कैंसर की वजह स्किन और हाइट भी बनती है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :     कैंसर का नाम हर किसी को परेशान कर देता है। इस बीमारी से शिकार रोगी के मन में यह ख्याल आता है कि आखिर क्या कारण है जो वे इस जानलेवा बीमारी से ग्रस्त है।  शुरुआत में तो इस बीमारी को पहचान पाना मुश्किल है लेकिन जब इसकी कोशिकाएं शरीर में फैलनी शुरू हो जाती हैं तब कैंसर का पता चलता है। कई मामले तो एेसे भी होते हैं, जिसमें डॉक्टर भी पता नहीं लगा पाते कि आखिर इसके पीछे का क्या कारण है। आइए जानें किन-किन लोगों को कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

किस तरह बढ़ता है कैंसर
रोजाना की शारीरिक प्रक्रिया के दौरान कई तरह की कोशिकाओं का निर्माण होता है। जब कोशिकाएं मैच्योर होकर मृत कोशिकाओं में नहीं बदलती तो ये एक गुच्छा बना लेती हैं। कोशिकाओं का यही गुच्छा ट्यूमर का रूप ले लेता है जिसके बढ़ने पर यह कैंसर बनता है।

कैंसर का जल्दी शिकार होते हैं ये लोग
कैंसर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बदलता लाइफस्टाइल, खान-पान की अनदेखी आदि। कई वजहें ऐसी भी हैं जिस कारण कुछ लोग जल्दी इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं।

जींस है मुख्य वजह
फैमिली के जींस कैंसर को फैलाने की मुख्य वजहों में से एक है। अगर पहले से ही घर का कोई सदस्य कैंसर से पीड़ित रह चुका है तो परिवार के बाकी सदस्य इसके जल्दी शिकार हो सकते हैं। जींस में कैंसर इसकी मुख्य वजह है। ऐसे लोगों को समय-समय पर अपनी जांच करवाते रहना चाहिए।

महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को खतरा
एक रिसर्च के अनुसार जेंडर भी कैंसर के पीछे का कारण है। महिलाओं के मुकाबले पुरुष कैंसर का शिकार जल्दी हो जाते हैं। जेंडर स्पेसिफिक कैंसर की रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में कैंसर से मौत होने की स्भावना 60 प्रतिशत ज्यादा होती है जबकि इस बीमारी से ग्रस्त होने वाले पुरुषों की बात करें तो उनमें 70 प्रतिशत कैंसर से ग्रस्त होने के चांस बढ़ जाते हैं।

हाइट भी है एक कारण
स्वीडन के शोधकर्ताओं के द्वारा की गई रिसर्च में हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। लंबाई भी कैंसर के लिए उतनी ही जिम्मेदार है, जितना की मोटापा,स्मोकिंग और अनहेल्दी डाइट। जितनी ज्यादा लंबाई होगी शरीर में कोशिकाएं भी उतनी ही ज्यादा होगी।

स्किन टाइप भी है वजह
आजकल स्किन कैंसर का खतरा भी बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। कैंसर होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी स्किन टाइप किस तरह की है। गोरी त्वचा यानि स्किन टाइप 1 और 2 वाले लोगों को कैंसर होने के चांस ज्यादा होते हैं। वहीं, टाइप 5 और 6 के लोगों में इसका खतरा कम होता है।

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