गाड़ियों की बिक्री में लगातार 9वे महीने में भी गिरावट दर्ज

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- देश की अर्थव्यवस्था पर मंदी के काले बादल छा चुके हैं. सबसे ज्यादा बुरा हाल ऑटो इंडस्ट्री का है. देश में गाड़ियों की बिक्री 19 साल के निचले स्तर पर आ चुकी है. जुलाई में गाड़ियों की बिक्री में लगातार 9वें महीने में भी गिरावट दर्ज की गई. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमाबाइल मैन्यूफैक्चरर्स यानी सियाम के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में गाड़ियों की घरेलू बिक्री 30.9 फीसदी कम हो गई है। इससे पहले दिसंबर 2010 में 21.81 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी. ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोग मानते हैं कि उन्होंने मंदी का ये दौर सालों से नहीं देखा है. ऑटो सेक्टर में मंदी के 5 बड़े कारण जिम्मेदार हैं. पहला- उधार देने वाली कंपनियों में नकदी की कमी. दूसरा- GST और टैक्स की मार, तीसरा- BS-6 इंजन की वजह से गाड़ियों की क़ीमत में इजाफा. चौथा- ग्रामीण इलाकों के लोगों की इनकम में कमी, पांचवां- गाड़ियों के लिए सुरक्षा नियमों का कड़ा होना.इन्हीं कारणों की वजह से कार बनाने और बेचने वाली कंपनियों की स्थिति डांवाडोल है. अर्थव्यवस्था में नकदी संकट को खत्म करने के लिए RBI इस साल 7 महीनों के भीतर 4 बार ब्याज दरों में कटौती कर चुका है. बार-बार ब्याज दरों में कटौती इकोनॉमी में मांग बढ़ाने के लिए की जा रही है. लेकिन इसका भी कोई असर दिखता नजर नहीं आ रहा है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कब दूर होगी ये मंदी? देश में कारों की बिक्री को रफ्तार देनी है तो कारों की लागत को कम करना होगा. ऑटो इंडस्ट्री पर टैक्स का भारी भरकम बोझ है. इसी टैक्स की वजह से कारों की कीमतों में इजाफा हो जाता है. ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ACMA के मुताबिक अभी गाड़ियों के 70 फीसदी पार्ट्स पर 18 परसेंट GST लगता है. 30 फीसदी कलपुर्जों पर 28% GST लगता है.कारों और बाइक्स पर भी 28% GST लगता है. इस पर 1% से 15% तक सेस भी लागू होता है. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की GST की दर को घटाकर एक समान 18% करने की मांग है, ताकि डिमांड बढ़े और लाखों लोगों की नौकरियां बच सकें ऑटो उद्योग को मंदी से उबारने के लिए सरकार को जल्द ही बड़े एक्शन लेने की जरूरत है. अगर ऑटो सेक्टर में मंदी का दौर यूं ही जारी रहा तो देश के लाखों परिवारों पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा.