चीन की वो लेजर गन जो एक किलोमीटर तक करेगी मार

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-  हॉलीवुड फिल्मों में आपने लेजर गन का धड़ल्ले से इस्तेमाल होते देखा होगा. लेकिन अब इसका इस्तेमाल हकीकत में होने जा रहा है. चीनी अकादमी के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि उन्होंने लंबी दूरी की लेजर गन का आविष्कार किया है.ZKZM-500 लेजर असॉल्ट के नाम वाली इस राइफल के बारे में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में लिखा गया था. अखबार में उसके बारे में बताया गया कि ये अदृश्य एनर्जी बीम वाली बंदूक होगी, जो इंसान को घायल करने में सक्षम है.अखबार के आर्टिकल के मुताबिक इस हथियार का इस्तेमाल कोवर्ट मिलिट्री ऑपरेशन, बंधक बनाने वाली परिस्थितियों और अवैध प्रदर्शनों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है.चीन के जियान इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्टिक एंड प्रिसीशन मैकेनिक्स से जुड़े रिसर्चर्स ने इस लेजर गन का निर्माण किया है. ये चीनी अकादमी ऑफ साइंसेस का हिस्सा है. CAS एक सरकारी इंस्टिट्यूट है, जो दुनिया का सबसे बेहतरीन परफॉर्म करने वाला संगठन है.

जानलेवा नहीं है लेजर गन
CAS के मुताबिक बड़ी तादाद में इन गन को बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. रिसर्चर्स के मुताबिक ये हथियार जानलेवा नहीं है. लेकिन इससे होना वाला दर्द असहनीय होता है. इससे बिना आवाज न दिखने वाली लेजर निकलती है.रिसर्चर्स के मुताबिक ‘कोई नहीं जान सकता कि हमला कहां से हुआ है’, ये एक हादसे से ज्यादा नहीं लगेगा. अखबार में छपे आर्टिकल के मुताबिक ये जानलेवा नहीं है. सिंगल शॉट में इससे कोई नहीं मर सकता. लगातार इससे किसी भी हमला करने से शरीर में छेद हो सकता है.

कितना नुकसान पहुंचाएगी गन?
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक लंबी दूरी से निशाना लगने पर ये गन सिर्फ कपड़े और बालों को नुकसान पहुंचाएगी. इससे ज्यादा गंभीर रूप से घायल नहीं होगा. इससे प्रदर्शन को तितर-बितर किया जा सकता है.इस लेजर गन का वजन 3 किलोग्राम है. ये एक लिथियम बैट्री से काम करती है, वैसी ही बैट्री जो मोबाइल में इस्तेमाल की जाती है.
लेकिन वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर मतभेद है कि ये शिकार को दावे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है. क्योंकि ये हवा और पानी से भेदते हुए पहुंचेगी.

हथियारों की तकनीक में लेजर सबसे आगे
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की पुरानी खबरे में दावा किया गया था कि चीन लेजर तकनीक में चीनी सरकार 2 अरब युआन का निवेश करने वाली है. हाल ही में अमेरिकी सेना ने चीन पर आरोप लगाया है कि चीनी मिलिट्री बेस से लेजर के चलते आंखों की चोट लग रही है. आरोप-प्रत्यारोपों की इस दौर के बीच ये बात दावे के साथ कही जा रही है कि चीन लेजर तकनीक पर काम कर रहा है.1980 में यूनाइटेड नेशंस ने लेजर से आंखों को अंधा बनाने वाले हथियारों पर बैन लगा दिया था. ये हथियार स्थायी तौर पर आंखों को खराब कर देते थे. चीन का ऐसी गन का निर्माण सीधे-सीधे उल्लघंन है.

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