और वह बिजली भी ऐसी कि कभी चली जाए तो फिर पता नही कब जाए। और उसका चली जाना जाए दिन की बात थीं। यह तो रहा सरगुजा का किस्सा।

अब किस्सा बस्तर का । यहां की अधिकांश बिजली लाइन दुर्गम और घने जंगलो के गुजरती है। आंधी-तुफान के दौरान पेड की डालियां गिरने से आए दिन बिजली उप हो जाती है। इन सारी बाधाओ के बीच यदि बिजली पहुुंच भी जाती थी। तो उसमे पर्याप्त वोल्टेज नही रहता था। 19 सालों मे बस्तर भी इस समस्या से निजात नही पा सका। और उधर देवभोग का हाल भी बस्तर जैसा ही था। पता नही बिजली कब चली जाए और फिर पता नही कब आए। अब भी गई तो वोल्टेज की कमी। हालत यह थी कि .त्रस्त हो चुके लोग आंदोलन पर उतारू थे। बस्तर हो, सरगुजा हो या फिर राजनांदगांव हो। इन सभी का एक जैसा हाल था।